रिजेक्ट होने का डर मन से कैसे भगाया जाये?

रिजेक्ट किया जाना अनदेखा किये जाने से कहीं ज्यादा बेहतर है। अपनी बेरोजगारी के दौरान, मुझे अधिकतर लोगों ने अनदेखा किया और बहुत कम लोगों ने ही मुझे विनम्रतापूर्वक नहीं कहा था।

बहुत बार, यह रिजेक्शन का डर है जो हमें कोशिश करने से रोकता है। यह आश्चर्यजनक है कि हम कितनी बार गलत होते हैं। आप हमेशा कोशिश करके असफल हो सकते हैं, लेकिन कभी कोशिश करने में असफल मत होइये।

1)- हमेशा आगे बढ़ते रहिये। आप गलत हो सकते हैं लेकिन आगे बढ़ना निश्चित रूप से गलत नहीं है। कुछ भी तब तक नहीं होता जब तक आप कुछ करते नहीं हैं।

2)- कभी भी न को दिल से मत लगाइये क्योंकि आपको यदि कोई आगे बढ़ने से रोक सकता है तो वह स्वयं आप ही हैं। हेनरी फोर्ड ने कहा था, ‘चाहे आप कर सकते हैं या फिर नहीं कर सकते हैं, दोनों ही स्थितियों में आप सही हैं “

3)- ज्यादातर लोग जो आपको रिजेक्ट करते हैं, ऐसा करने का अधिकार नहीं रखते हैं, लेकिन यदि आप वो करेंगे जो ये कहते हैं तो आप उन्हें यह अधिकार दे देते हैं।

4)- लोग अपने आप में बहुत अधिक व्यस्त हैं और आप उनकी प्राथमिकताओं मे नहीं हैं।

5)- हर कोई पहले खुद को सफल बनाने के बारे में सोचता है। कुछ ही हैं जो दूसरों पर ध्यान देते हैं खासकर तब जब उन्हें आपसे आसानी से कोई रिटर्न मिलता नहीं दिखाई देता है।

6)- लगभग कोई भी मूल्यवान चीज ऐसी नहीं है जो आसानी से मिल जाए, जितना कठिन संघर्ष होगा, उतना ही लंबा समय “संतुलन” तक पहुंचने में लग जाएगा और उतनी ही लंबी आपकी खुशी होगी।

7)- रिजेक्शन का दर्द आपकी अपेक्षाओं के अनरूप होता है। सावधानी से सोचिये कि आपकी अपेक्षाएं यथार्थवादी थीं या नहीं। यदि वे नहीं थीं, तो उसके बारे में बेहतर समझने से झटका कम लगता है और आपकी पीड़ा कम हो सकती है।

8)- “नाराज होना जहर पीने की तरह है जिसे पीकर आप दूसरे व्यक्ति के मरने की प्रतीक्षा करते हैं।” निराश और हताश महसूस करना भी इसी तरह है। चीजें कैसे काम करती हैं, इस बारे में आप निराशा या गुस्सा महसूस कर सकते हैं, लेकिन इससे कुछ भी नहीं बदलेगा। अपने लिए खेद महसूस करने के बजाय, इसका उपयोग सीखने के अवसर के रूप में करिये और पता लगाइये कि अगली बार आप अलग क्या कर सकते हैं।

9)- यदि आप नौकरी के लिए इंटरव्यू की तैयार कर रहे हैं, तो आप इंटरव्यू से पहले कितना अध्ययन कर सकते हैं, इंटरव्यू के सवालों के बारे में आप कितनी सावधानी से सोचते हैं, और आप समय पर पंहुच सकते हैं या नहीं। इन बातों पर आप नियंत्रण कर सकते हैं। लेकिन साक्षात्कारकर्ता का दिन अच्छा रहा है या नहीं, अन्य साक्षात्कारकर्ता आपके मुकाबले उस पोजीशन के लिए बेहतर फिट हैं या नहीं । इन बातों पर आप नियंत्रण नहीं कर सकते हैं,यदि आप उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिन्हें आप नियंत्रित करते हैं, तो खुश रहें कि आप जो भी कर सकते थे वह सब किया। अपने नियंत्रण से बाहर की किसी चीज़ पर फ़ोकस करना व्यर्थ है, इसलिए उस पर ध्यान न दीजिए।

