यादें

एक वो जमाना था
जिसमें खुशियों का ठिकाना था
आसमान छूने की ख्वाईश थी
हर एक सपना सुहाना था।

ना दुनियादारी की बंदिशें थीं
ना दौलत का पैमाना था
बस मिट्टी की खुशबू थी
हर एक दोस्त पुराना था।

मां-पापा की डांट में
प्यार भरा अफसाना था
कागज़ की कश्ती थी
लहरों के उस पार जाना था।

रूठने-मनाने के खेल में
छिपा एक बहाना था
तेज भागती जिंदगी में
दिल बचपन का दीवाना था।

कुछ बातें जो तुम्हे सीखनी होगीं

मेरा एक मित्र है। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत है, कुछ समय पहले वह कंपनी के मुख्यालय में एक सेमिनार में हिस्सा लेने गया हुआ था, सेमिनार का विषय Ethical Practices in your Work Life था। सेमिनार में बताया गया था कि हमें कैसे अपने कार्यों को ईमानदारी से करना चाहिए, सफलता के लिए शार्टकट से बचना चाहिए और लालच में न पड़ कर सही रास्ते पर चलना चाहिए। निश्चित रूप से सेमिनार में बतायी गयी बातें बेहद प्रेरक थीं।

सेमिनार से लौटने के कुछ दिनों बाद उसे अपने जूनियर के साथ देश के एक पिछड़े हुए जिले के रूरल मार्केट में जाना था और कंपनी को मार्केट में संभावनाओं की रिपोर्ट देनी थी। मार्केट में घूमते हुए वो एक दुकान पर गया वहां उसने देखा दुकान की सेल्फ पर उसकी कंपनी के कुछ प्रॉडक्ट रखे हुए हैं जिनके उपयोग की समय सीमा या expiry date काफी समय पहले बीत चुकी है. उसने दुकानदार से कहा ऐसे प्रोडक्ट जिनके उपयोग की तिथि समाप्त हो गई हो को बेचना लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने जैसा है, उसे उन प्रोडक्ट को तुरंत हटाकर कंपनी को वापस भेज देना चाहिए।

दुकानदार उसे आश्चर्य के साथ देखने लगा, उसने कहा साहब यह रूरल मार्केट है- यहां सब कुछ बिकता है जो माल शहरों में नहीं बिक पाता उन्हें कंपनी यहां बिकने के लिए भेज देती हैं।यहां लोगों को यह तक नहीं पता कि उत्पादों की expiry date भी होती है। यहां माल अपकी कंपनी द्वारा आथराइजड एजेंसी से सप्लाई किया जाता है। पुराने माल को खपाने के लिए कंपनी हमें extra Scheme देती है, शुरूआत में एक बार पुराना माल वापस किया था उसका क्लेम आज तक नहीं मिल पाया है। आपके पहले जो साहब आते थे वो हमेशा sales बढाने को कहा करते थे।

अब आश्चर्यचकित होने की बारी मेरे मित्र की थी, वह बिना कुछ कहे वापस लौट आया उसने अपनी रिपोर्ट बनाई और मैनेजमेंट को सब कुछ लिख कर भेज दिया। उसे उम्मीद थी कंपनी इस गलत काम के खिलाफ कार्रवाई करेगी और कठोर एक्शन लेगी. कुछ दिनों के पश्चात उसे अपनी कंपनी की तरफ से मेल आया. उसमें लिखा था कि कंपनी को emotional नहीं practical लोगों की आवश्यकता है, कंपनी को उसकी सेवाओं की अब जरूरत नहीं है। उसकी नौकरी जा चुकी थी।

