गलतियां

जिससे गलतियां न हो वो इंसान नही भगवान हो जाएगा। गलतियां सिखाती भी हैं और अनुभव भी देती हैं उसी सीख और अनुभव के आधार पर हम निर्णय लेते हैं। इसलिए हम मान लेते हैं नई गलती करने और पुरानी गलती दोहराने से आपका आशय जीवन में सही और गलत निर्णय लेने से है।

गलतियां करने से कोई बच नहीं सकता। जब तक सांसें चलेगी फैसले लेने होंगे।

हम आज जो भी हैं अपने बीते हुए कल में लिए गए फैसलों के कारण ही हैं। हम कल क्या होगें इसका फैसला हमारे आज के लिये हुए निर्णय करेंगे। निश्चित रूप से किसी के सभी निर्णय हमेशा न तो सही और न ही हमेशा गलत हो सकते हैं।

हर इन्सान के जीवन में कुछ सही तो कुछ गलत निर्णय होते है। आपका कोई निर्णय सही होगा या गलत इसका निर्धारण सिर्फ और सिर्फ समय करता है। अक्सर हमें आज जो सही लगता है वो भविष्य में गलत साबित होता है और जो गलत लगता है वो ही सही साबित हो जाता है। जब निर्णय सही साबित हो जाता है तो तारीफ और जब गलत हो जाता है तो आलोचना के साथ गलत होने की जिम्मेदारी भी लेनी पड़ती है।

जब भी इन्सान कोई निर्णय लेता है तो वह यह सोच के नहीं लेता कि यह गलत साबित होगा। दरअसल निर्णय आज की परिस्थितियों में लिए जाते हैं जबकि कल की बदली हुई परिस्थितियां उन्हें सही या गलत साबित करती हैं।

कल किसने देखा है? किसी ने नहीं पर इंसान की फितरत होती है अनुमान लगाने की और इसी आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।आप कितनी सटीकता से भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं यह आपकी दूरदर्शिता को निर्धारित करता है और आपकी दूरदर्शिता निर्धारित करती है आपके निर्णय के सफल या असफल होने की संभावना को। अनुमान तो कोई भी लगा सकता है पर अनुभव के साथ अनुमान लगाने की संभावना बढ़ जाती है।

यही कारण है कि अनुभव के साथ लोगों से गलतियां होने की संभावना कम हो जाती है।

नसीब

नसीब पासा फेंकने की तरह है और आप इसकी सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं। यदि सब कुछ आपकी इच्छा के अनुसार घटित होता है तो अच्छा है और यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर अपने कौशल में सुधार करने के लिए काम करना जारी रखिये।

नसीब ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप नियंत्रित कर सकते हैं, जबकि कड़ी मेहनत आपके हाथ में है जो आपके चांसेज को बेहतर बनाती है। आप जिसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं उसके बजाय जो आपके नियंत्रण में है उस पर अपने ध्यान को केंद्रित करना हमेशा बेहतर होता है।

लोग आपसे अधिक प्रतिभाशाली हो सकते हैं लेकिन कड़ी मेहनत ज्यादा या कम करने का किसी के पास कोई बहाना नहीं होता है, जीवन में कड़ी मेहनत करने का अवसर सबके पास समान होता है।

जीवन की दो चाबियाँ कड़ी मेहनत और किस्मत हैं। जब ये दोनों चाबियाँ एक साथ काम करती हैं, तो आपके जीवन का ताला खुल जाता है।

कड़ी मेहनत सीढ़ियों की तरह है और किस्मत लिफ्ट की तरह है, कभी-कभी लिफ्ट फेल हो सकती है लेकिन सीढ़ियांं हमेशा आपको ऊपर की तरफ ले जाएंगी।

आपको अपनी कड़ी मेहनत का परिणाम हो सकता है तुरंत या फिर निकट भविष्य में ना मिले, लेकिन अंततः इसका परिणाम मिलकर रहेगा क्योंकि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती है।

कभी-कभी आप अपनी कड़ी मेहनत को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते हैं और लोग इस गलतफहमी में उसे आपका नसीब समझ लेते हैं।

मुश्किल सबक

1- दूसरों के सामने खुद को लाचार और बेबस मत दिखाइये , लोग इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।

