जल रहा है कोई,कोई ख़ाक हो रहा है…

जल रहा है कोई

कोई ख़ाक हो रहा है

हमें इश्क हुआ है उनसे

ज़माना राख हो रहा है

बड़ी मासूम सी कशिश है

बड़ा मासूम है वो चेहरा

सर्दियां बढ़ रही हैं

इश्क बेशुमार हो रहा है

कभी फुर्सत मिले तुम्हें तो

हाल-ए-दिल तुम्हें बताएं

जुबां कुछ कह रही है

कुछ बयान हो रहा है

पहले उठायी नज़रे

ज़ुल्फों को फिर संवारा

हल्का सा मुस्कुरा दिये वो

मौसम गुलज़ार हो रहा है

हसरते मचल रही हैं

काँटा गुलाब हो रहा है

फासले मिट रहे हैं

पूरा हर हिसाब हो रहा है

हंसकर कुबूल की है

उन्होनें हमारी हर दुआएँ

शुक्रगुज़ार हूँ मैं उनका

जीने का इंतज़ाम हो रहा है…

(स्वलिखित)

खोने को कुछ नहीं है…

खोने को कुछ नहीं है,

पाना भी कुछ कहाँ है,

दूर दिखता है कोई साया,

उठता यादों का बस धुआँ है।

पाया था जो वो है खोया,

खोया भी गया कहाँ है,

मज़िल सबकी वही है,

मुसाफ़िर सब यहाँ है।

तुम साथ नहीं तो क्या है,

संग यादों की तपिश है,

तेरा बिना अधूरा हूँ मैं,

बड़ी मुकम्मल सी ये कशिश है।

लंबा है ये सफ़र भी,

हमसफ़र संग नहीं है,

प्यासा है कोई मुसाफ़िर,

पानी कहीं नही है।

तकलीफ़ तब है होती,

टूटती हैं जब डोरें,

टूट जाए जब कोई डोरी,

जुड़ती वो फिर कहाँ है।

कुछ हसरतें हैं अधूरी,

कुछ काम हैं जरूरी,

ज़िदगी चल रही है,

हम जीते अब कहां है…

(स्वलिखित)

नफ़रत है किसी को मुझसे कोई ऐतबार कर रहा है…

नफ़रत है किसी को मुझसे,

कोई ऐतबार कर रहा है,

किसी को सूरत पसंद नहीं है,

कोई दीदार कर रहा है।

दर्द का भी तुम देखो,

होता है हिसाब अपना,

कभी जीने के लिए है जरूरी,

कभी बीमार कर रहा है।

मिला तो हमें बहुत है,

गिनते हम कहाँ है,

पुराना जख़्म भर रहा है,

नया इंतज़ार कर रहा है।

किस कदर है इश्क तुमसे,

इस कदर है तलब तुम्हारी,

छूट जाऊँ मैं अब ख़ुद से,

जुड़ जाए अब रूह हमारी।

उन्होनें ख़ैरियत नहीं है पूछी,

मगर उन्हें हमारी हर ख़बर है,

हमसे वो बेख़बर नहीं हैं,

हम पर उनकी हरदम नज़र है

समझते हैं वो मजबूरी,

कुछ काम हैं जरूरी,

हल्की आग सुलग रही है,

धुआँ बेशुमार उठ रहा है…

(स्वलिखित)

मँज़िले भी तेरी हैं रास्ता भी तेरा है…

मँज़िले भी तेरी हैं,

रास्ता भी तेरा है,

मैं भटका हुआ मुसाफ़िर हूँ,

हवाओं में मेरा बसेरा है।

वक्त की बंद मुट्ठी में,

छिपा राज़ कोई गहरा है,

जिंदगी के कुछ सवालों पर,

नसीब का पहरा है।

साथ चलने की ज़िद है,

रात का अँधेरा है,

दूर कहीं मेरा मुकाम है,

पास घर तेरा है।

मर्ज़ियाँ भी तेरी हैं,

शहर भी तेरा है,

हारी हुई बाज़ी है,

मुस्कुराता हुआ चेहरा है।

दुनियादारी की बंदिश है,

इश्क ये बहरा है,

डूबना ही मकसद है,

दरिया बहुत गहरा है।

कल भी अकेला था,

सच आज भी अकेला है,

लोग सब उसके थे,

ख़ुदा बस मेरा है…

(स्वलिखित)