कुछ समय बाद मेरा वही मित्र अपने बेटे के स्कूल में पैरंट्स – टीचर मीटिंग में गया था।वहां टीचर ने उससे कहा था कि उसका बेटा स्कूल में झूठ बोलता है, वह दूसरे बच्चों की चीजें छीन लेता है और समझाने पर बहाने बनाता है और खुद को सही ठहराने की कोशिश करता है। टीचर कह रही थी कि उसके बेटे में moral values की कमी है, बच्चे मां – बाप से सीखते हैं. उसे घर पर बच्चे को ईमानदारी, सच्चाई और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता के बारे में सिखाना चाहिए. मेरा मित्र बिना कुछ कहे वहां से चला आया उसकी आँखों में आँसू थे।

 कुछ दिन पहले मुझसे मिलने आया था.तभी उसने मुझसे अपने दोनों अनुभव साझा किये थे। वह बहुत परेशान लग रहा था उसने मुझसे कहा था कि यार दुनिया में बहुत असमानता है, हर तरफ अनीति है, अन्याय है, वह कह रहा था हर जगह सत्य उपेक्षित है, आज की दुनिया में सही रास्ते पर चलने का धैर्य किसी में नहीं हर कोई झूठ का शार्टकट लेकर मंजिल पर पहुंचना चाहता है।

हम जिस तरह के माहौल में जी रहे हैं वो झूठ का है, छल और कपट का है। हम जैसे माहौल में रहते हैं वैसे ही हमारे विचार हमारी सोच बन जाती है। मै उसकी बातों से सहमत था वह जो कह रहा था वही दुनिया की हकीकत है फिर उसने जो मुझसे कहा वो बड़ा महत्वपूर्ण था उसने कहा कि यार जो मैं नहीं हूँ अपने बेटे को वैसा बनने के लिए कैसे कहूं? जिन रास्तों को मैं छोड़ आया हूँ उन रास्तों को पर अपने बेटे को चलने के लिए कैसे कहूं? मैं उसे कैसे समझाऊँ कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता है? वो मेरी तरफ देख रहा था उसकी आँखों में आँसू थे।

मैं निरउत्तर था। मेरा मित्र परेशान था। वह एक तरह के ethical dilemma में था, वह अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित था। काफी सोच विचार करने पर भी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। जब काफी समय बीत गया और बुद्धि कोई निर्णय नहीं कर पाई तो मैंने उससे से कहा कि तुम वही करो जो तुम्हे पहले से पता है, तुम अपने बेटे को वही बताओ जिसका तुम अनुभव कर चुके हो.. तुम उसे बता दो कि यह दुनिया कठोर है और बुरे लोगों से भरी पड़ी है, उसे बता दो यहां हर कदम पर अन्याय है और असमानता है, उसे बताओ कि सत्य यहां परेशान होता है।

मैने आगे कहा पर मैं चाहता हूं कि तुम साथ में उसे यह भी बताओ कि हर बुरे इंसान के पास भी अच्छा ह्रदय हो सकता है, उसे बताओ कि हर स्वार्थी नेता में एक अच्छा लीडर बनने की संभावना छिपी होती है, उसे बताओ कि मेहनत से मिलने वाला एक रूपया भी सड़क पर मिलने वाले पांच सौ के नोट से ज्यादा कीमती होता है। यह सब सिखने में उसे वक्त लगेगा पर उसे खुद पर विश्वास करना सिखाओ और दूसरों पर भरोसा करना भी क्योकि तभी वह एक अच्छा इंसान बन पाएगा.. ये बातें बड़ी हैं और लम्बी भी पर उसे बता दो यह उसके लिए अच्छा होगा। तुम्हारे जैसा मेरा भी एक बेटा है जो अभी बहुत छोटा है और प्यारा भी…

भूल

जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी घटती हैं जो हमारे नजरिये को बदल कर रख देती हैं ऐसा ही कुछ राधिका और सिद्धार्थ के जीवन में भी घटित हुआ था। उस दिन उनकी शादी की सालगिरह थी, राधिका ने उस दिन सिद्धार्थ को विश नहीं किया वो पति के रिस्पॉन्स को देखना चाहती थी। उस दिन सिद्धार्थ सुबह जल्दी उठा और बिना कुछ कहे घर से बाहर निकल गया। राधिका रुआँसी हो गई उसे लगा सिद्धार्थ आज के दिन उसे इग्नोर कर रहा है।