2- किसी रिश्ते में जो व्यक्ति कम परवाह करता है अक्सर उसका पक्ष ज्यादा मजबूत होता है और वह हर्ट भी कम होता है।

3- इस दुनिया में पैसा बोलता है। पैसे के बिना, आप कुछ भी नहीं हैं।

४- आपके बारे में लोगों की धारणा वास्तविकता से भी अधिक महत्वपूर्ण है, अक्सर हम तथ्यों को नजरंदाज करते हैं और धारणा के आधार पर किसी को दोषी या निर्दोष मान लेते हैं।

5- हम उन लोगों को महत्व देते हैं जो यह नहीं सोचते हैं कि हम महत्वपूर्ण हैं और जो हमें महत्वपूर्ण मानते हैं, उन्हें हम स्वीकार नहीं करते हैं।

6- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके ग्रेड कितने अच्छे हैं, ग्रेड आपको केवल आधी दूरी तक ले जाते हैं,लोग आपके सामाजिक कौशल पर अधिक ध्यान देते हैं।

7- हर किसी को खुश करना असंभव है। हमेशा कोई न कोई होगा जो आपसे असहमत है।

8- आप जितना अधिक बाहर की दुनिया में खुशी पाना चाहेंगे , उतना ही अधिक आप असफल होंगे।

9- हम में से बहुत लोग अतीत या भविष्य में जीते हैं। वर्तमान बहुतों के लिए अज्ञात है।

10- आपके जीवन में सभी की एक भूमिका है और जब उनकी भूमिका समाप्त हो जाएगी, तो वे आपको छोड़ देंगे।

11- यदि आप अपने भीतर की आवाज को नहीं सुनते हैं, तो संभावना अधिक है कि आपको बाद में पछताना होगा।

उम्मीदें

समीर एक कंपनी के सेल्स विभाग में कार्यरत है। उसके ऊपर टार्गेट अचीव करने का दबाव है। ऐसा भी नहीं है कि टार्गेट पहली बार मिले हों, उसने पहले भी टार्गेट पूरे किये हैं और उच्च अधिकारियों से प्रशंसा भी प्राप्त की है। पर इस बार बात कुछ अलग है, उसे लग रहा है कि वो इस बार टार्गेट अचीव नहीं कर पाएगा, उसका मन काम में नहीं लग रहा है। वह खोया खोया सा रहने लगा है, वह एक अज्ञात से भय से भयभीत है। निश्चित रूप से समीर के जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

वैशाली उसी कंपनी के अकाउंट्स सेक्शन में कार्यरत है। वह हमेशा ऊर्जा और उत्साह से भरपूर रहती है,वह दिये गये काम को अक्सर डेडलाइन से पूर्व ही कम्प्लीट कर लेती है। वह भविष्य को लेकर पूरी तरह आशान्वित है। उसका आत्मविश्वास उसके चेहरे पर दिखता है, वैशाली अपने जीवन से खुश और संतुष्ट है।

एक सी परिस्थितियां, एक सा माहौल, एक से अवसर, एक सा वर्क-कलचर किसी को प्रेरित करता है तो किसी को निराशा से भर देता है। किसी में उम्मीद जगाता है तो कोई उसी माहौल में नाउम्मीद हो जाता है। समीर और वैशाली दोनों की शिक्षा का स्तर, संख्यातमक, तार्किक और कम्यूनिकेशन स्किल्स एक से हैं फिर भी एक जीवन से खुश और दूसरा निराश है।

समीर की यह स्थिति उसके लिए खतरनाक है, ज्यादा समय तक वह काम को टाल नहीं सकता है। टार्गेट अचीव न करने की स्थिति में उसकी नौकरी संकट में पड़ सकती है वहीं दूसरी तरफ इस बात की पूरी संभावना है कि वैशाली को इस बार के अप्रेजल में प्रमोशन मिलेगा,वैशाली के काम से उच्च अधिकारी संतुष्ट हैं।