10)- यदि आपका लक्ष्य नौकरी पाना है, तो आप साक्षात्कार के दौरान चिंतित होंगे और आपको नौकरी नहीं मिलने पर निराशा होगी। पर यदि आपका लक्ष्य साक्षात्कार में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है या पिछले साक्षात्कार में आपने जो सबक सीखा है, उसे लागू करना है, तो सफलता पूरी तरह से आपके नियंत्रण में है। ध्यान रखिये कि यदि प्रक्रिया आपके नियंत्रण में है लेकिन परिणाम नहीं, तो केवल प्रक्रिया पर अपना ध्यान केंद्रित करिये।

अच्छी खबर यह है कि आप केवल एकमात्र ऐसे नहीं हैं जिनहें रिजेक्ट किया गया है – जैक मा, अब्दुल कलाम,माइकल जॉर्डन, वॉल्ट डिज़्नी और जे.के. रोलिंग जैसे लोग भी रिजेक्टेड लोगों की लिस्ट में आपके साथ शामिल हैं।

“कुछ साल पहले एक यूसीएलए सर्वेक्षण ने बताया कि औसत एक वर्ष का बच्चा नहीं शब्द को, दिन में 400 से अधिक बार सुनता है !”

हम असफल क्यों होते हैं?

हम असफल होते हैं क्योंकि हम हमेशा कुछ न कुछ सोचते रहते हैं। चिंता सिर्फ हमारा अतीत है। जब आप हमेशा सोच रहे होते हैं तब अतीत आपका भविष्य बन जाता है और आप वास्तव में कुछ नया नहीं कर पाते हैं, अगर आप इससे पहले असफल रहे, तो आप फिर असफल होगें इसकी संभावना बनी रहती है।

आपके सामने जो कुछ भी है उसे उठाइये, अपने हाथ में पकड़िये और बस इसे देखिये एक क्षण के लिए भूल जाइये कि आप कौन हैं, आप को आगे क्या करने की ज़रूरत है, इसके बारे में मत सोचिये, इसे लेबल न करिये, उससे न्याय मत करिये, बस देखिये,क्या आप कभी ऐसे देख सकते हैं ?

विज्ञान ने साबित कर दिया है कि जिस तरह से विजन काम करता है, उस तरह से हम चीजों को उनके वास्तविक रूप में नहीं देख पाते हैं। जब प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है तब यह आपकी आँखों में प्रतिबिंबित होती है, रेटिना पर इसकी उल्टी छवि बनती है, और फिर आपका मस्तिष्क वस्तु के बाहर एक समझदार तस्वीर बनाने की कोशिश करता है और हम वस्तु को उस रूप में देखते हैं।

यही कारण है कि हम असफल हो जाते हैं। क्योंकि हम चीजों को सही तरीके से देखते नहीं हैं, जिसके कारण भ्रम उत्पन्न होता है,हम भटकते हैं और फिर सफलता की उम्मीद न देखकर काम को अधूरा छोड़ देते हैं।

अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए, चीजों और व्यक्तियों को जिस तरह से वे हैं, उसी रूप में देखना सीखिये,अपनी तरफ से कुछ भी मत जोड़िये-घटाइये, कयोंकि चीजें जब अपने स्वाभाविक रूप में होती हैं तब सफलता सरल हो जाती है।

मतलबी मैं नहीं हूं बस दूर हो गया हूं…

मतलबी मैं नहीं हूं,

बस दूर हो गया हूं,

जरूरतें बदल गई हैं,

मैं मजबूर हो गया हूं।

हवा सी जिंदगी है,

पानी सा बह रहा हूं,

ऊंगलियां उठ रही हैं,

मैं मशहूर हो गया हूं।

परवाह नहीं है किसी को,

अहसासों की यहां पर,

ख़ुदगर्ज़ है ये दुनिया,

मैं मगरूर हो गया हूं।

चुपचाप चल रहा था,

ज़िदगी के सफ़र पर,

एक राह मुड़ गई थी,

मैं बदस्तूर हो गया हूं।

कुछ ख्वाहिशें हैं अधूरी,

कुछ काम हैं जरूरी,

तकलीफ़ों से गुज़र के,

उन्हें मैं मंजूर हो गया हूं।

लोगों ने कुछ कहा है,

हमने भी कुछ सुना है,

एक तेरे ही दर पे आकर,

मैं महफूज़ हो गया हूं…

(स्वलिखित)