दो घण्टे बाद घर की कॉलबेल बजी, राधिका दौड़ती हुई गई और जाकर दरवाजा खोला । दरवाजे पर गिफ्ट के पैकेट और उसकी पसंद के फूलों के बुके के साथ सिद्धार्थखड़ा मुस्कुरा रहा था। सिद्धार्थ ने उसे गले से लगा लिया और सालगिरह को विश किया। फिर वह बिना कुछ कहे अपने कमरे मेँ चला गया।

राधिका गिफ्ट का पैकेट खोल कर देखने लगी तभी उसके मोबाइल फोन पर घंटी बजी उसके पास स्थानीय पुलिस स्टेशन से फोन आया था फोन पर पुलिस वाला कह रहा था कि सारी मैम बहुत दुख के साथ आपको बताना पड़ रहा है कि आपके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, उनकी जेब में पड़े पर्स से आपका फोन नम्बर ढूढ़ कर आपको कॉल किया है।

राधिका के हाथ से फोन छूट कर जमीन पर गिर पड़ा उसे इस खबर पर सहसा विश्वास ही नहीं हुआ वह सोचने लगी की सिद्धार्थ तो अभी-अभी घर के अन्दर आये हैं और मुझे गले लगाकर विश भी किया है जरूर पुलिस वालों को कोई गलतफहमी हुई है । तभी उसके दिमाग में एक बात बिजली की तरह कौँध गई उसे कहीं पर सुनी एक बात याद आ गई कि मरे हुये इन्सान की आत्मा अपनी विश पूरा करने एक बार जरूर आती है।

राधिका बदहवास होकर दहाड़े मारकर रोने लगी। उसे सिद्धार्थ से अपना वो मिलना, प्यार , लड़ना, झगड़ना, नोक-झोंक सभी कुछ याद आने लगा। उसे अपने ऊपर पश्चतचाप होने लगा कि अन्तिम समय में भी वो सिद्धार्थ को प्यार ना दे सकी।

वो बिलखती हुई जब अपने कमरे में पहुंची तो उसने देखा सिद्धार्थ वहाँ नहीं था। वो चिल्ला चिल्ला कर रोती हुई सिद्धार्थ की तस्वीर के सामने खड़े होकर प्लीज कम बैक, कम बैक सिद्धार्थ कहने लगी, वह रोते हुए कह रही थी कि सिद्धार्थ तुम एक बार वापस आ जाओ मै अब कभी भी तुमसे नहीं झगड़ूंगी।

ठीक उसी वक्त बाथरूम का दरवाजा खुला और किसी ने से उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा क्या हुआ? राधिका ने पलट कर देखा तो उसके पति सिध्दार्थ उसके सामने खड़े थे। वो रोती हुई उनके सीने से लग गई उसने सुबुकते हुए सिद्धार्थ से सारी बात बताई ।

तब सिद्धार्थ ने बताया कि आज सुबह जब वो उसके लिए शादी की सालगिरह का गिफ्ट लेने के लिए गए थे तो रास्ते में उनका पर्स कहीं गिर गया था फिर एक दोस्त से पैसे उधार लेकर उन्होंने गिफ्ट खरीदा था । जिस व्यक्ति को उनका बटुआ मिला होगा लगता है उसकी दुर्घटना में मौत हो गई है।

जिन्दगी में किसी की अहमियत तब पता चलती है जब वो हमारे साथ नही होता है, राधिका और सिद्धार्थ को तो जिंदगी ने दूसरा मौका दे दिया पर जिन्दगी की करवटें सभी को भूल सुधार का मौका नहीं देती हैं। थोड़ा झुककर लोगों को माफ़ कर देना अच्छा है क्या पता दुबारा पश्चाताप का मौका भी मिले न मिले।

