जिंदगी में कुछ चीजों को न कहना भी सीखिये

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1- उन लोगों को न कहना सीखिये जो हर वक्त आपका ध्यान चाहते हैं। एेसे लोग आपको अपनी तरफ आकर्षित करके आपको स्वयं से दूर कर देते हैं।

2- ऐसे कामों को न कहना सीखिये जिन्हें आप सिर्फ मजबूरी में करते हैं। लंबे अंतराल में ऐसे कार्य आपके लिए जितना आप सोचते हैं उससे कहीं अधिक नुकसानदेह साबित होते हैं।

3- ऐसे लोगों को न कहना सीखिये जो आपको अपने लिए बदलना चाहते हैं। जो लोग आपको आपके स्वाभाविक रूप में स्वीकार नहीं करते हैं वे आपके योग्य नहीं होते हैं।

4- ऐसी मानसिकता को न कहना सीखिये जो सभी को खुश करना चाहती है। आप एक समय में सभी को खुश नहीं कर सकते हैं।

5- क्रोध,ईर्ष्या आदि नकारात्मक मनोभावों को न कहना सीखिये जो आपकी मानसिक ऊर्जा को जोंक की तरह चूसकर आपको थका देते हैं।

6- उन अव्यावहारिक अपेक्षाओं को न कहना सीखिये जो आप दूसरों और खुद से रखते हैं। याद रखिए कि आपकी हर अपेक्षा पर न तो दूसरे और न ही आप खुद खरे उतर सकते हैं।

7- न कहना सीखिये उन चीजों और लोगों को जिन्हें आप कसकर पकड़ना चाहते हैं। जीवन का यह नियम है कि जिस चीज को आप जितना ज्यादा चाहते हैं वह आपसे उतनी ही जल्दी दूर हो जाती है।

8- लोगों को बदलने की कोशिश को न कहना सीखिये, आप सिर्फ एक ही इंसान को बदल सकते हैं जो आप स्वयं है।

9- न कहना सीखिये उस प्रवृत्ति को जो अपनी असफलताओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराती है। बेहतर होगा कि आप अपने कामों की जिम्मेदारी स्वयं लेना सीखिये।

कुछ बातें जो जीवन में ज्यादा महत्व नहीं रखती हैं

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1- फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर लाइक्स की संख्या, आपके अधिकांश फालोअर्स लाइक बटन पर क्लिक इसलिए करते हैं क्योंकि जब वे सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं तो वह आपके द्वारा लाइक पाने की उम्मीद करते हैं। यह कड़वा है लेकिन सच है।

2- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप स्कूल की परीक्षा में शीर्ष पर हैं या विफल हैं। अंक वास्तव में आपके जीवन में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाते हैं। आत्म- विकास पर ध्यान केंद्रित करना कहीं ज्यादा बेहतर है। एेसे बहुत से उदाहरण हैं जिन्होने स्कूल में बहुत अच्छा नहीं किया पर जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल किया।

3- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि जीवन में आपका कोई ब्वाय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड है या नहीं , ब्वाय फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड का होना जीवन में अनिवार्य नहीं है। इनके बिना भी जिंदगी में बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।

4- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप लंबे या छोटे, मोटा या पतले, काले या गोरे हैं। आपके शरीर की आकृति आपकी आंतरिक सुंदरता को परिभाषित नहीं करती है।

5- ब्रेकअप का मतलब जीवन का अंत नहीं है। आगे बढ़ना सीखिये, आप हमेशा किसी बेहतर को पा सकते हैं।

6- आप लोगों को उनकी जाति और भाषा से जज नहीं कर सकते हैं। कोई भी इंसान जाति या भाषा के आधार पर श्रेष्ठ या निम्न नहीं होता है, इंसानों के साथ केवल इंसानियत का व्यवहार कीजिए।

7- इंटरव्यू में खारिज होना या कॉलेज प्लेसमेंट में सेलेक्ट नहीं होना जीवन का अंत नहीं है, हो सकता है कुछ बड़ा आपके लिए इंतजार कर रहा हो।

क्योंकि हर बार भूल सुधारने का मौका नहीं मिलता

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राधिका और सिद्धार्थ की मुलाकात एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर हुई थी। समय के साथ उनकी दोस्ती गहरी हो गई थी। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती मुलाकातों में और फिर मुलाकातें गहरे प्रेम में रूपांतरित हो गईं थीं। इस प्रेम की परीणिति शादी के रूप में हुई और दोनों विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए।

