जीवन के कुछ कठोर सत्य जिन्हें हमें समझना चाहिये

1 – जीवन में यदि आप लोकप्रिय नहीं हैं तो आप प्रसिद्धि चाहते हैं, अगर आप बहुत लोकप्रिय हैं तो आप जीवन में एकांत चाहते हैं।

2 – अगर आप सिंगल हैं तो आप एक रिश्ता चाहते हैं अगर आप रिश्ते में हैं तो आप जीवन में कुछ स्पेस और स्वतंत्रता चाहते हैंं ।

3 – अगर आप गरीब हैं तो आप पैसा चाहते हैं, यदि आप अमीर हैं, तो आप बस एक साधारण जीवन जीना चाहते हैं।

4 – किसान जो पूरे राष्ट्र का पेट भरता है, अक्सर आधा या खाली पेट सोता है।

5 – बड़े घरों में रहने वाले लोग आमतौर पर छोटे दिल के होते हैंं, जबकि सड़क के किनारे या छोटे से मकान में रहने वाले लोगों के पास आमतौर पर एक बड़ा दिल होता है।

6 – लोगों अक्सर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करते हैंं, जो उनकी परवाह नहीं करते हैं और उपेक्षा उन लोगों की करते हैं जिन्हें वास्तव में उनकी परवाह है।

7 – हमारे देश में एक चपरासी बनने के लिए योग्यता कक्षा 8 पास है, जबकि किसी भी योग्यता के बिना आप एक राजनीतिज्ञ बन सकते हैं और देश को चला सकते हैं।

8 – हम सभी ईश्वर में विश्वास रखते हैं लेकिन अपनी ही परछाई को भूत समझकर उससे डरते हैं।

उम्मीदों का दिया कभी बुझता नहीं है

एक मुसाफिर अपनी मंजिल की ओर तेजी से बढ़ रहा था, रात का समय था,चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था, आगे का मार्ग घने जंगल से होकर गुजरता था। उसके पैर भी लंबी यात्रा से थक गए थे और अब चलने से इंकार कर रहे थे। उसने रात्रि विश्राम करने का निश्चय किया और उपयुक्त स्थान की तलाश करने लगा।

जगह सूनसान थी, दूर दूर तक आबादी का नामोनिशान तक नहीं था। काफी मशक्कत करने के बाद उसे एक छोटा सा मंदिर दिखाई दिया। पास जाने पर मुसाफिर ने पाया कि वहां कोई नहीं है, मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद हो चुके थे। गर्भगृह के बाहर चार दिये जल रहे थे जिसके कारण पूरे मंदिर में हल्की रोशनी फैल रही थी।

मुसाफिर बेहद थका हुआ था इसलिए जमीन पर लेटते हुए ही वह गहरी नींद में सो गया था। रात्रि के अंतिम पहर में अचानक उसकी नींद एक मधुर आवाज़ से टूट गई, यह मधुर आवाज़ मंदिर के गर्भगृह के पास से आती हुई प्रतीत हो रही थी।

पहले तो उसे कुछ भय हुआ फिर उसे याद आया कि वह तो मंदिर में है, ईश्वर के घर में भला भय कैसा, उसने खुद से यह कहा और गर्भगृह के समीप पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने जो देखा उसे देखकर उसके आश्चर्य की सीमा नहीं रही। उसने देखा कि मंदिर के गर्भगृह के बाहर रखे चारों दिये आपस में बात कर रहे हैं। वह मुसाफिर वहीं बैठकर ध्यान से उनकी बातें सुनने लगा।

पहला दिया बोल रहा था ” मेरा नाम शांति है, पर मुझे लगता है अब इस दुनिया को मेरी ज़रुरत नहीं है, चारों तरफ आपाधापी और लूट-मार मची हुई है, मैं यहाँ अब और नहीं रह सकता। ” और ऐसा कहते हुए, कुछ देर में वह दिया बुझ गया।

कुछ देर तक वातावरण में शांति छाई गई तभी दूसरा दिया बोला ” मेरा नाम विश्वास है, और मुझे लगता है झूठ और फरेब की इस दुनिया मेरी भी यहाँ किसी को कोई ज़रुरत नहीं है, मैं भी यहाँ से जा रहा हूँ। ”, और कुछ ही क्षणों में वह दूसरा दिया भी बुझ गया ।

यह सब देखकर वह मुसाफिर आश्चर्यचकित था, उनकी बातें सुनकर वह दुखी भी था उनकी बातों में वह जीवन की सच्चाई को महसूस कर रहा था। वह अपने इन ख्यालों में खोया हुआ था कि तीसरा दिया धीमी आवाज में कहने लगा “मैं प्रेम हूँ, मेरे पास जलते रहने की ताकत है, पर आज हर कोई इतना व्यस्त है कि मेरे लिए किसी के पास फुर्सत नहीं है, दूसरों की बात तो दूर लोग अपनों से भी प्रेम करना भूल गए हैं, मुझसे ये सब और नहीं सहा जाता है मैं भी इस दुनिया से जा रहा हूँ। “

तीसरा दिया अभी बुझा ही था कि वहां कहीं से एक पतंगा आ गया। दियों को बुझा हुआ देखकर वह घबरा गया, उसकी आँखों से आंसू टपकने लगे और वह रुंआसा होकर बोला “अरे, तुम दिये जल क्यों नहीं रहे हो, तुम्हे तो अंत तक जलना है, अभी अंधकार समाप्त नहीं हुआ है, तुम इस तरह बीच में हमें कैसे छोड़कर कैसे जा सकते हो?”