समीर की हताशा और वैशाली के उत्साह के पीछे अनेकों कारण हो सकते हैं जिनकी तुलना नहीं की जा सकती है फिर भी एक बड़ी वजह नजरिये की है। किन्हीं कारणों और परिस्थितियों के कारण समीर का नजरिया नकारात्मक हो गया है और इसका उसके आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उसे अपनी समस्याएं पहाड़ जैसी नजर आ रही हैं, उसका सारा ध्यान समस्याओं का सामना करने में नहीं बल्कि उनको टालने में लगा हुआ है, निश्चित रूप से समीर का यह नजरिया उसे ज्यादा दिन तक बचा नहीं पाएगा।

समीर को इस स्थिति से बाहर कौन निकाल सकता है? निश्चित रूप से उसे अपनी सहायता स्वयं करनी पड़ेगी। उसे अपना खोया हुआ आत्मविश्वास पाने में अपने करीबी लोगों की भी आवश्यकता पड़ेगी, वह यह कैसे कर सकता है? इसका सबसे बेहतर तरीका है अपने बेसिक्स की तरफ वापस लौटना, अपनी ताकत को पहचानना, जो आपके करीब हैं उनसे अपनी बात शेयर करना और उनका समर्थन हासिल करना।

समीर की तरह हम सभी की जिंदगी में भी ऐसी परिस्थितियां आती रहती हैं जब हम जिदंगी में बहुत निराश हो जाते हैं। तब भी कुछ ऐसा है जो हमें प्रेरित कर सकता है। उस कठिन समय में आवश्यकता होती है खुद को पहचानने की, अपनी ताकत को बटोरने की,उस समय आवश्यकता होती है जिजीविषा की, जीवटता की और जिन्दगी को जीने की। जब भी आपके सामने ऐसा वक्त आ जाए तो खुद को यह याद दिलाते रहिये कि- जब सब कुछ समाप्त हो जाता है फिर भी एक चीज बची रहती है उसे भविष्य कहते हैं। आपका भविष्य आपके हाथ में है उसे कोई नहीं छीन सकता है. यही मोटिवेशन का मूल आधार  है।


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जिंदगी के सबक

1- दूसरों को सलाह देना बहुत आसान है लेकिन उन्हें स्वयं पर लागू करना हमेशा मुश्किल होता है।

2- कोई भी व्यक्ति या परिस्थिति परफेक्ट नहीं होती है, आप लोगों और परिस्थितियों से किस तरह निपटते हैं, यही आपके लिए अच्छा चीजों को अच्छा या बुरा बनाता है।

3- हर किसी के साथ अपनी समस्याओं को कभी साझा न करें। कुछ लोग खुश होते हैं कि आपके पास समस्याएं हैं और शेष लोगों को इसकी परवाह नहीं होती है।

4- जिंदगी में ऐसा समय कभी भी नहीं होगा जब आप अपने पास से पूरी तरह संतुष्ट हों।

5- जीवन के हर चरण में आपके मित्र होंगे। लेकिन हर बार वही नहीं होगें।

6- लोग स्वयं को बचाने के लिए कुछ भी और किसी को भी त्याग देंगे- मुझे नहीं लगता कि इसे अधिक एेक्सप्लेन करने की आवश्यकता है।

7- जिंदगी में सफलता अक्सर ज्यादा प्रयास के बजाय लगातार प्रयास से मिलती है।

8- आपके दृष्टिकोण और धैर्य में प्रत्येक समस्या का समाधान छुपा है।

9- कड़ी मेहनत प्रतिभा को पीछे छोड़ देती है यदि प्रतिभा कड़ी मेहनत करना छोड़ देती है।

10- अवचेतन मन की शक्ति बहुत अधिक है, सब कुछ वास्तव में एक विचार के साथ शुरू होता है। हमेशा सोच को सकारात्मक रखिये।

वक्त बदलता है

काल से ताकतवर कुछ भी नहीं होता। इसके आगे सब बेबस हो जाते हैं। जीवन, परिस्थितियां,घटनाएं सबकुछ काल के अधीन होती हैं। जब वक्त बदलता है तो यह परिस्थितियों को रूपांतरित कर देता है।

यह इंसान की फितरत होती है कि जब वक्त अच्छा होता है तब वो सबकुछ आसान समझता है और बुरे वक्त का ख्याल करना ही नहीं चाहता है।