प्रेम उन्मुक्त होता है पर विवाह एक बंधन है, प्रेम सुखद कल्पना है तो विवाह यथार्थ का धरातल है। यथार्थ की जमीन कठोर होती है जहां कोरी भावुकता से काम नहीं चलता है। विवाह के रिश्ते से जुड़ी हुई कुछ मर्यादाएं और जिम्मेदारियां होती हैं जिसका पालन पति-पत्नी दोनों को करना पड़ता है। शुरुआत के कुछ वर्षों तक तो सिद्धार्थ और राधिका काफी हँसी मजाक और नोक झोंक किया करते थे। पर शादी के कुछ सालों बाद उनमें छोटी छोटी-छोटी सी बातों पर झगड़े होने लगे।

इस बेकार की लड़ाई में कोई भी झुकने को तैयार नहीं था उन दोनों का अहंकार हिमालय से भी ऊंचा था। समय पंख लगा कर उड़ रहा था अब उनके जीवन में एक नन्हीं सी परी मुस्कान भी आ गई थी जिसकी परवरिश की जिम्मेदारी उन पर थी। मुस्कान के आने के बाद राधिका का अधिकांश समय बेटी की देखभाल करने में बीतता था राधिका और सिध्दार्थ के बीच अब संवाद कम और खामोशी बढ़ गई थी। दोनों बिना कुछ कहे खामोशी से जिंदगी की गाड़ी को किसी तरह से खींच रहे थे।

जीवन में कुछ घटनाएं एेसी घटती हैं जो हमारे नजरिये को बदल कर रख देती हैं एेसा ही कुछ राधिका और सिद्धार्थ के जीवन में भी घटित हुआ था। उस दिन उनकी शादी की सालगिरह थी, राधिका ने उस दिन सिद्धार्थ को विश नहीं किया वो पति के रिस्पॉन्स को देखना चाहती थी। उस दिन सिध्दार्थ सुबह जल्दी उठा और बिना कुछ कहे घर से बाहर निकल गया। राधिका रुआँसी हो गई उसे लगा सिध्दार्थ आज के दिन उसे इग्नोर कर रहा है।

दो घण्टे बाद घर की कॉलबेल बजी, राधिका दौड़ती हुई गई और जाकर दरवाजा खोला । दरवाजे पर गिफ्ट के पैकेट और उसकी पसंद के फूलों के बुके के साथ सिध्दार्थ खड़ा मुस्कुरा रहा था। सिध्दार्थ ने उसे गले से लगा लिया और सालगिरह को विश किया। फिर वह बिना कुछ कहे अपने कमरे मेँ चला गया।

राधिका गिफ्ट का पैकेट खोल कर देखने लगी तभी उसके मोबाइल फोन पर घंटी बजी उसके पास स्थानीय पुलिस स्टेशन से फोन आया था फोन पर पुलिस वाला कह रहा था कि सारी मैम बहुत दुख के साथ आपको बताना पड़ रहा है कि आपके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, उनकी जेब में पड़े पर्स से आपका फोन नम्बर ढूढ़ कर आपको कॉल किया है।

राधिका के हाथ से फोन छूट कर जमीन पर गिर पड़ा उसे इस खबर पर सहसा विश्वास ही नहीं हुआ वह सोचने लगी की सिध्दार्थ तो अभी-अभी घर के अन्दर आये हैं और मुझे गले लगाकर विश भी किया है जरूर पुलिस वालों को कोई गलतफहमी हुई है । तभी उसके दिमाग में एक बात बिजली की तरह कौँध गई उसे कहीं पर सुनी एक बात याद आ गई कि मरे हुये इन्सान की आत्मा अपनी विश पूरा करने एक बार जरूर आती है।

राधिका बदहवास होकर दहाड़े मारकर रोने लगी। उसे सिद्धार्थ से अपना वो मिलना, प्यार , लड़ना, झगड़ना, नोक-झोंक सभी कुछ याद आने लगा। उसे अपने ऊपर पश्चतचाप होने लगा कि अन्तिम समय में भी वो सिध्दार्थ को प्यार ना दे सकी।

