उम्मीदें

जब कोई इंसान टूटता है तो केवल उसका दिल ही नहीं टूटता है बल्कि उसके साथ-साथ बहुत कुछ है जो टूट जाता है।

बहुत सारी उम्मीदें टूट जाती हैं।

दूसरों पर से भरोसा टूट जाता है।

उस व्यक्ति की छवि टूट जाती है।

बहुत से सपने टूट जाते हैं।

चीजों को देखने का नजरिया टूट जाता है।

हमारा आत्मविश्वास टूट जाता है।

दिल हमेशा वह पाना चाहता है जो कि वह चाहता है। समस्या मन को चुप रखने में होती है। और दिल और दिमाग की यह लड़ाई हमेशा ही सबसे कठिन होती है।

यह दर्द लोगों में एक शून्य बनाता है और उस शू्न्य को भरने के उनके पास 3 विकल्प होते हैं-

उदासीनता या अवसाद, और इसे खुद को नष्ट करने दें।

नफरत या खुशी, और इसे खुद को परिभाषित करने दें।

मिलने वाले सबक, और इसे खुद को मजबूत करने दें।

जो भी विकल्प आप चुनिये, आप पहले जैसै व्यक्ति कभी भी नहीं होंगे।

दिल का टूटना किसी लकड़ी से कील निकालने जैसा है। कील अपने निशान लकड़ी पर छोड़ जाती है और वह लकड़ी कभी भी पहले जैसी नहीं रह जाती है।

“ज़िंदगी” का रहस्य

कोई मीलों चलता है रोटी कमाने के लिए,

कोई मीलों चलता है उसे पचाने के लिए।

किसी के पास खाने को दो वक्त की रोटी नहीं,

किसी के पास दो रोटी खाने को वक्त नहीं।

कोई अपनों को पाने के लिए सब कुछ छोड़ देता है,

कोई सब कुछ पाने के लिए अपनों को छोड़ देता है।

कोई दौलत कमाने के लिए सेहत खो देता है,

कोई खोई सेहत पाने के लिए कमाई दौलत खो देता है।

कोई जीता ऐसे है कि कभी मरेगा ही नहीं,

कोई मरता ऐसे है मानो कभी जिया ही नहीं।

कोई चुप रहकर भी बहुत कुछ कह जाता है,

कोई बहुत कुछ कहके भी मतलब नही समझा पाता है।

कोई पत्थर मंदिर में जाकर भगवान बन जाता है,

कोई इंसान रोज मंदिर जाकर पत्थर ही रह जाता है।

कुछ बातें जो तुम्हे सीखनी होगीं

मेरा एक मित्र है। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत है, कुछ समय पहले वह कंपनी के मुख्यालय में एक सेमिनार में हिस्सा लेने गया हुआ था, सेमिनार का विषय Ethical Practices in your Work Life था। सेमिनार में बताया गया था कि हमें कैसे अपने कार्यों को ईमानदारी से करना चाहिए, सफलता के लिए शार्टकट से बचना चाहिए और लालच में न पड़ कर सही रास्ते पर चलना चाहिए। निश्चित रूप से सेमिनार में बतायी गयी बातें बेहद प्रेरक थीं।

सेमिनार से लौटने के कुछ दिनों बाद उसे अपने जूनियर के साथ देश के एक पिछड़े हुए जिले के रूरल मार्केट में जाना था और कंपनी को मार्केट में संभावनाओं की रिपोर्ट देनी थी। मार्केट में घूमते हुए वो एक दुकान पर गया वहां उसने देखा दुकान की सेल्फ पर उसकी कंपनी के कुछ प्रॉडक्ट रखे हुए हैं जिनके उपयोग की समय सीमा या expiry date काफी समय पहले बीत चुकी है. उसने दुकानदार से कहा ऐसे प्रोडक्ट जिनके उपयोग की तिथि समाप्त हो गई हो को बेचना लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने जैसा है, उसे उन प्रोडक्ट को तुरंत हटाकर कंपनी को वापस भेज देना चाहिए।