अपना कहकर छीन लिया जो कभी था मेरे संग…

अपना कहकर छीन लिया,

जो कभी था मेरे संग,

तेरा भी मुझमें कुछ रह गया,

जब चढ़ा इश्क का रंग।

बन जाओ तुम हर ख्वाहिश मेरी,

बन जाऊं मैं तुम्हारी हर पसंद,

फिर तेरे संग उड़ जाऊं मैं,

जैसे हवा संग उड़े पतंग।

कुछ पा लिया,कुछ खो दिया

कुछ छूट गया बेरंग,

रूह से रूह जब जुड़ गई,

हर रंग हुआ नौरंग।

सूना-सूना सा जग मेरा,

फ़ीकी लगती है हर सुगंध,

मैं साया, तुम ज़िद मेरी

मैं निश्चय, तुम मेरी सौगंध।

ठहरे पानी जैसा इश्क मेरा,

तुम जल में उठती तरंग,

छू लिया तो हलचल मच गई,

जैसे नस-नस में उठे उमंग…

(स्वलिखित)

दो पल की ज़िंदगी है और अरमान बहुत हैं…

दो पल की ज़िंदगी है,

और अरमान बहुत हैं,

कहते वो कुछ नहीं हैं,

पर परेशान बहुत हैं।

छुपे-छुपे से हैं रहते,

दिखते कहीं नहीं हैं,

कहने को तो वो हैं मेरे,

पर हमसे अंजान बहुत हैं।

चेहरा हंस रहा है,

दिल में कसक है उठती,

जो होता नहीं, वो है दिखता,

और वो हैरान बहुत हैं।

चुप रहना भी हुनर है,

ख़ामोशी की भी नज़र है,

जल्दबाज़ है ये दुनिया,

और वो नादान बहुत हैं।

तन की बंदिशों से,

मन ने की है बगावत,

ज़माना कहता है इश्क जिसको,

किसी के लिए है वो इबादत।

ना उम्र की है सीमा,

ना मजहब ही कोई हद है,

ये इश्क का शहर है,

दूर अपना मुकाम बहुत है…

(स्वलिखित)

दो पल की ज़िंदगी है और अरमान बहुत हैं…

दो पल की ज़िंदगी है,

और अरमान बहुत हैं,

कहते वो कुछ नहीं हैं,

पर परेशान बहुत हैं।

छुपे-छुपे से हैं रहते,

दिखते कहीं नहीं हैं,

कहने को तो वो हैं मेरे,

पर हमसे अंजान बहुत हैं।

चेहरा हंस रहा है,

दिल में कसक है उठती,

जो होता नहीं, वो है दिखता,

और वो हैरान बहुत हैं।

चुप रहना भी हुनर है,

ख़ामोशी की भी नज़र है,

जल्दबाज़ है ये दुनिया,

और वो नादान बहुत हैं।

तन की बंदिशों से,

मन ने की है बगावत,

ज़माना कहता है इश्क जिसको,

किसी के लिए है वो इबादत।

ना उम्र की है सीमा,

ना मजहब ही कोई हद है,

ये इश्क का शहर है,

और दूर अपना मुकाम बहुत है…

(स्वलिखित)

टूटकर फिर से जुड़ना,जुड़कर फिर बिखरना…

टूटकर फिर से जुड़ना,

जुड़कर फिर बिखरना,

अखरता अब नहीं है,

यूं रोज़-रोज़ मरना।

राख हूं मैं बेशक,

हवा तेज़ चल रही है,

संग तेरे मैं उड़ रहा हूं,

कहीं नहीं है अब ठहरना।

बारिश की बूंद सा है,

ज़िदगी का सफर भी,

ख़ाक से ही मैं उठा हूं,

ख़ाक में ही फिर है मिलना।

कभी खुशी के हैं आंसू,

कभी ग़म की हंसी है,

धीमा सा ये ज़हर है,

और जल्दी हमें नहीं है।

पसंद तो बहुत है,

संग हमारा उन्हें भी,

कुछ मजबूरियां हमारी,

कुछ तुम्हारा यूं पलटना।

खो दोगे हमें भी,

देखो एक दिन तुम ,

सीखा तुमने बहुत है,

बस सीखा नहीं हमें परखना…

(स्वलिखित)