वो बिलखती हुई जब अपने कमरे में पहुंची तो उसने देखा सिद्धार्थ वहाँ नहीं था। वो चिल्ला चिल्ला कर रोती हुई सिद्धार्थ की तस्वीर के सामने खड़े होकर प्लीज कम बैक, कम बैक सिद्धार्थ कहने लगी, वह रोते हुए कह रही थी कि सिद्धार्थ तुम एक बार वापस आ जाओ मै अब कभी भी तुमसे नहीं झगड़ूंगी।

ठीक उसी वक्त बाथरूम का दरवाजा खुला और किसी ने से उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा क्या हुआ? राधिका ने पलट कर देखा तो उसके पति सिध्दार्थ उसके सामने खड़े थे। वो रोती हुई उनके सीने से लग गई उसने सुबुकते हुए सिद्धार्थ से सारी बात बताई ।

तब सिद्धार्थ ने बताया कि आज सुबह जब वो उसके लिए शादी की सालगिरह का गिफ्ट लेने के लिए गए थे तो रास्ते में उनका पर्स कहीं गिर गया था फिर एक दोस्त से पैसे उधार लेकर उन्होंने गिफ्ट खरीदा था । जिस व्यक्ति को उनका बटुआ मिला होगा लगता है उसकी दुर्घटना में मौत हो गई है।

जिन्दगी में किसी की अहमियत तब पता चलती है जब वो हमारे साथ नही होता है, राधिका और सिद्धार्थ को तो जिंदगी ने दूसरा मौका दे दिया पर जिन्दगी की करवटें सभी को भूल सुधार का मौका नहीं देती हैं। थोड़ा झुककर लोगों को माफ़ कर देना अच्छा है क्या पता दुबारा पश्चाताप का मौका भी मिले न मिले।

अंतर्मुखी स्वभाव के लोग अपनी लाइफ को कैसे एन्जवाय करते हैं ?

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एक अंतर्मुखी इंसान को अपने साथ रहना पसंद है। उसे खुश होने के लिए शोर शराबा, या बहुत सारे लोगों के साथ की जरूरत नहीं पड़ती है।

1- अंतर्मुखी लोग बहुत संवेदनशील होते हैं, वे संवेदनाओ को व्यक्त करने का माध्यम ढूंढते रहते है और इसमें संगीत सुनना, पुस्तकें पढ़ना, नृत्य करना, लिखना इत्यादि उनकी मदद कर सकता है, हांलाकि सबकी अपनी व्यक्तिगत पसंद होती है।

2- यह कहना गलत होगा कि अन्तर्मुखी लोग बहुत सहमे से और गुमसुम रहते हैं। ज़रूरी नहीं किअंतर्मुखी लोग शर्मीले और संकुचित ही हों, ये एकांत प्रिय होते हैं और कभी- कभी ये बस अकेला रहना चाहते हैं।

3- अंतर्मुखी लोग जिज्ञासु होते हैं, वो जिज्ञासावश नई नई चीज़े का ज्ञान प्राप्त करना चाहते है और इस प्रकार वो इनटरनेट और पुस्तकों के माध्यम से अपनी जिज्ञासा शांत करते हैं और इस पर उनका काफी समय व्यतीत होता हैं।

4- अंतर्मुखी स्वभाव के लोग अक्सर कम बोलने वाले होते हैं। अधिकांश समय इन्हें दूसरों को समक्ष अपनी भावनाओं को व्यक्त करने या कहने में हिचकिचाहट महसूस होती है।

5- अंतर्मुखी स्वभाव के लोग अक्सर बहुत चूज़ी होते हैं और उनके विकल्पों को समझना मुश्किल होता है। यहां तक कि उनके परिवार के निकटतम सदस्यों और दोस्तों को भी इसका पता नहीं होता कि उनके दिमाग के अंदर क्या चल रहा है।

6- अंतर्मुखी स्वभाव के लोग अक्सर किसी पर जल्दी विश्वास नहीं करते। ये किसी भी कार्य को पूरे धैर्य के साथ करते हैं,योजना बनाने में जल्दबाज़ी नहीं करते हैं और प्रत्येक पहलू पर विचार करने के बाद ही निर्णय लेते हैं।

7- अंतर्मुखी स्वभाव के लोग अक्सर दूसरों की मदद लेने में वे बुरा महसूस करते हैं और कई बार सोचते हैं। इस कारण सामान्यत: लोग इन्हे घमंडी समझते हैं, लेकिन हकीकत में ये स्वभाव से बहुत विनम्र होते हैं।

8- इनके पास जीवन को देखने का अलग नजरिया होता है, ये अक्सर अंदर ही रोते हैं, अंदर ही हंसते हैं, अंदर ही प्यार करते हैं और अंदर ही नफरत करते हैं।

जीवन के कुछ सरल सत्य क्या हैंं ?