दुकानदार उसे आश्चर्य के साथ देखने लगा, उसने कहा साहब यह रूरल मार्केट है- यहां सब कुछ बिकता है जो माल शहरों में नहीं बिक पाता उन्हें कंपनी यहां बिकने के लिए भेज देती हैं।यहां लोगों को यह तक नहीं पता कि उत्पादों की expiry date भी होती है। यहां माल अपकी कंपनी द्वारा आथराइजड एजेंसी से सप्लाई किया जाता है। पुराने माल को खपाने के लिए कंपनी हमें extra Scheme देती है, शुरूआत में एक बार पुराना माल वापस किया था उसका क्लेम आज तक नहीं मिल पाया है। आपके पहले जो साहब आते थे वो हमेशा sales बढाने को कहा करते थे।

अब आश्चर्यचकित होने की बारी मेरे मित्र की थी, वह बिना कुछ कहे वापस लौट आया उसने अपनी रिपोर्ट बनाई और मैनेजमेंट को सब कुछ लिख कर भेज दिया। उसे उम्मीद थी कंपनी इस गलत काम के खिलाफ कार्रवाई करेगी और कठोर एक्शन लेगी. कुछ दिनों के पश्चात उसे अपनी कंपनी की तरफ से मेल आया. उसमें लिखा था कि कंपनी को emotional नहीं practical लोगों की आवश्यकता है, कंपनी को उसकी सेवाओं की अब जरूरत नहीं है। उसकी नौकरी जा चुकी थी।

कुछ समय बाद मेरा वही मित्र अपने बेटे के स्कूल में पैरंट्स – टीचर मीटिंग में गया था।वहां टीचर ने उससे कहा था कि उसका बेटा स्कूल में झूठ बोलता है, वह दूसरे बच्चों की चीजें छीन लेता है और समझाने पर बहाने बनाता है और खुद को सही ठहराने की कोशिश करता है। टीचर कह रही थी कि उसके बेटे में moral values की कमी है, बच्चे मां – बाप से सीखते हैं. उसे घर पर बच्चे को ईमानदारी, सच्चाई और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता के बारे में सिखाना चाहिए. मेरा मित्र बिना कुछ कहे वहां से चला आया उसकी आँखों में आँसू थे।

 कुछ दिन पहले मुझसे मिलने आया था.तभी उसने मुझसे अपने दोनों अनुभव साझा किये थे। वह बहुत परेशान लग रहा था उसने मुझसे कहा था कि यार दुनिया में बहुत असमानता है, हर तरफ अनीति है, अन्याय है, वह कह रहा था हर जगह सत्य उपेक्षित है, आज की दुनिया में सही रास्ते पर चलने का धैर्य किसी में नहीं हर कोई झूठ का शार्टकट लेकर मंजिल पर पहुंचना चाहता है।

हम जिस तरह के माहौल में जी रहे हैं वो झूठ का है, छल और कपट का है। हम जैसे माहौल में रहते हैं वैसे ही हमारे विचार हमारी सोच बन जाती है। मै उसकी बातों से सहमत था वह जो कह रहा था वही दुनिया की हकीकत है फिर उसने जो मुझसे कहा वो बड़ा महत्वपूर्ण था उसने कहा कि यार जो मैं नहीं हूँ अपने बेटे को वैसा बनने के लिए कैसे कहूं? जिन रास्तों को मैं छोड़ आया हूँ उन रास्तों को पर अपने बेटे को चलने के लिए कैसे कहूं? मैं उसे कैसे समझाऊँ कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता है? वो मेरी तरफ देख रहा था उसकी आँखों में आँसू थे।

मैं निरउत्तर था। मेरा मित्र परेशान था। वह एक तरह के ethical dilemma में था, वह अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित था। काफी सोच विचार करने पर भी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। जब काफी समय बीत गया और बुद्धि कोई निर्णय नहीं कर पाई तो मैंने उससे से कहा कि तुम वही करो जो तुम्हे पहले से पता है, तुम अपने बेटे को वही बताओ जिसका तुम अनुभव कर चुके हो.. तुम उसे बता दो कि यह दुनिया कठोर है और बुरे लोगों से भरी पड़ी है, उसे बता दो यहां हर कदम पर अन्याय है और असमानता है, उसे बताओ कि सत्य यहां परेशान होता है।