जो सच अक्सर हम देख नहीं पाते हैं

पवन के पिता का देहांत हुए कई वर्ष गुजर चुके थे। उसकी मां राधा लोगों के घरों में काम करके किसी तरह पवन की पढ़ाई का खर्च उठा रही थी। राधा का एक ही सपना था कि पवन पढ लिख कर अच्छा इंसान बने। पर स्कूल से प्रतिदिन आने वाली शिकायतों ने राधा को विचलित कर दिया था।

आज पवन फिर गंदी ड्रेस में देरी से स्कूल पहुंचा था। यह प्रतिदिन का क्रम बन गया था। वह रोज गंदे कपड़ों में देरी से स्कूल पहुंचता था और इस कारण टीचर द्वारा उसे रोज सजा मिलती थी। उसकी इस आदत के बारे में कई बार उसके घर में भी शिकायत की गई थी और टीचर ने कई बार बार उसे समझाया भी था पर पवन न जाने किस मिट्टी का बना हुआ था कि उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं पड़ता था।

राधा को लगता था कि पवन रोज स्कूल देर से पहुंचता है और रोज घर भी देर से आता है हो न हो पवन अवश्य ही रास्ते में खेल-कूद में लग जाता है और इसी वजह से उसकी ड्रेस भी गन्दी हो जाती है। उसने पवन को हर तरह से समझाया था पर पवन था कि उस पर इन बातों का कुछ भी असर नहीं पड़ रहा था।

समय पंख लगा कर उड़ रहा था। एक दिन सुबह के समय पवन के क्लास टीचर सब्जी लेने के लिए थोक मंडी गए हुए थे। अचानक उनकी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना स्कूल में उनसे मार खाता था। वह देख रहे थे कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और बड़े दुकानदार जब अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो कुछ सब्जियां ज़मीन पर गिर जाती थीं जिन्हें वह बच्चा फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता था। यह बच्चा पवन था।

यह नज़ारा देख कर मास्टर जी कुछ परेशानी में पड़ गए वह सोच रहे थे कि ये माजरा क्या है, भला पवन क्यों गिरी हुई सब्जियों को इकट्ठा करके झोली में भर रहा है? वे पवन का चोरी चोरी पीछा करने लगे। उन्होंने देखा कि जब पवन की झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह उसे ले जाकर मुख्य सड़क के किनारे बैठ कर ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा सब्जी बेचने के लिए लोगों को पुकारने लगा । पवन के मुंह पर सब्जियों की मिट्टी लग गई थी और उसकी ड्रेस भी धूल से गन्दी हो गई थी। मास्टर जी ने देखा पवन की आंखों नम थीं, ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में वे पहली बार देख रहा थे ।

तभी कुछ एेसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। अचानक एक आदमी जिसकी दुकान के सामने पवन ने अपनी नन्ही सी दुकान लगा रखी थी उठकर पवन के पास आया उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही सी दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाहों से पकड़ कर पवन को भी जोर से धक्का दे दिया।

पवन की आखों में आंसू आ गए उसने चुपचाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा किया और थोड़ी देर बाद अपनी सब्जी लिए एक दूसरी दुकान के सामने सहमे मन के साथ खड़ा हो गया। पवन के पास थोड़ी सी सब्ज़ी थी और कीमत बाकी दुकानों से कम थी इसलिए जल्द ही बिक्री हो गयी, पवन उठा और बाज़ार में एक कपड़े की सिलाई वाली दुकान में दाखिल हुआ उसने दुकानदार को कुछ पैसे दिए और फिर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और स्कूल की तरफ चल पड़ा।