1- सच्ची दोस्ती अक्सर स्कूल और कॉलेज के दिनों में होती है। बाहर की दुनिया में सब पैसा कमाने की आंधी दौड़ में व्यस्त हैं।

2- जीवन सुंदर है उन लोगों के लिए जो वास्तव में व्यक्तिगत और प्रोफेशनल जीवन में संतुलन बनाना जानते हैं।

3- किसी भी कहानी के तीन पक्ष होते हैं, आपका पक्ष,उनका पक्ष और वास्ततविक सच्चाई ।

4- किसी को परवाह नहीं है कि आपका जीवन कितना मुश्किल है, अपने जीवन की कहानी के लेखक स्वयं आप हैंं।

5- जीवन में उतार-चढ़ाव अपरिहार्य है और इस प्रक्रिया में हम अक्सर अपने लक्ष्य पर इतना ध्यान देते हैंं कि हम रास्तों की परवाह नहीं करते।

6- सबसे बुरी चीजें जिनकी आप कल्पना करते हैं अक्सर जीवन में कभी घटित नहीं होती हैं, जीवन में जो सबसे बुरा घटित होता है अक्सर उसकी आपने कल्पना भी नहीं की होती है।

7- आप लोगों को बदल नहीं सकते हैं,आप केवल उन्हेंं रास्ता दिखा सकते हैं और स्वयं के उदाहरण द्वारा बदलाव के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

8- आपके जीवन में जो भी समस्या है वह प्राथमिक रुप से आपकी जिम्मेदारी है,इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उस समस्या का कारण आप हैं या कोई और।

9- छोटी- छोटी बातें और काम जो आप प्रतिदिन कहते हैं या करते हैं वह कही़ं ज्यादा महत्वपूर्ण है उन बातों और कामों से जो आप कभी-कभार करते हैं।

10- जीवन आसान नहीं होता विशेषकर तब जब आप जिंदगी में कुछ बड़ा करना या पाना चाहते हैं।

11- खाली पेट और मुफलिसी आपको जीवन के सबसे बड़े सबक सिखा देते हैं।

जीवन के कुछ कठोर सत्य जिन्हें हमें समझना चाहिये

1 – जीवन में यदि आप लोकप्रिय नहीं हैं तो आप प्रसिद्धि चाहते हैं, अगर आप बहुत लोकप्रिय हैं तो आप जीवन में एकांत चाहते हैं।

2 – अगर आप सिंगल हैं तो आप एक रिश्ता चाहते हैं अगर आप रिश्ते में हैं तो आप जीवन में कुछ स्पेस और स्वतंत्रता चाहते हैंं ।

3 – अगर आप गरीब हैं तो आप पैसा चाहते हैं, यदि आप अमीर हैं, तो आप बस एक साधारण जीवन जीना चाहते हैं।

4 – किसान जो पूरे राष्ट्र का पेट भरता है, अक्सर आधा या खाली पेट सोता है।

5 – बड़े घरों में रहने वाले लोग आमतौर पर छोटे दिल के होते हैंं, जबकि सड़क के किनारे या छोटे से मकान में रहने वाले लोगों के पास आमतौर पर एक बड़ा दिल होता है।

6 – लोगों अक्सर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करते हैंं, जो उनकी परवाह नहीं करते हैं और उपेक्षा उन लोगों की करते हैं जिन्हें वास्तव में उनकी परवाह है।

7 – हमारे देश में एक चपरासी बनने के लिए योग्यता कक्षा 8 पास है, जबकि किसी भी योग्यता के बिना आप एक राजनीतिज्ञ बन सकते हैं और देश को चला सकते हैं।

8 – हम सभी ईश्वर में विश्वास रखते हैं लेकिन अपनी ही परछाई को भूत समझकर उससे डरते हैं।