मैने आगे कहा पर मैं चाहता हूं कि तुम साथ में उसे यह भी बताओ कि हर बुरे इंसान के पास भी अच्छा ह्रदय हो सकता है, उसे बताओ कि हर स्वार्थी नेता में एक अच्छा लीडर बनने की संभावना छिपी होती है, उसे बताओ कि मेहनत से मिलने वाला एक रूपया भी सड़क पर मिलने वाले पांच सौ के नोट से ज्यादा कीमती होता है। यह सब सिखने में उसे वक्त लगेगा पर उसे खुद पर विश्वास करना सिखाओ और दूसरों पर भरोसा करना भी क्योकि तभी वह एक अच्छा इंसान बन पाएगा.. ये बातें बड़ी हैं और लम्बी भी पर उसे बता दो यह उसके लिए अच्छा होगा। तुम्हारे जैसा मेरा भी एक बेटा है जो अभी बहुत छोटा है और प्यारा भी…

भूल

जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी घटती हैं जो हमारे नजरिये को बदल कर रख देती हैं ऐसा ही कुछ राधिका और सिद्धार्थ के जीवन में भी घटित हुआ था। उस दिन उनकी शादी की सालगिरह थी, राधिका ने उस दिन सिद्धार्थ को विश नहीं किया वो पति के रिस्पॉन्स को देखना चाहती थी। उस दिन सिद्धार्थ सुबह जल्दी उठा और बिना कुछ कहे घर से बाहर निकल गया। राधिका रुआँसी हो गई उसे लगा सिद्धार्थ आज के दिन उसे इग्नोर कर रहा है।

दो घण्टे बाद घर की कॉलबेल बजी, राधिका दौड़ती हुई गई और जाकर दरवाजा खोला । दरवाजे पर गिफ्ट के पैकेट और उसकी पसंद के फूलों के बुके के साथ सिद्धार्थखड़ा मुस्कुरा रहा था। सिद्धार्थ ने उसे गले से लगा लिया और सालगिरह को विश किया। फिर वह बिना कुछ कहे अपने कमरे मेँ चला गया।

राधिका गिफ्ट का पैकेट खोल कर देखने लगी तभी उसके मोबाइल फोन पर घंटी बजी उसके पास स्थानीय पुलिस स्टेशन से फोन आया था फोन पर पुलिस वाला कह रहा था कि सारी मैम बहुत दुख के साथ आपको बताना पड़ रहा है कि आपके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, उनकी जेब में पड़े पर्स से आपका फोन नम्बर ढूढ़ कर आपको कॉल किया है।

राधिका के हाथ से फोन छूट कर जमीन पर गिर पड़ा उसे इस खबर पर सहसा विश्वास ही नहीं हुआ वह सोचने लगी की सिद्धार्थ तो अभी-अभी घर के अन्दर आये हैं और मुझे गले लगाकर विश भी किया है जरूर पुलिस वालों को कोई गलतफहमी हुई है । तभी उसके दिमाग में एक बात बिजली की तरह कौँध गई उसे कहीं पर सुनी एक बात याद आ गई कि मरे हुये इन्सान की आत्मा अपनी विश पूरा करने एक बार जरूर आती है।

राधिका बदहवास होकर दहाड़े मारकर रोने लगी। उसे सिद्धार्थ से अपना वो मिलना, प्यार , लड़ना, झगड़ना, नोक-झोंक सभी कुछ याद आने लगा। उसे अपने ऊपर पश्चतचाप होने लगा कि अन्तिम समय में भी वो सिद्धार्थ को प्यार ना दे सकी।

वो बिलखती हुई जब अपने कमरे में पहुंची तो उसने देखा सिद्धार्थ वहाँ नहीं था। वो चिल्ला चिल्ला कर रोती हुई सिद्धार्थ की तस्वीर के सामने खड़े होकर प्लीज कम बैक, कम बैक सिद्धार्थ कहने लगी, वह रोते हुए कह रही थी कि सिद्धार्थ तुम एक बार वापस आ जाओ मै अब कभी भी तुमसे नहीं झगड़ूंगी।