अगली सुबह पवन के क्लास टीचर पवन के घर पहुंचे पवन घर से निकल गया था और घर पर उसकी माँ ही थीं पवन के टीचर को देखकर राधा थोड़ा चौंक गयीं उसे लगा आज फिर पवन की शिकायत करने उसके घर आये हैं। राधा को कुछ कहने का बिना कोई मौका दिये मास्टर जी बोल पड़े बहनजी आप मेरे साथ चलो मै आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल देर से क्यों जाता है।

राधा तुरंत मास्टर जी के साथ चल पड़ी और कहने लगी आज इस लड़के की खैर नहीं मैं उसे छोडूंगी नहीं आज,मास्टर जी राधा के साथ मंडी पहुंच गए और वे लोग पवन की गतिविधियों को चुपचाप छुप कर देखने लगे। आज भी पवन लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े, और आखिरी में पवन अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल गया। पवन ने दुकानदार को पैसे दिए और आज दुकानदार उसे एक लेडीज सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट लेलो,उसने सूट को लेकर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया।

आज भी वह एक घंटा देर से स्कूल पहुचा था, वह सीधा क्लास टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रखकर मार खाने के लिए आगे बढ़ा दिए, टीचर कुर्सी से उठे और फौरन उसको को गले से लगाकर जोर से रोने लगे अचानक पवन की नज़र उसकी माँ पर पड़ी जो क्लासरूम के एक कोने में खड़ी होकर लगातार रो रही थी।

टीचर ने अपने आप को किसी तरह संभाला और पवन से पूछा कि तुम्हारे स्कूल बैग में जो सूट है वह किसके लिए है?

अब रोने की बारी पवन की थी उसने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ बड़े लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं उसके पास अपने शरीर को पूरी तरह से ढांपने वाले कोई कपड़े भी नहीं हैं और मेरी माँ के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वह नया सूट खरीद सके इसीलिए मैंने अपने पैसों से माँ के लिए यह सूट खरीदा है।

राधा से जब रहा न गया तो उसने पवन को खींचकर सीने से लगा लिया और जार जार रोने लगी मां को रोते हुए देख पवन अपने छोटे -छोटे हाथों से मां के आंसू पोछते हुए कहने लगा माँ तुम रो मत अब तुम्हारा बेटा बड़ा हो गया है। जाड़े के दिन थे और खिड़की के बाहर सूरज ढलने लगा था, दूसरी क्लास के टीचर और बच्चे भी अब कमरे में आ चुके थे। सभी की आखें नम थीं और हर कोई निशब्द खड़ा था, आज शब्दों की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि आसूं आज संवेदनाओं को शब्दों से भी बेहतर व्यक्त कर रहे थे।

शिकायत

बहुत से लोगों को अपने जीवन से शिकायत रहती है कि जीवन में उन्हें जो कुछ मिला है वह कितना अनुचित और अपर्याप्त है। जीवन अनुचित है इसके बारे में तो लोग काफी कुछ कहते हैं पर कुछ चीजें जो उन्हें सिर्फ खुशकिस्मती से मिल जाती है उस बारे में कुछ कहना तो दूर सोचते तक नहीं हैं।

ऐसे बहुत सारे उम्मीदवार हैं जो मुझे पता है कि तुम्हारे मुकाबले ज्यादा स्मार्ट और अधिक योग्य हैं। तुमको यहाँ नहीं होना चाहिए था मेरे बैच मेट्स को तुम जैसे लोगों की तुलना में यहां होना चाहिए था। तुम्हारे जैसे लोग आते हैं और इस संस्थान की प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं। तुमको पता होना चाहिए कि वे तुमको यहां सिर्फ विविधता के लिए लाए हैं और आप वास्तव में इसके लायक नहीं हैं।

कुछ ऐसे ही शब्दों से अमित का स्वागत देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट कालेज में हुआ था उसकी गलती बस इतनी ही थी कि वह छोटे से शहर से था और उसने साधारण से कालेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था।

