कभी जिंदगी जी करके देखो

कभी जिंदगी जी करके देखो,

कभी कोई ख़ुशी पी करके देखो,

बदल जाएगा जीने का नज़रिया,

कभी ख़ुद से भी दोस्ती करके देखो।

मिलेंगे कांटे भी राहों में लेकिन,

कभी मुश्किलों में भी ख़ुशी चुनके देखो,

रोते हुओं को हंसाना भी एक हुनर है,

कभी किसी चेहरे की ख़ुशी बनके देखो।

रूह से निकलकर जो पहुंचे ख़ुदा तक,

कभी इबादत की वो बंदगी बनके देखो,

जीते हैं जिंदगी में अपने ही लिए सब,

कभी दूसरों के लिए जिंदगी बनके देखो।

माँ

जब जिक्र तेरा हुआ होगा

सजदे पे कोई झुका होगा

जहां पांव तेरे पड़े होंगे

वो मकान घर बना होगा

वो कितनी बार जगी होगी

जब चैन से तू सोया होगा

वो कितनी बार उठी होगी

जब रात में तू रोया होगा

रोकर भी दुआ दी होगी

जब तूने दिल उसका तोड़ा होगा

वो टूटकर फिर बिखरी होगी

जब तूने घर उसका छोड़ा होगा

देकर आँसू उसकी आँखों में

तू बाहर पत्थरों में खोया होगा

देख कर तेरी नासमझी को

ख़ुदा भी तुझ पर रोया होगा।

तुम वो तारीख़ हो जो कभी बदलती नहीं

तुम वो तारीख़ हो जो कभी बदलती नहीं,

मैं वो लहर हूं जो कहीं पर ठहरती नहीं,

एक डर है कि तुम्हें पाकर फिर खो न दूं,

तुम बनके बारिश मुझ पर क्यों बरसती नहीं।

तुम हो वजह जीने की और सबब मरने का,

तुम बन के साया मुझ में ही क्यों बसती नहीं,

ढूंढ़ता फिर रहा हूं तुम्हे दर- ब-दर,

तुम कहां खो गई हो क्यों दिखती नहीं।

दूरियों ने बढ़ा दिया है यादों का हौसला,

तुम बनके खु़शबू क्यों महकती नहीं,

रात पर छा रहा है ये कैसा नशा,

तुम बन के हवा क्यों बहकती नहीं।





























सोचा नहीं था कभी दिन ऐसे भी बिताने होंगे

सोचा नहीं था कभी दिन ऐसे भी बिताने होंगे

जीना भी जरूरी होगा , अहसान भी उतारने होंगे।

कोई दर्द पुराना भुलाने को नये दर्द जगाने होंगे

मुस्कुराना भी जरूरी होगा ,आँसू भी छिपाने होंगे।

हाथों को उठाऊं दुआ में या सजदे पे सिर झुका लूं

रूठी किस्मत को मनाने के नये तरीके आज़माने होंगे

अब कोई क्या सिखाएगा जीने का हमें सलीका

गिरना भी जरूरी होगा, नये तजुर्बे भी पाने होंगे।

तुम्हें खोकर पा लूं मैं या फिर तुममें ही कहीं खो जाऊं

रिवाज़ पुराने मिटाकर, नये रिवाज़ बनाने होंगे

अगर यकीन नहीं आता तो बिछड़ कर देख लो

कहानी नई बनेगी , किरदार वही पुराने होंगे।

माना वो आवारा था

माना वो आवारा था

कहीं दूर चमकता जो एक सितारा था

कभी तुमने भी मुरादें उससे मांगी थीं

कभी दुआओं में उसे पुकारा था।

संग उसके कितनी शामें गुज़ारी थीं

उसके संग दिलकश हर नज़ारा था

वो लहरों के जैसी इठलाती थी

मैं खामोश दरिया का किनारा था।

फिर प्रेम की डोरी ऐसे टूट गई

मानो जिंदगी ही हमसे रूठ गई

फिर टूटे सपनों के बोझ तले

बड़ी मुश्किलों से ख़ुद को सम्हाला था।

धीर-धीरे वो फ़साना बन गया

जो किस्सा कभी हमारा था

माना वो आवारा था

कहीं दूर चमकता जो एक सितारा था।

कभी हम पूछ लेंगे ,कभी तुम पूछ लेना

कभी हम पूछ लेंगे ,कभी तुम पूछ लेना

कभी हम चुप रहेंगे, कभी तुम कुछ न कहना,

कभी आएंगी मुश्किलें ,कभी नये सबक भी मिलेंगे