ठीक उसी वक्त बाथरूम का दरवाजा खुला और किसी ने से उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा क्या हुआ? राधिका ने पलट कर देखा तो उसके पति सिध्दार्थ उसके सामने खड़े थे। वो रोती हुई उनके सीने से लग गई उसने सुबुकते हुए सिद्धार्थ से सारी बात बताई ।

तब सिद्धार्थ ने बताया कि आज सुबह जब वो उसके लिए शादी की सालगिरह का गिफ्ट लेने के लिए गए थे तो रास्ते में उनका पर्स कहीं गिर गया था फिर एक दोस्त से पैसे उधार लेकर उन्होंने गिफ्ट खरीदा था । जिस व्यक्ति को उनका बटुआ मिला होगा लगता है उसकी दुर्घटना में मौत हो गई है।

जिन्दगी में किसी की अहमियत तब पता चलती है जब वो हमारे साथ नही होता है, राधिका और सिद्धार्थ को तो जिंदगी ने दूसरा मौका दे दिया पर जिन्दगी की करवटें सभी को भूल सुधार का मौका नहीं देती हैं। थोड़ा झुककर लोगों को माफ़ कर देना अच्छा है क्या पता दुबारा पश्चाताप का मौका भी मिले न मिले।

जो सच अक्सर हम देख नहीं पाते हैं

पवन के पिता का देहांत हुए कई वर्ष गुजर चुके थे। उसकी मां राधा लोगों के घरों में काम करके किसी तरह पवन की पढ़ाई का खर्च उठा रही थी। राधा का एक ही सपना था कि पवन पढ लिख कर अच्छा इंसान बने। पर स्कूल से प्रतिदिन आने वाली शिकायतों ने राधा को विचलित कर दिया था।

आज पवन फिर गंदी ड्रेस में देरी से स्कूल पहुंचा था। यह प्रतिदिन का क्रम बन गया था। वह रोज गंदे कपड़ों में देरी से स्कूल पहुंचता था और इस कारण टीचर द्वारा उसे रोज सजा मिलती थी। उसकी इस आदत के बारे में कई बार उसके घर में भी शिकायत की गई थी और टीचर ने कई बार बार उसे समझाया भी था पर पवन न जाने किस मिट्टी का बना हुआ था कि उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं पड़ता था।

राधा को लगता था कि पवन रोज स्कूल देर से पहुंचता है और रोज घर भी देर से आता है हो न हो पवन अवश्य ही रास्ते में खेल-कूद में लग जाता है और इसी वजह से उसकी ड्रेस भी गन्दी हो जाती है। उसने पवन को हर तरह से समझाया था पर पवन था कि उस पर इन बातों का कुछ भी असर नहीं पड़ रहा था।

समय पंख लगा कर उड़ रहा था। एक दिन सुबह के समय पवन के क्लास टीचर सब्जी लेने के लिए थोक मंडी गए हुए थे। अचानक उनकी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना स्कूल में उनसे मार खाता था। वह देख रहे थे कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और बड़े दुकानदार जब अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो कुछ सब्जियां ज़मीन पर गिर जाती थीं जिन्हें वह बच्चा फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता था। यह बच्चा पवन था।

यह नज़ारा देख कर मास्टर जी कुछ परेशानी में पड़ गए वह सोच रहे थे कि ये माजरा क्या है, भला पवन क्यों गिरी हुई सब्जियों को इकट्ठा करके झोली में भर रहा है? वे पवन का चोरी चोरी पीछा करने लगे। उन्होंने देखा कि जब पवन की झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह उसे ले जाकर मुख्य सड़क के किनारे बैठ कर ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा सब्जी बेचने के लिए लोगों को पुकारने लगा । पवन के मुंह पर सब्जियों की मिट्टी लग गई थी और उसकी ड्रेस भी धूल से गन्दी हो गई थी। मास्टर जी ने देखा पवन की आंखों नम थीं, ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में वे पहली बार देख रहा थे ।

तभी कुछ एेसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। अचानक एक आदमी जिसकी दुकान के सामने पवन ने अपनी नन्ही सी दुकान लगा रखी थी उठकर पवन के पास आया उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही सी दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाहों से पकड़ कर पवन को भी जोर से धक्का दे दिया।