यह सुनने के बाद अमित की प्रारंभिक प्रतिक्रिया क्रोध मिश्रित सदमा था फिर वह उदास हो गया उसे लगने लगा कि वह सही था। और फिर अमित के दिमाग में अचनाक कुछ क्लिक किया और वह निश्चिंत औऱ शांत हो गया।

कभी-कभी जीवन में आप भाग्यशाली होते हैं और अच्छे भाग्य से उन अवसरों को पा जाते हैं जिनके कि आप बिल्कुल हकदार नहीं हैं। जो मिला है उसेे गले लगाइये उनमें और चुनौतियों से दूर मत भागिये।

हममें से कुछ लोग केयरिंग और देखभाल करने वाले माता-पिता के यहां पैदा होते हैं जबकि हजारों लोग अनाथ होते हैं।

हममें से कुछ लोग जीवन भर के लिए दोस्त बनाते हैं जबकि लाखों लोग अकेले रहते हैं और अकेले मर जाते हैं।

हममें से कुछ लोग जीवन में प्यार को पाते हैं जबकि हजारों का दिल टूट जाते हैं।

हम में से कुछ को आज भरपेट खाना नसीब होगा जबकि लाखों लोगों आज भूखे ही सो जाएंगे।

हममें से कुछ उस सफलता को प्राप्त करेंगे जिसे वे शायद डिजर्व नहीं करते हैं जबकि हजारों लायक पीछे छूट जाएंगे।

हम में से कुछ जीवन से खुश और संतुष्ट रहेंगे जबकि अधिकांश दुखी और निराश ही रह जाएंगे।

दुनिया में कुछ सबसे आसान काम क्या हैं?

1- खुद की निजी परेशानियों पर ध्यान ना देकर अपनी कमियों का कुसूरवार दूसरों को ठहराना।

2- मोबाइल पर दिन भर बेवजह व्यस्त रहना और बिना मांगे दूसरों को मुफ्त में सलाह देते रहना।

3- माता -पिता के द्वारा दी गयीं सुख सुविधाओं का उपभोग करना और स्वयं के कंधों पर बोझ आने पर जिम्मेदारियों से भागना।

4- अपनी प्रशंसा स्वयं करना और दूसरों के कार्यों में हमेशा गलतियों को निकालना।

5- बात- बात पर झूठ बोलना और कार्य न करने के लिए लिये बहाने बनाना।

6- पहली मुलाकात के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए धारणा बना लेना और एक तरफ़ा प्रेम में पड़कर खुद को बर्बाद कर लेना।

7- किये हुए वादे तोड़ देना और अपनी गलतियों के लिए किसी और को ज़िम्मेदार ठहराकर कहीं का गुस्सा कहीं और उतारना।

8- बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे बड़ी आसानी से दूसरों को अपने आइने से तोल लेना और उसी हिसाब से दूसरों को उपदेश देते रहना।

9- नियमों को तोड़ना, चलता है कहकर चुप हो जाना और हर काम के लिए सरकार को दोष देना।

10- लोगों को नीचा दिखाने हेतु, उनके आत्मविश्वास पर हमला करना, बेवजह उन्हें कटु शब्दों से अपमानित करना।

11- किसी को गलत राय देकर दूसरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करना।

गुस्से को कम करने के लिये क्या किया जा सकता है?

क्रोध में आने पर किसी को न तो फोन करें और न ही किसी को मैसेज भेजें। इस दौरान आपकी नकारात्मक भावनाएं दिमाग पर हावी होती हैं। ऐसे में आप अच्छे शब्दों के बारे में सोच नहीं सकते हैं।

क्रोध में आने पर किसी भी प्रकार की बहस करने से बचें, क्योंकि क्रोध के दौरान बहस करने से आपके सामने कुछ ऐसी बातें आ सकती हैं, जिनके कारण आप हिंसक व्यवहार भी कर सकते हैं।