मशहूर होने का शौक नहीं है…

मशहूर होने का शौक नहीं है,

ख़ुद की ख़ुद से पहचान ही काफी है,

सपनो के पंख कटते कहाँ हैं,

उड़ने के लिए हौसलों की उड़ान ही काफी हैं।

तुम्हें जिंदगी की हर खुशी हो मुबारक,

मेरे लिए अंधेरों का आसमान ही काफी है,

नए ज़ख्म की जरूरत किसे अब यहां है,

मेरे लिए पुरानी चोटों के निशान ही काफी है।

यादें पुरानी चेहरे नए हैं,

जीने के लिए तेरी एक मुस्कान ही काफी है,

दिलों से खेलने की जरूरत नहीं है,

बर्बादियों के लिए ख़ामोशियों का इल्ज़ाम ही काफी है।

महख़ाने बेवजह बदनाम हो गए हैं,

ज़हर पीने को यार की कड़वी ज़ुबान ही काफी है,

दर-ब-दर भटकने की जरूरत नहीं है,

रोशनी के लिए कमरे में एक रोशनदान ही काफी है।

मँज़िले भी जिद्दी हैं,

रास्ते भी जिद्दी हैं,

मुश्किलों से पार पाने के लिए,

महबूब का मेहरबान होना ही काफी है।

आरजू के सहारे जिंदगी कट रही है

बेबसी में सब्र के इंम्तिहान ही काफी हैं

हर दफ़ा इत्तेफ़ाक की जरुरत नहीं है

बुलंदियां छूने के लिए अकेला इंसान ही काफी है…

(स्वलिखित)

उलझे हुए कुछ सपने हैं उलझी हुई कुछ ख्वाहिश हैं…

उलझे हुए कुछ सपने हैं,

उलझी हुई कुछ ख्वाहिश हैं,

दिल में गहरी तड़पन है,

कहीं दूर उनकी रिहाइश है।

उनके बिना मैं अधूरा हूं,

अधूरी जिंदगी की हर फरमाइश है,

इल्ज़ाम मुझ पर हजारो हैं,

बड़ी मुश्किल इश्क की आजमाइश है।

मैं तेरे मन की ख़ामोशी हूं,

तुम मेरे मन की हो आवाज़,

मैं तुम्हारी उलझी कहानी हूं,

मेरी कहानी की तुम हो अल्फाज़।

दूर तलक सुलगती हुई रेत है,

पानी की गहरी प्यास है,

दूर बहता कहीं एक दरिया है,

और साहिल मेरे पास है।

ये कैसी बेचैनी है,

कैसी ये साजिश है,

उलझन भी मीठी लगती है,

नए मौसम की पहली बारिश है।

मेरा मुझमें कुछ बचा नहीं,

सबकुछ नाम तेरे कर आया हूं,

बस जाओ मेरी अब रूह में तुम,

बस इतनी सी गुज़ारिश है…

(स्वलिखित)

कड़ाके की ठंड और सर्द ये हवाएं…

कड़ाके की ठंड,

और सर्द ये हवाएं,

तेरा हौले से मुस्कुराना,

और दूरियों की ये सजाएं।

शोला बनकर सुलग रहा हूं,

यादों में अब मैं तेरी,

तू मुझमें जल रही है,

कैसे आग ये बुझाएं।

ना वो कुछ कह सके थे,

ना हम कुछ कह सके हैं,

अभी अजनबी ही हम हैं,

और ख़ामोश हैं फिज़ाएं।

जाने किस राह चल पड़ा है,

दिल भी हमारा देखो,

बेख़बर हैं वो हमसे,

हाल-ए-दिल किसे सुनाएं।

ये दिल्लगी हमारी,

भारी है उनके दिल पर,

वो नज़रों से सब कह रहे हैं,

क़ातिल तेरी अदाएं।

आंखोंं में पढ़ रहे हैं,

वो मेरी हर तमन्ना,

जनवरी का ये महीना,

और मुकम्मल मेरी दुआएं…

(स्वलिखित)