पवन की आखों में आंसू आ गए उसने चुपचाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा किया और थोड़ी देर बाद अपनी सब्जी लिए एक दूसरी दुकान के सामने सहमे मन के साथ खड़ा हो गया। पवन के पास थोड़ी सी सब्ज़ी थी और कीमत बाकी दुकानों से कम थी इसलिए जल्द ही बिक्री हो गयी, पवन उठा और बाज़ार में एक कपड़े की सिलाई वाली दुकान में दाखिल हुआ उसने दुकानदार को कुछ पैसे दिए और फिर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और स्कूल की तरफ चल पड़ा।

अगली सुबह पवन के क्लास टीचर पवन के घर पहुंचे पवन घर से निकल गया था और घर पर उसकी माँ ही थीं पवन के टीचर को देखकर राधा थोड़ा चौंक गयीं उसे लगा आज फिर पवन की शिकायत करने उसके घर आये हैं। राधा को कुछ कहने का बिना कोई मौका दिये मास्टर जी बोल पड़े बहनजी आप मेरे साथ चलो मै आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल देर से क्यों जाता है।

राधा तुरंत मास्टर जी के साथ चल पड़ी और कहने लगी आज इस लड़के की खैर नहीं मैं उसे छोडूंगी नहीं आज,मास्टर जी राधा के साथ मंडी पहुंच गए और वे लोग पवन की गतिविधियों को चुपचाप छुप कर देखने लगे। आज भी पवन लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े, और आखिरी में पवन अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल गया। पवन ने दुकानदार को पैसे दिए और आज दुकानदार उसे एक लेडीज सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट लेलो,उसने सूट को लेकर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया।

आज भी वह एक घंटा देर से स्कूल पहुचा था, वह सीधा क्लास टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रखकर मार खाने के लिए आगे बढ़ा दिए, टीचर कुर्सी से उठे और फौरन उसको को गले से लगाकर जोर से रोने लगे अचानक पवन की नज़र उसकी माँ पर पड़ी जो क्लासरूम के एक कोने में खड़ी होकर लगातार रो रही थी।

टीचर ने अपने आप को किसी तरह संभाला और पवन से पूछा कि तुम्हारे स्कूल बैग में जो सूट है वह किसके लिए है?

अब रोने की बारी पवन की थी उसने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ बड़े लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं उसके पास अपने शरीर को पूरी तरह से ढांपने वाले कोई कपड़े भी नहीं हैं और मेरी माँ के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वह नया सूट खरीद सके इसीलिए मैंने अपने पैसों से माँ के लिए यह सूट खरीदा है।

राधा से जब रहा न गया तो उसने पवन को खींचकर सीने से लगा लिया और जार जार रोने लगी मां को रोते हुए देख पवन अपने छोटे -छोटे हाथों से मां के आंसू पोछते हुए कहने लगा माँ तुम रो मत अब तुम्हारा बेटा बड़ा हो गया है। जाड़े के दिन थे और खिड़की के बाहर सूरज ढलने लगा था, दूसरी क्लास के टीचर और बच्चे भी अब कमरे में आ चुके थे। सभी की आखें नम थीं और हर कोई निशब्द खड़ा था, आज शब्दों की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि आसूं आज संवेदनाओं को शब्दों से भी बेहतर व्यक्त कर रहे थे।

निशब्द

एक छोटी लड़की अपने पिता के साथ मंदिर गयी थी। तभी मंदिर के प्रवेश द्वार पर उसने शेर की प्रतिमा को देखा उस पत्थर के शेर को देखकर वो छोटी सी बच्ची डर गयी और रोते हुए कहने लगी पापा जल्दी से यहां से चलो नहीं तो ये शेर हमें मारकर खा जायेगा। उसके पिता ने बच्ची को गोद में उठा लिया और उसे समझाते हुए कहने लगे मुन्नी डरो नहीं ये शेर तो पत्थर का है ये हमारा कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा।

मंदिर में मूर्ति के दर्शन के बाद वे दोनों बाहर आ गये। मंदिर के बाहर एक अपाहिज बैठा हुआ था उसके साथ एक छोटा लड़का भी था वे मंदिर के बाहर आने वाले हर व्यक्ति से कुछ मांग रहे थे और मिलने वाले पैसों और प्रसाद को अलग – अलग थैलों में डाल रहे थे।