अपनी भावनाओं को समझने का प्रयास करिए आप किन बातों से भयभीत हैं? उन कारणों को व्यवाहारिक व सकारात्मक दृष्टि से समझने का प्रयास करिए।

मनोचिकित्सकों के अनुसार परेशान शख्स के अधिकांश भय काल्पनिक होते हैं। यदि आप उन भयों से रूबरू होने का प्रयास करते हैं तो काफी हद तक आपका भय जाता रहता है।

भावनात्मक दुखों को भुलाने के लिए किसी भी तरह के नशे का सहारा न लें। याद रखें ऐसे पदार्थ एक तरह का छलावा हैं। इनका सेवन दुख दूर करने के बजाय स्वास्थ्य बिगड़ता है एवं समस्या को और अधिक उलझाता है।

यदि आप आस्तिक हैं तो अपने आराध्य को याद करें। इससे आपके क्रोध के ठंडे बस्ते में जाने की संभावना बढ़ जाती है।

कारणों पर भी ध्यान देने का प्रयास करिए, जिनसे आप प्रसन्न होते हैं। इसी तरह जिन बातों से आप दुखी होते हैं, उन कारणों को भी समझने का प्रयास करिए।

अपने प्रति ईमानदार रहिये। सच से मुंह मत मोड़िए। यदि किसी बात को लेकर आप असमंजस में हैं तो इस स्थिति में अपने अंतर्मन की पुकार सुनने की कोशिश कीजिए।

अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिए। संतुलित पोषक आहार ग्रहण करिये। समय पर सोएं और जागें। नियमित रूप से व्यायाम करिये। सेहत अच्छी रहने से आप हरेक कार्य को आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं।

जिन कार्यों में आपकी दिलचस्पी है, उन्हें अंजाम दीजिए। व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर अपने शौक के लिए भी वक्त निकालना सीखिये।

जो था ही नहीं उसको कहीं ढूंढ़ना था

जो था ही नहीं उसको कहीं ढूंढ़ना था,
दरकते हुए रिश्तों में यकीन ढूढ़ना था,
गुजरते हुए लम्हों में कहीं दिन ढल न जाए,
रात होने से पहले बहाना कोई हसीन ढूढ़ना था।

हाथों में खंजर लिए लोग आज छांव ढूंढते हैं,
शहर बसाकर गांव में सुकून ढूंढना था,
पत्थर के शहर में कच्चे मकान कहां हैं,
ज़हर में जीने का जुनून  ढूंढ़ना था।

उनके इश्क करने का अंदाज भी जुदा था,
खुद को खोना यहीं था और कहीं ढूंढ़ना था,
किसी बच्चे के मानिंद दिल ज़िद पे अड़ा था,
जो था ही नहीं उसको वहीं ढूंढ़ना था।

काॅन्फिडेंस और ओवरकाॅन्फिडेंस के बीच क्या फर्क है?

1- जब आप सोचते हैं कि मैं इसे कर सकता हूं क्योंकि मैंने इसकी तैयारी की है तो यह आपका काॅन्फिडेंस है, जबकि जब आप सोचते हैं कि मैं इसे आसानी से कर सकता हूं और मुझे किसी भी तैयारी की आवश्यकता नहीं है तो यह आपका ओवरकाॅन्फिडेंस है।

2- जब आप सोचते हैं कि मुझे दूसरों की भी सुननी चाहिये तो यह आपका काॅन्फिडेंस है,जबकि जब आप सोचते हैं कि दूसरों को सिर्फ मेरी ही सुननी चाहिये तो यह आपका ओवरकाॅन्फिडेंस है।

3- जब आप सोचते हैं कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा और उन्हें मुझे सेलेक्ट कर लेना चाहिए तो यह आपका काॅन्फिडेंस है, जबकि जब आप सोचते हैं कि अगर वे मुझे सेलेक्ट नहीं करते हैं तो इसका मतलब है कि वे मूर्ख हैं तो यह आपका ओवरकाॅन्फिडेंस है।