ना कोई मेरे लिए ना मैं किसी के लिए…

ना कोई मेरे लिए,

ना मैं किसी के लिए,

एक वजह ही काफ़ी है,

ज़िदंगी में आवारग़ी के लिए।

ना अब कोई ख्वाहिश है,

ना अब कोई तमन्ना है,

बेख़ुदी में जिए जा रहे हैं हम,

अब बस ख़ुदी के लिए।

जिस तरह चढ़ता है,

उसी तरह उतरता है,

कोई नशा भी कहाँ ठहरता है,

कभी सारी ज़िदगी के लिए।

तूफ़ान आता है,

तो आ जाने दो,

कोई ख्वाब जलता है,

तो जल जाने दो।

बदलती हवाओं का भी,

अब हमें ख़ौफ नहीं,

डरते तो तब,

जब जीते हम और किसी के लिए।

दर्द ने कहाँ,

हमें अभी पूरा परखा है,

ग़मों का बादल भी,

कहाँ जम के अभी बरसा है।

नमी बाकी है,

आँसुओं को सूख जाने दो,

ज़िदगी को थोड़ा,

अभी और हमें आज़माने दो।

मिलकर भी कहीं ना मिलो,

तो भी कोई परवाह नहीं,

यादों का थोड़ा नमक ही काफी है,

पुराने जख़्मों को जीने के लिए।

रोको मत अश्कों को,

अब बह जाने दो,

बारिश में कोई भीग रहा है

बहते अश्कों को पीने के लिए…

(स्वलिखित)

पानी जैसे मिट गया गिरकर शराब में…

पानी जैसे मिट गया,

गिरकर शराब में,

दिल भी शायर हो गया,

उनके शबाब में।

अदब ने मांग की थी,

तहज़ीब ने झुका दिया,

उन्हें गुमान हो गया,

झुकना है हमारे मिज़ाज में।

कोशिश बहुत की थी,

ना हो राज़-ए-मोहब्बत कभी बयां,

वो संग मेरे क्या चल दिए,

फसाना बन गया बातों ही बात में।

लिखते रहे उनके लिए,

जिन्होने कभी हमें पढा़ नहीं,

कभी ख़ामोश हम रहे,

कभी कुछ उन्होनें कहा नहीं।

लब तो ख़ामोश रहेंगे,

कहीं निगाहें ना कुछ कहें,

हार गए दिल वो अपना,

हमें हराने की फ़िराक में।

जगह नहीं है इस दिल में,

अब दुश्मनों के लिए,

एक वो ही काफ़ी हैं अब,

हमें मिलाने को ख़ाक में…

(स्वलिखित)