जब पिता और पुत्री उस अपाहिज व्यक्ति के पास से गुजरे तो उसने अपना हाथ आगे कर दिया पिता ने अनमने भाव से पांच रूपये का सिक्का निकाला और उस अपाहिज के पास फेंक दिया तभी वो छोटा सा लड़का दौड़कर थैला लेकर आया और इशारे से थैले में प्रसाद डालने के लिए आग्रह करने लगा। पिता ने बच्ची को गोद में उठाया और उस लड़के को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए। ये शहर के प्रतिष्ठित वकील सुधीर चक्रवर्ती और उनकी बेटी पालकी थे।

सुधीर अभी पार्किंग में खड़ी हुई अपनी गाड़ी के पास पहुंचे ही थे कि न जाने कहां से वही लड़का दौड़ता हुआ आया और उनका हाथ पकड़ कर खींचने लगा सुधीर को लगा कि वह उनसे प्रसाद देने की जिद कर रहा है उन्हें लड़के का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और उन्होंने को बिना कोई मौका दिये अपना हाथ झटके के साथ छुड़ाया और लड़के के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया।

सुधीर के इस व्यवहार से हतप्रभ वह लड़का वहीं जमीन पर गिर पड़ा उसकी आँखों में आँसू आ गए । सुधीर ने देखा कि वह अपाहिज भिखारी दूर से ही उन्हें रूकने का इशारा करते हुए जमीन पर घिसटते हुए तेजी से उनकी तरफ चला आ रहा है। अब तक थोड़ी भीड़ भी तमाशा देखने के लिए जुट गई थी। सुधीर को महसूस हुआ कि बात बढ़ गई है और उन्होंने सौ रुपए का नोट उसे देने के लिए निकाल लिया वह लोगों से पैसा लूटने की इन लोगों की इस नई चाल को समझ चुके थे।

वह बूढा अपाहिज भिखारी सुधीर के पास आकर हाथ जोड़कर कहने लगा बाबूजी लगता है कि इस लड़के से कोई गलती हो गई है इसे माफ कर दीजिए, यह लड़का बोल नहीं सकता है। इसे मैंने ही आपको बुलाने के लिए भेजा था दरअसल आपकी बिटिया की चांदी की पायल मंदिर में गिर गई थी जिसे यह बच्चा उठाकर मेरे पास ले आया उसे वापस करने के लिए ही इसे मैंने आपको बुलाने के लिए भेजा था।

सुधीर अपने बिस्तर पर लेटे हुए करवटें बदल रहे थे उन्हें आज नींद नहीं आ रही थी रह रह कर उस अपाहिज भिखारी और उसके गूँगे लड़के का चेहरा उनकी आखों के सामने आ जाता था। सुधीर ने देखा कि पालकी भी अभी जाग रही है उन्होंने उसे अपने पास बुलाया और प्यार से पूछा बिटिया रानी ये बताओ कि मंदिर में तुमने आज भगवान से क्या माँगा? पालकी ने कहा कुछ नहीं मांगा क्योंकि शेर की प्रतिमा की तरह ही मंदिर में भगवान भी पत्थर के थे।

सुधीर चुपचाप उठे और अपनी डायरी में आज की तारीख डालकर लिखने लगे आज मैं अपनी बेटी के उत्तर के सामने निशब्द और निरूउत्तर हूं। मैं आज तक ईश्वर को मंदिर में पत्थरों में खोज रहा था पर आज पता चला कि वो वहीं मंदिर के बाहर इंसानों में इंसानियत के रूप में मौजूद था जिसे पहचानने में मुझसे गलती हो गई थी।

इमोशनल ब्लैकमेल

इमोशनल ब्लैकमेल से आशय एक ऐसी अवस्था से है जिसमें पीड़ित व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए अक्सर धमकियों, दंड एवं छल का प्रयोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है, ऐसा किसी अन्य व्यक्ति के व्यवहार को अपने अनुसार नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