4- जब आप हमेशा दूसरों से सम्मान चाहते हैं तो यह आपका काॅन्फिडेंस है जबकि जब आप हमेशा दूसरों का ध्यान चाहते हैं तो यह आपका ओवरकाॅन्फिडेंस है।

5- जब आप सोचते हैं कि मैं गलतियाँ करता हूं और उन्हें दोहराने की कोशिश नहीं करता हूं तो यह आपका काॅन्फिडेंस है, लेकिन जब आप सोचते हैं कि मैं परफेक्ट हूं और कोई गलती नहीं करता हूं तो यह आपका ओवरकाॅन्फिडेंस है।

6- जब आप पहले सोचते हैं फिर बोलते हैं तो यह आपका काॅन्फिडेंस है,जबकि जब आप पहले बोलते हैं फिर सोचते हैं तो यह आपका ओवरकाॅन्फिडेंस है।

7- ऐसा सोचना कि मैं यह कर सकता हूं यह आपका आत्मविश्वास है जबकि यह सोचना कि केवल मैं ही इसे कर सकता हूं यह यह आपका अतिआत्मविश्वास है।


8- किसी भी चीज के पक्ष और विपक्ष पर भली-भांति विचार करने के बाद रिस्क उठाना आपका काॅन्फिडेंस है, जबकि झूठे अहंकार के प्रभाव में लापरवाही से व्यवहार करना आपका ओवरकाॅन्फिडेंस है।

9- मुझे पता है कि मैं कौन हूं यह आपका आत्मविश्वास है जबकि मैं उन्हें दिखाना चाहता हूं कि मैं मैं कौन हूं यह आपका अतिआत्मविश्वास है।

कड़वे सच

1- हम एक असली दुनिया में रह रहे हैं और असली दुनिया आदर्शों से बहुत दूर होती है।

2- हमें विश्वासघात अक्सर उन लोगों से मिलता है जिन पर हम सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।

3- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने अच्छे इंसान हैं, कुछ बार आपका दिल जरूर टूटेगा। अच्छी बात यह है कि समय के साथ सबकुछ ठीक हो जाता है और आप पहले से बेहतर और मजबूत हो जाएंगे।

4- जीवन निष्पक्ष नहीं है यहां बहुत से ऐसे कड़ी मेहनत करने वाले लोग हैं जो गरीबी और मुफलिसी का जीवन जी रहे हैं वहीं दूसरी ओर मूर्ख और आलसी लोग जीवन की सर्वश्रेष्ठ लक्जरी का आनंद ले रहे हैं।

5- आप लोगों से आपके साथ अच्छा व्यवहार करने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। उम्मीद टूटने पर तकलीफ होती है लेकिन जीवन में आप लोगों से उम्मीद रखना भी छोड़ नहीं सकते हैं।

6- कोई भी कमजोर इंसान से प्यार नहीं करता है। शुरूआती दिनों में लोग आपसे सहानुभूति दिखाएंगे, लेकिन बाद में आप उनके लिए बोझ बन जाएंगे।

7- हर बार कर्म का नियम काम नहीं करता है। कभी-कभी आपको अपने अच्छे कर्मों के लिए बुराई का सामना करना पड़ता है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अच्छे कर्मों को करना बंद कर दिया जाए।

8- जीवन में सब कुछ एक्सपायरी डेट के साथ आता है चाहे वह आपकी खुशियां हों या फिर दुख यहां सबकुछ अस्थायी है।

9- आपके माता-पिता हमेशा आपके साथ नहीं होंगे। उनके साथ कुछ समय बिताएं और उनकी खुशी के लिए कुछ जरूर करिये ।

10- जब आप सोचते हैं कि आखिरकार सब कुछ ठीक हो गया है, तब जिंदगी हमेशा आपको झटका देकर एक बार फिर से उलझा देती है।