तभी चौथा दिया जो शांति से सबकी बात सुन रहा था और चुपचाप जल रहा था मधुर स्वर में बोला ” प्यारे पतंगे घबराओ नहीं, मेरा नाम आशा है और जब तक मैं जल रहा हूँ हम बाकी दियों को फिर से जला सकते हैं। “

यह सुन कर मुसाफिर की आंखें चमक उठीं वह चौथे दिये के समीप आ गया और उसने आशा के बल पर शांति,विश्वास, और प्रेम को फिर से प्रकाशित कर दिया। चारों दीपक पुनः अपनी पूरी क्षमता से अंधकार को मिटाने में जुट गए।

कुछ देर बाद सुबह हो गई और मुसाफिर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ चला उन चारों दीपकों ने उसके भीतर के अँधेरे को नष्ट कर दिया था वह मन ही मन सोच रहा था कि जब जीवन में सबकुछ बुरा होते हुए दिखाई दे रहा हो, चारों तरफ अन्धकार ही अन्धकार नज़र आ रहा हो, अपने भी पराये लगने लगें तो भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, हमें उम्मीद हमेशा रखनी चाहिए क्योंकि इसमें इतनी शक्ति है कि ये हर खोई हुई चीज हमें वापस दिल सकती है।

अपनी उम्मीदों के दिए को हमेशा जलाये रखिये, बस अगर ये दिया जलता रहेगा तो आप किसी भी दिये को प्रकाशित कर सकते हैं। जो हमसे दूर हो गया है उसे वापस पा सकते हैं क्योंकि जब तक साँस है तब तक आस है।

आदतें ही हमें बनाती और मिटाती हैं

समीर की सुबह कभी शांत नहीं होती है वह हड़बड़ी में उठता है और आफिस के लिए कभी समय पर तैयार नहीं हो पाता है। आफिस का समय हो जाने पर भी वह कभी कपड़े पहन रहा होता है, तो कभी बैग या जूते ढूढ रहा होता है। इस वजह से वह नाश्ता भी नहीं कर पाता है। इन सबका असर उसके काम पर भी पड़ता है आफिस देर से पहुंचने के कारण अक्सर उसे बास की नाराजगी का सामना करना पड़ता है और सुबह का नाश्ता नहीं करने के कारण दिन भर उसका एनर्जी लेवल कम बना रहता है।

देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना समीर की आदत में शुमार है और उसकी यही आदत उसकी शारीरिक और मानसिक तनाव की वजह भी है। समीर की भांति लगभग सभी घरों में सुबह एेसी ही होती है जिसका मुख्य कारण दिनचर्या का सही निर्धारण नहीं होना है। हममें से ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं होता है कि दिनचर्या का सही निर्धारण कैसे करना चाहिए।

हमारे जीवन में अनेक समस्याएं दिनचर्या के गलत निर्धारण के कारण होती हैं, सही दिनचर्या हमें न केवल अनेक परेशानियों से बचाती है बल्कि हमें शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में भी मदद करती है। हममें से कुछ लोग दूसरों को देखकर अपनी दिनचर्या बनाते हैं, एेसे में महत्वपूर्ण है कि दूसरे लोगों की सभी आदतों को फालो करने की जगह आप उनकी केवल उन्हीं आदतों को अपनाएं जो आपको जीवन में आगे बढ़ाने में सहायक हों, दूसरो को देखकर अपनी दिनचर्या बनाने में सावधानी बरतना भी आवश्यक है क्योंकि उनकी गैरजरूरी आदतें आपको व्यर्थ में थकती हैं और आपको पीछे ले जाने का काम करती हैं।

हमारे लिए यह समझना भी आवश्यक है कि अपने कार्यों को समय से पूरा करना हमारी खुद की जिम्मेदारी है इसके लिए दूसरों को दोषी ठहराना उचित नहीं है। दूसरे हमें हमारे कार्यों को समय से पूरा करने में हमारी मदद जरूर कर सकते हैं पर काम को समय से पूरा करने की आदत हमें स्वयं ही विकसित करनी होगी और इसके लिए हमें स्वयं ही प्रयास करना होगा।

हम आज जो भी हैं अपनी आदतों की वजह से हैं। आदतें ही वो हैं जो हमें बनाती हैं और मिटाती हैं। वक्त के साथ आदतें भी बदलती रहती हैं नई आती हैं और पुरानी जाती हैं। सुबह समय से जागना,आफिस के लिए समय से तैयार हो जाना, सुबह का नाश्ता अनिवार्य रूप से करना आदि एेसी छोटी-छोटी बातें हैं जिन्हें हम अपनी आदत में शुमार करके अनेक समस्याओं को कम कर सकते हैं। इन आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके हम काम को समय से पूरा कर सकते हैं और भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकते हैं।