अस्वस्थ रिश्तों में अक्सर एक या दोनो लोगों द्वारा रिश्ते में भावनात्मक ब्लैकमेल किया जाता है। भावनात्मक ब्लैकमेल एक हेरफेर की रणनीति है जिसका उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है जिसके साथ आपका निकट संबंध है। यह पुरुष और महिला दोनों द्वारा किया जाता है।

भावनात्मक ब्लैकमेल के संकेत

स्वस्थ रिश्तों के लिए बातचीत की आवश्यकता होती है। अपने साथी से बात न करना या फिर उनके कॉल या टेक्स्ट पर कोई भी प्रतिक्रिया न व्यक्त करना भावनात्मक ब्लैकमेल का संकेत है।

अपने साथी को यह बताना कि आप परेशान हैं और आप परेशान रहते हुए किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं, यह एक बात है। पर संचार के सभी माध्यम काट देना और अपने साथी को पूरी तरह से अनदेखा करना दूसरी बात है।

जब रिश्ते में कोई व्यक्ति हर बार जब वो परेशान होते हैं या नाराज होते हैं रिश्ते को तोड़ने या छोड़ने की धमकी देता है तो अक्सर वो, ऐसा अपनी बात मनवाने और अपने साथी से रिश्ते में इच्छानुसार अनुपालन करवाने के लिए रिश्ता छोड़ने की धमकी का उपयोग करते हैंं।

दुर्भाग्य से, रिश्तों में खटास आने पर अक्सर बच्चों को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अपने बच्चों को न देख पाने की धमकी का इस्तेमाल अक्सर लोगों को और बुरी और दुखी स्थिति में रखने के लिए किया जाता है।

आपका साथी भी कभी गलत हो सकता है, लेकिन वे कभी भी अपने दोष नहीं मानते हैं, और अक्सर आप पर दोष डालते हैं और फिर वे आपको अपनी चिंताओं या मुद्दों को बीच में लाने की कोशिश करने के लिए भी दोषी महसूस कराते हैं।

इसके अतिरिक्त बहुत से माइंड गेम्स हैं जिनका इस्तेमाल प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लोग रिश्तों में एक-दूसरे को मैनुपलेट करने के लिए करते हैं।

हम सभी को अपना रास्ता निकालना पसंद है, लेकिन इसे करने के लिए स्वस्थ तरीके हैं। एक स्वस्थ रिश्ते में आपको समझौता करने की आवश्यकता होगी, जिसका अर्थ है कि आपके पास हर समय अपना रास्ता नहीं होगा।

गलतियां

जिससे गलतियां न हो वो इंसान नही भगवान हो जाएगा। गलतियां सिखाती भी हैं और अनुभव भी देती हैं उसी सीख और अनुभव के आधार पर हम निर्णय लेते हैं। इसलिए हम मान लेते हैं नई गलती करने और पुरानी गलती दोहराने से आपका आशय जीवन में सही और गलत निर्णय लेने से है।

गलतियां करने से कोई बच नहीं सकता। जब तक सांसें चलेगी फैसले लेने होंगे।

हम आज जो भी हैं अपने बीते हुए कल में लिए गए फैसलों के कारण ही हैं। हम कल क्या होगें इसका फैसला हमारे आज के लिये हुए निर्णय करेंगे। निश्चित रूप से किसी के सभी निर्णय हमेशा न तो सही और न ही हमेशा गलत हो सकते हैं।

हर इन्सान के जीवन में कुछ सही तो कुछ गलत निर्णय होते है। आपका कोई निर्णय सही होगा या गलत इसका निर्धारण सिर्फ और सिर्फ समय करता है। अक्सर हमें आज जो सही लगता है वो भविष्य में गलत साबित होता है और जो गलत लगता है वो ही सही साबित हो जाता है। जब निर्णय सही साबित हो जाता है तो तारीफ और जब गलत हो जाता है तो आलोचना के साथ गलत होने की जिम्मेदारी भी लेनी पड़ती है।

जब भी इन्सान कोई निर्णय लेता है तो वह यह सोच के नहीं लेता कि यह गलत साबित होगा। दरअसल निर्णय आज की परिस्थितियों में लिए जाते हैं जबकि कल की बदली हुई परिस्थितियां उन्हें सही या गलत साबित करती हैं।