उम्मीदों का दिया कभी बुझता नहीं है

एक मुसाफिर अपनी मंजिल की ओर तेजी से बढ़ रहा था, रात का समय था,चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, आगे का मार्ग घने जंगल से होकर गुजरता था। उसके पैर भी लंबी यात्रा से थक गए थे और अब चलने से इंकार कर रहे थे। उसने रात्रि विश्राम करने का निश्चय किया और उपयुक्त स्थान की तलाश करने लगा।

जगह सूनसान थी, दूर दूर तक आबादी का नामोनिशान तक नहीं था। काफी मशक्कत करने के बाद उसे एक छोटा सा मंदिर दिखाई दिया। पास जाने पर मुसाफिर ने पाया कि वहां कोई नहीं है, मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद हो चुके थे। गर्भगृह के बाहर चार दिये जल रहे थे जिसके कारण पूरे मंदिर में हल्की रोशनी फैल रही थी।

मुसाफिर बेहद थका हुआ था इसलिए जमीन पर लेटते हुए ही वह गहरी नींद में सो गया था। रात्रि के अंतिम पहर में अचानक उसकी नींद एक मधुर आवाज़ से टूट गई, यह मधुर आवाज़ मंदिर के गर्भगृह के पास से आती हुई प्रतीत हो रही थी।

पहले तो उसे कुछ भय हुआ फिर उसे याद आया कि वह तो मंदिर में है, ईश्वर के घर में भला भय कैसा, उसने खुद से यह कहा और गर्भगृह के समीप पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने जो देखा उसे देखकर उसके आश्चर्य की सीमा नहीं रही। उसने देखा कि मंदिर के गर्भगृह के बाहर रखे चारों दिये आपस में बात कर रहे हैं। वह मुसाफिर वहीं बैठकर ध्यान से उनकी बातें सुनने लगा।

पहला दिया बोल रहा था ” मेरा नाम शांति है, पर मुझे लगता है अब इस दुनिया को मेरी ज़रुरत नहीं है, चारों तरफ आपाधापी और लूट-मार मची हुई है, मैं यहाँ अब और नहीं रह सकता। ” और ऐसा कहते हुए, कुछ देर में वह दिया बुझ गया।

कुछ देर तक वातावरण में शांति छाई गई तभी दूसरा दिया बोला ” मेरा नाम विश्वास है, और मुझे लगता है झूठ और फरेब की इस दुनिया मेरी भी यहाँ किसी को कोई ज़रुरत नहीं है, मैं भी यहाँ से जा रहा हूँ। ”, और कुछ ही क्षणों में वह दूसरा दिया भी बुझ गया ।

यह सब देखकर वह मुसाफिर आश्चर्यचकित था, उनकी बातें सुनकर वह दुखी भी था उनकी बातों में वह जीवन की सच्चाई को महसूस कर रहा था। वह अपने इन ख्यालों में खोया हुआ था कि तीसरा दिया धीमी आवाज में कहने लगा “मैं प्रेम हूँ, मेरे पास जलते रहने की ताकत है, पर आज हर कोई इतना व्यस्त है कि मेरे लिए किसी के पास फुर्सत नहीं है, दूसरों की बात तो दूर लोग अपनों से भी प्रेम करना भूल गए हैं, मुझसे ये सब और नहीं सहा जाता है मैं भी इस दुनिया से जा रहा हूँ। “

तीसरा दिया अभी बुझा ही था कि वहां कहीं से एक पतंगा आ गया। दियों को बुझा हुआ देखकर वह घबरा गया, उसकी आँखों से आंसू टपकने लगे और वह रुंआसा होकर बोला “अरे, तुम दिये जल क्यों नहीं रहे हो, तुम्हे तो अंत तक जलना है, अभी अंधकार समाप्त नहीं हुआ है, तुम इस तरह बीच में हमें कैसे छोड़कर कैसे जा सकते हो?”