जब सूर्य उदय या अस्त होता है दोनों समय उसका रंग लाल होता है। केवल दिशा का फर्क आने वाले समय को निर्धारित करता है। यह बताता है कि सुबह होगी या फिर अंधेरी रात आयेगी, दोनों ही स्थितियों में सूरज का रंग और आकार एक जैसा होता है।

हम समझते हैं कि अन्य और बहुत सी चीजों की तरह कल के बारे में भी पूर्वानुमान किया जा सकता है जबकि वास्तविकता यह है कि कोई भी नहीं जानता है कि अगले पल क्या होने वाला है।

लोग सोचते हैं कोई बीमारी या दुर्घटना हो भी गई तो मेरे पास उससे निपटने के लिए कई साधन हैं पर समय का ऊँट किस करवट बैठेगा,यह किसी को पता नहीं होता।

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके कितने अनुभवी हैं और उन अनुभवों ने आपको क्या सिखाया है, जीवन हमेशा आपको एक अप्रत्याशित झटका देता है जिसके लिए अक्सर आप तैयार नहीं होते हैं।

समय के साथ प्राथमिकताएं बदलतीं हैं, विफलताओं से मत डरिये, कभी-कभी असफल होने का मतलब सीखने में पहला प्रयास होता है। जो बीत गया वो आपके दिमाग में है और जो होना है वो आपके हाथ में है।

आवश्यकता है चीजों को गौर से देखने की और समझने की प्रकृति भी यही संदेश देती है कि हर उगने वाले सूरज के साथ ढलने वाला सूरज भी साथ होता है अजीब बात है कि दोनों देखने में एक जैसे लगते हैं और दोनों का रंग और आकार भी एक जैसा होता है।

जो उलझाता है वही सुलझता है

जीवन में हमें क्या नहीं करना चाहिए यह बताने को बहुत लोग मिल जाते हैं, पर क्या करना चाहिए इसका जवाब बहुत कम लोगों के पास होता है। ऐसे लोग जीवन में मुश्किल से मिलते हैं और कभी-कभी तो हम ऐसे इंसान को पहचान ही नहीं पाते हैं।

हमें लगता है कि दूसरा व्यक्ति ही हमें वह सब कुछ दे सकता है जिससे हमें शांति मिल जाएगी। हमारी उम्मीद अक्सर टूट जाती है क्योंकि हम यह भूल जाते हैं कि कोई भी व्यक्ति हमें वही दे सकता है जो कि उसके खुद के पास हो। हम जिसे दूसरे व्यक्ति में ढूंढ रहे हैं वो भी किसी तीसरे व्यक्ति में उसे तालाश कर रहा है और तीसरा व्यक्ति किसी चौथे व्यक्ति को ढूंढ रहा है इस तरह यह अंतहीन सिलसिला जारी है।

कोई किसी को वही दे सकता है जो खुद उसके पास हो। किसी को शांति वही दे सकता है जो खुद स्थिर हो। किसी को हिम्मत वही दे सकता है जो खुद पथरीली राहों पर चला हो। किसी को रास्ता वही बता सकता है जो खुद सफर पर निकला हो। बिना अनुभव का ज्ञान तो बस उधार की जानकारी होता है जिसका सहारा लेकर किसी तरह समस्या को कुछ समय के लिए टाला तो जा सकता है पर उसका पूर्ण समाधान नहीं किया जा सकता है।

एक मकड़ी ने कमरे में जाला लगाने की सोची वह सही जगह की तलाश करने लगी उसने चिड़िया से सलाह मांगी चिड़िया ने कहा जाला कहीं भी लगाना पर खिड़कियों से दूर रहना क्योंकि जब हवा चलेगी तो जाला टूट जाएगा। मकड़ी ने बात मानकर कमरे के एक कोने में जाला बुनना शुरू ही किया था कि एक बिल्ली आ गयी उसने कहा यहां जाला बुनना बेकार है क्योंकि इस कोने में मक्खियाँ नहीं आती हैं तो फिर तुम्हारे जाले में फंसेगा कौन? तुम अलमारी के पीछे जाला बुनों वो जगह तुम्हारे मुफीद रहेगी।

मकड़ी ने अब अलमारी के पीछे ठिकाना बनाने लगी तो अलमारी में रहने वाली दीमक ने कहा यह अलमारी दीमक लगने के कारण खराब हो गई है और थोड़े समय बाद इसे कबाड़ी ले जाएगा तुम कहीं और चली जाओ। मकड़ी की तालाश जारी है।