तो समझना इश्क है…

हुस्न की तारीफ़ तो,

करती रहेंगी महफिलें,

अगर वो पलट कर देख लें,

तो समझना इश्क है।

यूं तो जवानी के जोश में,

होश गँवाते हैं सभी,

अगर झुर्रियाँ भी प्यारी लगने लगें,

तो समझना इश्क है।

चेहरे और जिस्म के तो,

मिलेंगे बहुत तलबग़ार भी,

अगर कोई रूह छू ले,

तो समझना इश्क है।

अपने लिए बातों के मतलब,

तो बदलते हैं सभी,

अगर तुम्हारे लिए कोई खु़द को बदल ले,

तो समझना इश्क है।

छीन लेती है हर वो चीज़ दुनिया,

जो हमें अजीज़ है,

अगर कोई महसूस यादों में कर ले,

तो समझना इश्क है।

संग तेरे सब हँसेंगे,

यही दुनिया की रीत है,

अगर कोई आँसुओं को पढ़ ले,

तो समझना इश्क है।

जब चलोगे संग मेरे,

तो मिलेंगी ठोकरें बहुत,

अगर ठोकरों को कोई नसीब समझ ले,

तो समझना इश्क है …

तेरी यादों का धुआं उठ रहा दिल भी जैसे ख़ामोश कोई समुंदर है…

तेरी यादों का धुआं उठ रहा,

दिल भी जैसे ख़ामोश कोई समुंदर है,

कुछ भूल गए कुछ याद रहा,

देखो आया फिर वही बेदर्द दिसंबर है।

मौसम भी बदलते हैं धीरे से,

तुम हवाओं से भी तेज़ बदल गई,

हैरान सा मैं कुछ ना समझ सका,

ज़हन में ताज़ा अब भी वो मंज़र है।

डूबने का भी अब ख़ौफ नहीं,

किनारों पर भी छिपा कोई खंज़र है,

ना भूल सकूँ, ना ढूंढ़ सकूँ

वो ज़मीन आज भी प्यासी और बंजर है।

मेरा मुझमें अब कुछ भी नहीं,

सबकुछ तो तुझ पर लुटा आया हूँ,

निकला था बदलने अपनी किस्मत को,

ख़ुद अपना ही लिखा मिटा आया हूँ।

ना शाम ही अब ठहरती है,

ना आकाश ही अब रंग बदलता है,

बस रात ही चलती रहती है,

जिद्दी दर्द भी कहाँ अब पिघलता है।

टूट के मैं अब बिखर रहा,

कितना सूना मेरा अब ये अंबर है,

ना छू ही सकूँ ना पा ही सकूँ,

क्या तू रहती कहीं मेरे ही अंदर है…

विरोधाभास के सबसे बहतरीन कुछ उदाहरण क्या हैं ?

1 – जीवन में यदि आप लोकप्रिय नहीं हैं तो आप प्रसिद्धि चाहते हैं, अगर आप बहुत लोकप्रिय हैं तो आप जीवन में एकांत चाहते हैं।

2 – अगर आप सिंगल हैं तो आप एक रिश्ता चाहते हैं अगर आप रिश्ते में हैं तो आप जीवन में कुछ स्पेस और स्वतंत्रता चाहते हैंं ।

3 – अगर आप गरीब हैं तो आप पैसा चाहते हैं, यदि आप अमीर हैं, तो आप बस एक साधारण जीवन जीना चाहते हैं।

4 – किसान जो पूरे राष्ट्र का पेट भरता है, अक्सर आधा या खाली पेट सोता है।

5 – बड़े घरों में रहने वाले लोग आमतौर पर छोटे दिल के होते हैंं, जबकि सड़क के किनारे या छोटे से मकान में रहने वाले लोगों के पास आमतौर पर एक बड़ा दिल होता है।

6 – लोगों अक्सर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करते हैंं, जो उनकी परवाह नहीं करते हैं और उपेक्षा उन लोगों की करते हैं जिन्हें वास्तव में उनकी परवाह है।

7 – हमारे देश में एक चपरासी बनने के लिए योग्यता कक्षा 8 पास है, जबकि किसी भी योग्यता के बिना आप एक राजनीतिज्ञ बन सकते हैं और देश को चला सकते हैं।

8 – हम सभी ईश्वर में विश्वास रखते हैं लेकिन अपनी ही परछाई को भूत समझकर उससे डरते हैं।

ना अब वो पहले सी बाते हैं,ना अब वो पहले सी आहट है…

ना अब वो पहले सी बाते हैं,

ना अब वो पहले सी आहट है,

ना कहीं चैन मिलता है दिल को,

ना चेहरे पर वो मुस्कुराहट है।

कुछ सहमी-सहमी सी ख्वाईशे हैं,

कुछ दुनियादारी की मिलावट है,

अब ना धुन वो बजती है,

अब ना हवाओं में वो सरसराहट है।

ना जाने कैसा ये मंज़र है,

ना जाने कैसी ये कड़वाहट है,

दूर तक फैला दुनिया का मेला है,

बस उससे मिलने की छटपटाहट है।

ज़िदगी को कहाँ कोई समझा है,

बड़ी उलझी सी इसकी बनावट है,

चंद लफ्ज़ों की ये अधूरी कहानी है,

बड़ी आड़ी-तिरछी इसकी लिखावट है।

इस सफ़र की कहाँ कोई मँज़िल है,

कुछ रिश्तों की बस गर्माहट है,

कभी सफ़र मँज़िल से भी ख़ूबसूरत है,

कभी राहगुज़र ही मँजिल में रूकावट है।

जिंदगी के उलझे इस खेल में,

कदम-कदम पर फिसलाहट है,

ये जीवन है शतरंज का खेल नहीं,

हर चाल में साजिशों की कोई सुगबुगाहट है…