गुज़र गया है आज भी…

गुज़र गया है आज भी…

गुज़र गया है आज भी,

यूँ ही बेवजह ही,

ना ही पुराना फिर हुआ,

ना ही हुआ कुछ नया ही।

मायूस हैं क्यूँ लम्हे,

बेबस है क्यूँ निगाहें,

ढूंढ़ती है जिसको मँज़िलें,

वो कहाँ मिला ही।

ये ज़िदंगी धूप में जलकर,

बेज़ार हो रही है,

टुकड़ों-टुकड़ों में बंटकर,

ख़ुशियाँ हजार हो रही हैं।

दिल में कोई कसक है,

कोई खुमारी छा रही है,

लफ्ज़ों की जरूरत नहीं है,

ख़ामोशियाँ शोर मचा रही हैं।

सच को है सबने देखा,

पर रास नहीं आया,

तुम्हें झूठ का पता था,

फिर दिल से क्यूँ लगाया।

कोशिशें बहुत की हैं,

पर मिला कुछ कहाँ ही,

ना ही रात हमें मिली,

ना ही हिस्से में आई सुबह ही…

© abhishek trehan

क्या आप अपने जीवन से खुश हैं?

1- जीवन कुछ और नहीं बल्कि उतार और चढाव का समूह है जो कि जीवन में आपको आपके होश में लाने के लिए आते रहते हैं।

2- जीवन को दर्दनाक नहीं होना चाहिए दर्द केवल गलतियों को करने और उनसे सीखने के परिणाम के रूप में मिलता है।

3- सच्चा प्यार तब होता है जब आपके पास कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसके लिए आप मर सकते हैं।

4- अगर आपका दिल खूबसूरत है तो जिंदगी खूबसूरत है। यदि आपका मन साफ है तो दुनिया भी आपको साफ दिखेगी।

5- सत्य दुखदायी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह एक सीधी रेखा में यात्रा करने वाली एकमात्र चीज़ है।

6- गलतियाँ करने से शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। क्योंकि यह उस बात का पता लगाने का एकमात्र तरीका है जिसका आपको जीवन भर अफसोस रहेगा।

7- अगर आप दुनिया को बदलना चाहते हैं तो वह दुनिया बन जाइए जिसे आप देखना चाहते हैं।

8- दर्द से बचें नहीं इसे जीने का माध्यम बनाइये, बदलाव लाने के लिए दबाव की आवश्यकता होती है।

9- स्वस्थ जीवन का सबसे बड़ा रहस्य खुशी है। विडंबना यह है कि हम अपना पूरा जीवन संघर्ष करते हुए लड़ते हैं, जिससे हमें खुशी मिलती है।

10- हर चीज को करने के हमेशा कुछ गलत तरीके और कुछ सही तरीके होते हैं। असफलता का अर्थ केवल कुछ खराब निर्णय और कुछ गलत अनुमान है।

11- हम सभी समय के साथ दौड़ में हैं। लेकिन कोई नहीं जानता कि हम समय को कैसे हरा सकते हैं।

12- सबसे कीमती उपहार जो हम किसी को भी दे सकते हैं वह हमारा ध्यान है।

जिंदगी में कुछ चीजों को न कहना भी सीखिये

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1- उन लोगों को न कहना सीखिये जो हर वक्त आपका ध्यान चाहते हैं। एेसे लोग आपको अपनी तरफ आकर्षित करके आपको स्वयं से दूर कर देते हैं।

2- ऐसे कामों को न कहना सीखिये जिन्हें आप सिर्फ मजबूरी में करते हैं। लंबे अंतराल में ऐसे कार्य आपके लिए जितना आप सोचते हैं उससे कहीं अधिक नुकसानदेह साबित होते हैं।

3- ऐसे लोगों को न कहना सीखिये जो आपको अपने लिए बदलना चाहते हैं। जो लोग आपको आपके स्वाभाविक रूप में स्वीकार नहीं करते हैं वे आपके योग्य नहीं होते हैं।

4- ऐसी मानसिकता को न कहना सीखिये जो सभी को खुश करना चाहती है। आप एक समय में सभी को खुश नहीं कर सकते हैं।

5- क्रोध,ईर्ष्या आदि नकारात्मक मनोभावों को न कहना सीखिये जो आपकी मानसिक ऊर्जा को जोंक की तरह चूसकर आपको थका देते हैं।

6- उन अव्यावहारिक अपेक्षाओं को न कहना सीखिये जो आप दूसरों और खुद से रखते हैं। याद रखिए कि आपकी हर अपेक्षा पर न तो दूसरे और न ही आप खुद खरे उतर सकते हैं।

7- न कहना सीखिये उन चीजों और लोगों को जिन्हें आप कसकर पकड़ना चाहते हैं। जीवन का यह नियम है कि जिस चीज को आप जितना ज्यादा चाहते हैं वह आपसे उतनी ही जल्दी दूर हो जाती है।

8- लोगों को बदलने की कोशिश को न कहना सीखिये, आप सिर्फ एक ही इंसान को बदल सकते हैं जो आप स्वयं है।

9- न कहना सीखिये उस प्रवृत्ति को जो अपनी असफलताओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराती है। बेहतर होगा कि आप अपने कामों की जिम्मेदारी स्वयं लेना सीखिये।