आवश्यकता है खुद पर भरोसा करने की और बिना विचलित हुए लगातार कोशिश जारी रखने की,क्योंकि एेसा करने पर हमें अनुभव प्राप्त होता है और जब हमें जानकारी और अनुभव दोनों मिल जाते हैं फिर हमें अपनी समस्या का समाधान भी मिल जाता है ।

कुछ बातें जो हमें परेशान करती हैं

 जब लोग सच्ची खुशी ढूढ़ने के बजाय सोशल मीडिया पर खुश होने का नाटक करते हैं,लोग आजकल लाइक्स और कमेंट्स की इतनी परवाह करते हैं कि वे ऑनलाइन अंटेशन पाने के लिए कुछ भी पोस्ट करते हैं।

2- जब लोग एक दूसरे की मदद तब तक नहीं करते हैं जब तक कि दूसरे उन्हें नोटिस न करें। वे मदद इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि वे मदद करना चाहते हैं, वे मदद इसलिए करते हैं ताकि अन्य लोग उन्हें देख सकेंं।

3- जब लोग दूसरों को प्रभावित करने के लिए महंगी कारों और चीजों को खरीदते हैं और कर्ज के जाल में फंस जाते हैं, लोग अमीर होने की बजाय अमीर दिखने की परवाह अधिक करते हैं।

4- जब लोग पैसों के लिए रिश्तों की परवाह भी नहीं करते हैं, यह देखकर बहुत तकलीफ होती है कि आजकल पैसा मानव जीवन से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

5- जब भी मीडिया अनदेखी करता है और कई महत्वपूर्ण घटनाओं, आपदाओं, खेल उपलब्धियों पर ध्यान नहीं दिया जाता है या वे उन्हें राष्ट्रीय कवरेज में स्थान नहीं दिया जाता है।

6- जब भी कोई इंसान किसी अन्य इंसान से घृणास्पद और अनुचित तरीके से व्यवहार करता है, क्योंकि वह वे उनसे अलग होते हैं।

7- जब कोई शिक्षित व्यक्ति दहेज,जात-पात, और अंधविश्वास जैसी बातों में पड़कर अपने जीवन को बेकार करता है।

8- जब हम शादी-पार्टी में मनोरंजन के नाम पर बहुत से भोजन को बर्बाद करते हैं जिससे बहुत से भूखे आदमियों का पेट भरा जा सकता था।

9- जब हम मदर्स डे और फादर्स डे का जश्न मनाते हैं, लेकिन माता-पिता को अपने साथ रखने से इन्कार कर देते हैं।

10- जब एक मजदूर के बच्चे ने डाक्टर से कहा मुझे कोई एेसी दवा दे दो कि मुझे भूख ही न लगे।

किसी का बुरा मत सोचिए

ईर्ष्या से कभी किसी का भला नहीं होता है। दूसरों का अनिष्ट चाहने में अपनी ही हानि होती है। देखने में भले लगे कि हमें तात्कालिक लाभ हुआ है पर वास्तव में हमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी हानि पहुंचती है।

जिस व्यक्ति का हम बुरा चाहते हैं उस व्यक्ति को तो पता तक नहीं होता कि कोई उसके बारे में बुरे विचार रखता है। किसी के प्रति ईर्ष्या का विचार आने पर स्वयं सबसे पहले ईर्ष्या करने वाले का ही रक्त जलता है और उसके विचार नकारात्मक होने लगते हैं। मन अशांत हो जाता है जिसका असर दिनचर्या पर पड़ता है। कहावत भी है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है वह स्वयं ही उसमें पहले गिरता है।

जब हम जानते हैं कि दूसरों से ईर्ष्या करने पर, उनका अनिष्ट चाहने पर हमको महान क्षति पहुंचेगी, हमारी आत्मा दूषित हो जाएगी, हमें कहीं भी शान्ति नहीं मिलेगी तो फिर हम क्यों दूसरे के प्रति बुरे विचार रखते हैं? यदि हम यह सब जानते और समझते हुए भी दूसरों के लिए गढ्ढा खोदने का काम करते हैं उनके प्रति बुरे विचार रखते हैं तो फिर यह समझ लीजिए कि हम अपने हाथों द्वारा स्वयं को ही मूर्ख बना रहे हैं।