तभी चौथा दिया जो शांति से सबकी बात सुन रहा था और चुपचाप जल रहा था मधुर स्वर में बोला ” प्यारे पतंगे घबराओ नहीं, मेरा नाम आशा है और जब तक मैं जल रहा हूँ हम बाकी दियों को फिर से जला सकते हैं। “

यह सुन कर मुसाफिर की आंखें चमक उठीं वह चौथे दिये के समीप आ गया और उसने आशा के बल पर शांति,विश्वास, और प्रेम को फिर से प्रकाशित कर दिया। चारों दीपक पुनः अपनी पूरी क्षमता से अंधकार को मिटाने में जुट गए।

कुछ देर बाद सुबह हो गई और मुसाफिर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ चला उन चारों दीपकों ने उसके भीतर के अँधेरे को नष्ट कर दिया था वह मन ही मन सोच रहा था कि जब जीवन में सबकुछ बुरा होते हुए दिखाई दे रहा हो, चारों तरफ अन्धकार ही अन्धकार नज़र आ रहा हो, अपने भी पराये लगने लगें तो भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, हमें उम्मीद हमेशा रखनी चाहिए क्योंकि इसमें इतनी शक्ति है कि ये हर खोई हुई चीज हमें वापस दिल सकती है।

अपनी उम्मीदों के दिए को हमेशा जलाये रखिये, बस अगर ये दिया जलता रहेगा तो आप किसी भी दिये को प्रकाशित कर सकते हैं। जो हमसे दूर हो गया है उसे वापस पा सकते हैं क्योंकि जब तक साँस है तब तक आस है।

आदतें ही हमें बनाती और मिटाती हैं

समीर की सुबह कभी शांत नहीं होती है वह हड़बड़ी में उठता है और आफिस के लिए कभी समय पर तैयार नहीं हो पाता है। आफिस का समय हो जाने पर भी वह कभी कपड़े पहन रहा होता है, तो कभी बैग या जूते ढूढ रहा होता है। इस वजह से वह नाश्ता भी नहीं कर पाता है। इन सबका असर उसके काम पर भी पड़ता है आफिस देर से पहुंचने के कारण अक्सर उसे बास की नाराजगी का सामना करना पड़ता है और सुबह का नाश्ता नहीं करने के कारण दिन भर उसका एनर्जी लेवल कम बना रहता है।

देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना समीर की आदत में शुमार है और उसकी यही आदत उसकी शारीरिक और मानसिक तनाव की वजह भी है। समीर की भांति लगभग सभी घरों में सुबह एेसी ही होती है जिसका मुख्य कारण दिनचर्या का सही निर्धारण नहीं होना है। हममें से ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं होता है कि दिनचर्या का सही निर्धारण कैसे करना चाहिए।

हमारे जीवन में अनेक समस्याएं दिनचर्या के गलत निर्धारण के कारण होती हैं, सही दिनचर्या हमें न केवल अनेक परेशानियों से बचाती है बल्कि हमें शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में भी मदद करती है। हममें से कुछ लोग दूसरों को देखकर अपनी दिनचर्या बनाते हैं, एेसे में महत्वपूर्ण है कि दूसरे लोगों की सभी आदतों को फालो करने की जगह आप उनकी केवल उन्हीं आदतों को अपनाएं जो आपको जीवन में आगे बढ़ाने में सहायक हों, दूसरो को देखकर अपनी दिनचर्या बनाने में सावधानी बरतना भी आवश्यक है क्योंकि उनकी गैरजरूरी आदतें आपको व्यर्थ में थकती हैं और आपको पीछे ले जाने का काम करती हैं।

हमारे लिए यह समझना भी आवश्यक है कि अपने कार्यों को समय से पूरा करना हमारी खुद की जिम्मेदारी है इसके लिए दूसरों को दोषी ठहराना उचित नहीं है। दूसरे हमें हमारे कार्यों को समय से पूरा करने में हमारी मदद जरूर कर सकते हैं पर काम को समय से पूरा करने की आदत हमें स्वयं ही विकसित करनी होगी और इसके लिए हमें स्वयं ही प्रयास करना होगा।

हम आज जो भी हैं अपनी आदतों की वजह से हैं। आदतें ही वो हैं जो हमें बनाती हैं और मिटाती हैं। वक्त के साथ आदतें भी बदलती रहती हैं नई आती हैं और पुरानी जाती हैं। सुबह समय से जागना,आफिस के लिए समय से तैयार हो जाना, सुबह का नाश्ता अनिवार्य रूप से करना आदि एेसी छोटी-छोटी बातें हैं जिन्हें हम अपनी आदत में शुमार करके अनेक समस्याओं को कम कर सकते हैं। इन आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके हम काम को समय से पूरा कर सकते हैं और भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकते हैं।