कल किसने देखा है? किसी ने नहीं पर इंसान की फितरत होती है अनुमान लगाने की और इसी आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।आप कितनी सटीकता से भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं यह आपकी दूरदर्शिता को निर्धारित करता है और आपकी दूरदर्शिता निर्धारित करती है आपके निर्णय के सफल या असफल होने की संभावना को। अनुमान तो कोई भी लगा सकता है पर अनुभव के साथ अनुमान लगाने की संभावना बढ़ जाती है।

यही कारण है कि अनुभव के साथ लोगों से गलतियां होने की संभावना कम हो जाती है।

नसीब

नसीब पासा फेंकने की तरह है और आप इसकी सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं। यदि सब कुछ आपकी इच्छा के अनुसार घटित होता है तो अच्छा है और यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर अपने कौशल में सुधार करने के लिए काम करना जारी रखिये।

नसीब ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप नियंत्रित कर सकते हैं, जबकि कड़ी मेहनत आपके हाथ में है जो आपके चांसेज को बेहतर बनाती है। आप जिसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं उसके बजाय जो आपके नियंत्रण में है उस पर अपने ध्यान को केंद्रित करना हमेशा बेहतर होता है।

लोग आपसे अधिक प्रतिभाशाली हो सकते हैं लेकिन कड़ी मेहनत ज्यादा या कम करने का किसी के पास कोई बहाना नहीं होता है, जीवन में कड़ी मेहनत करने का अवसर सबके पास समान होता है।

जीवन की दो चाबियाँ कड़ी मेहनत और किस्मत हैं। जब ये दोनों चाबियाँ एक साथ काम करती हैं, तो आपके जीवन का ताला खुल जाता है।

कड़ी मेहनत सीढ़ियों की तरह है और किस्मत लिफ्ट की तरह है, कभी-कभी लिफ्ट फेल हो सकती है लेकिन सीढ़ियांं हमेशा आपको ऊपर की तरफ ले जाएंगी।

आपको अपनी कड़ी मेहनत का परिणाम हो सकता है तुरंत या फिर निकट भविष्य में ना मिले, लेकिन अंततः इसका परिणाम मिलकर रहेगा क्योंकि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती है।

कभी-कभी आप अपनी कड़ी मेहनत को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते हैं और लोग इस गलतफहमी में उसे आपका नसीब समझ लेते हैं।

मुश्किल सबक

1- दूसरों के सामने खुद को लाचार और बेबस मत दिखाइये , लोग इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।

2- किसी रिश्ते में जो व्यक्ति कम परवाह करता है अक्सर उसका पक्ष ज्यादा मजबूत होता है और वह हर्ट भी कम होता है।

3- इस दुनिया में पैसा बोलता है। पैसे के बिना, आप कुछ भी नहीं हैं।

४- आपके बारे में लोगों की धारणा वास्तविकता से भी अधिक महत्वपूर्ण है, अक्सर हम तथ्यों को नजरंदाज करते हैं और धारणा के आधार पर किसी को दोषी या निर्दोष मान लेते हैं।

5- हम उन लोगों को महत्व देते हैं जो यह नहीं सोचते हैं कि हम महत्वपूर्ण हैं और जो हमें महत्वपूर्ण मानते हैं, उन्हें हम स्वीकार नहीं करते हैं।

6- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके ग्रेड कितने अच्छे हैं, ग्रेड आपको केवल आधी दूरी तक ले जाते हैं,लोग आपके सामाजिक कौशल पर अधिक ध्यान देते हैं।

7- हर किसी को खुश करना असंभव है। हमेशा कोई न कोई होगा जो आपसे असहमत है।

8- आप जितना अधिक बाहर की दुनिया में खुशी पाना चाहेंगे , उतना ही अधिक आप असफल होंगे।

9- हम में से बहुत लोग अतीत या भविष्य में जीते हैं। वर्तमान बहुतों के लिए अज्ञात है।

10- आपके जीवन में सभी की एक भूमिका है और जब उनकी भूमिका समाप्त हो जाएगी, तो वे आपको छोड़ देंगे।

11- यदि आप अपने भीतर की आवाज को नहीं सुनते हैं, तो संभावना अधिक है कि आपको बाद में पछताना होगा।