कुछ हम सीख लेंगे, कुछ तुम सीख लेना।

जब चलोगे संग सफ़र पर तब धूप भी मिलेगी,

कहीं हम ठहर लेंगे ,कहीं तुम ठहर लेना,

जब परवान चढ़ेगी मोहब्बत तो सवाल भी उठेंगे,

कहीं हम बोल देंगे ,कहीं तुम बोल देना।

जब बढ़ेंगी बेताबियां तो फिसलन भी बढ़ेगी,

कभी हम थाम लेंगे, कभी तुम थाम लेना

बनके अक्स तेरा अब तुझमें ही रहेंगे,

कभी हम देख लेंगे, कभी तुम देख लेना।

जब दर्पण को देखा तो ऐसा लगा

जब दर्पण को देखा तो ऐसा लगा,

जैसे ख़ुद से मिले एक अरसा हुआ है,

भटकता रहा हूँँ मुसाफ़िरों की तरह से,

जैसे मंजिलों के लिए कोई तरसा हुआ है।

जिदंगी की उलझनों और कशमकश में,

बेमौसम ही कोई बादल बरसा हुआ है,

ना दिखती कहीं है, ना मिलती कहीं है,

क्या दूर मुझसे मेरा कोई हिस्सा हुआ है?

ठोकरेंं भी मिली हैं,नफ़रते भी मिली हैं

अभी खत्म कहाँँ ये किस्सा हुआ है,

किस्मत भी शायद कुछ रूठी हुई है,

दर्पण भी हमसे गुस्सा हुआ है।

जिस्म साथ रहता है, सांसें छूट जाती हैं

जिस्म साथ रहता है, सांसें छूट जाती हैं

यादें साथ रहती हैं, बातें छूट जाती हैं

इस रंग बदलती दुनिया का भरोसा नहीं है

नीव महफ़ूज रहती है,इमारतें टूट जाती हैं।

इश्क में भी उनके गज़ब की कशिश है,

रोता कोई है, आखें किसी की सूज जाती हैं

गहरे पानी के जैसी मोहब्बत है अपनी

वादे याद रहते हैं, कसमें टूट जाती हैं।

बेहोशी की बातों की कोई कीमत नहीं है,

ख़ुमार उतर जाता है, कहानियां छूट जाती हैं

जाना है एक दिन सबको यहां से,

नाम मिट जाता है, निशानियां छूट जाती हैं।

बड़ी मुश्किलों से कोई जिंदगी में फिर आया है

बड़ी मुश्किलों से कोई जिंदगी में फिर आया है,

बड़ी मुश्किलों से रूठे ख़ुदा को फिर मनाया है,

बनके रोशनी मेरी जिंदगी में झिलमिलाना तुम,

बड़ी मुश्किलों से हवाओं में दिया फिर जलाया है।

अगर साफ हो नीयत तो मौके फिर मिल जाते हैं,

कभी बिना शोर के भी बादल बरस जाते हैं,

सूनी आंखों में कोई सपना फिर सजाया है,

बड़ी मुश्किलों से गुमसुम यार को फिर हंसाया है।

कभी यादों के किसी मोड़ पर मिल जाना तुम,

बना के घर मुझे उसी में ठहर जाना तुम,

तिनका-तिनका जोड़कर एक आशियाना बनाया है,

बड़ी मुश्किलों से आखों में आंसूओं को फिर छिपाया है।

कदम-कदम पे जिदंगी में मुश्किलें मिलती हैं,

कभी धोखे कभी साजिशों से दुनिया छलती है,

कभी किस्मत ने कभी मंज़िलों ने बहुत आज़माया है,

बड़ी मुश्किलों से खुद को खोकर तुम्हें फिर पाया है।

बड़ी मुश्किलों से कोई जिंदगी में फिर आया है,

बड़ी मुश्किलों से रूठे ख़ुदा को फिर मनाया है।

कभी इस तरह से कभी उस तरह से

कभी इस तरह से कभी उस तरह से,

कभी तुम मिलो बादलों की तरह से,

नए मौसम की पहली बारिश के जैसी,

मुझमें तुम बहो पानियों की तरह से।

कभी हसरतों में कभी उल्फतों में,

कभी नींद में थपकियों की तरह से,

अगर कभी मैं तुमसे जुदा हो भी जाऊं,

मुझे याद करना हिचकियों की तरह से।

कभी तन्हाईयों में कभी परछाईयों में,

कभी राह चलते मुसाफिरों की तरह से,

तेरा साया बनकर संग तेरे मैं रहूंगा,

मुझे ज़माने में ढूंढ़ लेना मुहाजिरों की तरह से।