आग जहाँ रखी जाती है पहले उस स्थान को गरम करती और जलाती है। तेजाब जिस बर्तन में रखा गया है सबसे पहले उसे ही जलाएगा । उसी प्रकार ईर्ष्या और बुरे विचार जिसके मन में रहते हैं पहले उसी की हानि करते हैं। जितने समय तक ये मन में जमे रहते हैं तब तक निरन्तर क्षति पहुंचाने का करते हैं।

यदि किसी से हमारे मतभेद हों,विरोधी विचार हों तो उसे उस व्यक्ति से प्रकट में तो कहना चाहिये और उचित माध्यम से अपने विचारों को अभिव्यक्त भी करना चाहिए पर मन में उसकी गाँठ बाँध लेना और उम्र भर के लिए और ईर्ष्या और क्रोध को पाल लेने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।

बुराई जल्दबाज होती है यह जितनी जल्दी बढ़ती है उतनी जल्दी ही नष्ट भी हो जाती है और अपने साथ ही अपने करने वाले को भी नष्ट कर देती है। बुराई खुद को दोहराती भी है यह बार बार इंसान से टकराती है और हर बार परिणाम हैरान करने वाले और विनाशकारी होते हैं।

शराब पीने में भी कड़वी होती है और उसके परिणाम भी कड़वे होते हैं। चोरी करते वक्त मन में भय और घबराहट होती है और करने के बाद भी बेचैनी, भय और तिरस्कार मन पर हावी रहते हैं। अच्छे कर्मों का परिणाम मिलने में देरी हो सकती है पर बुराई का फल बुरा ही होता है यह निश्चित है।

भावनात्मक दर्द हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

1.भावनात्मक दर्द का व्यक्तिव पर असर शारीरिक दर्द से अधिक गहरा होता है और आपके व्यवहार पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है।

2.कभी-कभी लोग भावनात्मक चोट की तुलना में शारीरिक रूप से चोट खाना अधिक पसंद करते हैं क्योंकि आप शारीरिक चोट पर मरहम लगा सकते हैं लेकिन आपके दिल पर लगी चोट के लिए कोई मरहम नहीं होती है।

3. सबसे अधिक दर्द का सामना करने वाले अक्सर वह लोग होते हैं जो हमेशा दूसरों को खुश रखने की कोशिश कर रहे होते हैं।

4. भावनात्मक दर्द के दौरान आप अक्सर महसूस करते हैं कि आप अकेले हैं और आपको हर जगह इसके साक्ष्य मिलेते भी रहते हैं।

5. दर्द के खिलाफ गुस्सा एक प्राकृतिक ढाल है। जब कोई कहता है कि ‘मैं तुमसे नफरत करता हूं’ तो उनका वास्तव में मतलब है ‘आपने मुझे चोट पहुंचायी है’।

6. दर्द लोगों को बदलता है जिससे वह दूसरों पर कम विश्वास करते हैंं और अधिक सोचते हैं और खामोश रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

7. जब आप बहुत लंबे समय तक दर्द को दिल में रखते हैं तो यह आपके मनोभावों को प्रभावित करता है, फिर जब आपके साथ कुछ बुरा होता है तो आप रोते या शिकायत नहीं करते हैं, आप बस वहां बैठे रहते हैं और कुछ भी महसूस नहीं करते हैं।

8. कभी-कभी दर्द होने पर खुश होने का नाटक करना सिर्फ एक उदाहरण है कि आप एक व्यक्ति के तौर पर कितने मजबूत हैं।

9. दूरियां हमेशा खराब नहीं होती हैं। कभी-कभी थोड़ी दूरी बनाने से लोगों को यह पहचानने में मदद मिलती है कि आप वास्तव में उनके लिए कितना मतलब रखते थे।

10. भावनात्मक दर्द हमेशा सजा नहीं होता या फिर ऐसा कुछ नहीं होता जिसे हमने अनजाने में अपने जीवन में आकर्षित कर लिया हो। कभी-कभी इसके होने का मकसद बस इतना होता है कि जीवन में हम कुछ सीखें और आगे बढें।