जिसके मन में बुद्ध हैं…

buddha statue
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जिसके मन में बुद्ध हैं
वो कभी पाप नहीं करता
जिसका मन अशुद्ध है
वो गलतियों पर विचार नहीं करता

शास्ता रहमत ऐसी करो
मन के सब विकार मिट जाएँ
वासनाओं में छिपा काँटा
किसी का इंतज़ार नहीं करता

अंहकार जब मिटेगा
तब गलतियाँ दिखाई देंगी
प्रभू राह तुम दिखा दो
मैं चलने से इन्कार नहीं करता

जाने कब मिल जाए किसी को
किस मोड़ पे रोश्नी
सिर्फ किताबों को पढ़कर
कोई समझदार नहीं बनता

वैसे तो होते हैं
बातों के बहुत मतलब
जब भेदती हैं तेरी नज़रें
कोई अल्फाज़ नहीं मिलता

रहता है तेरा मालिक
साथ तेरे हमेशा
शर्तें तुम हटा लो
बुद्ध व्यापार नहीं करता…
© abhishek trehan

दिल में तेरे खोट है…

दिल में तेरे खोट है
ज़ुबां पे तेरी प्यार है
कैसे तेरा सजदा करूँ
ये इश्क नहीं व्यापार है

धोखे यूं ही मिलते नहीं
किया हवाओं पर ऐतबार है
दुनिया का यही उसूल है
मिलते सच को जख़्म हजार हैं

ये वक्त-वक्त की बात है
एक निशान दाग बन गया
वफ़ा का रंग सफेद है
रंग झूठ के बेशुमार हैं

किसी से क्या शिकवा करें
शिकायत ही दुआ हो गई
तुम पलकें झुका कर चल दिए
हवाएं भी धुआं हो गई

बस एक सादगी के सिवा
कुछ  और नहीं मेरे पास है
ये दुनिया बहुत रंगीन है
सिर्फ शून्य ही निर्विकार है

आधा फलक पर चाँद है
आधा ही सच दिख रहा
आधा ही तेरा इश्क था
हम तेरे शुक्रगुज़ार हैं…
© abhishek trehan

माँ…

mother and daughter on grass
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माँग लूँ मैं ख़ुदा से
हर बार यही दुआ मिले
हर बार वही गोद मिले
हर बार वही पनाह मिले

किसी को मिले खुशियों में हिस्सा
किसी को पूरा जहाँ मिले
मैं जब भी आऊँ दुनिया में दोबारा
मुझे फिर वही माँ मिले

रूह के रिश्ते हैं ये देखो
चाहने वाले भी तमाम मिले
जब भी चोट लगी थी दिल पे
माँ की आँखों में सिर्फ़ उसके निशाँ मिले

जब भी चलती है ग़म की आँधी
या ज़िदंगी में तूफां उठे
छा जाती है वो बनके बादल
हर बार मुझे महफूज़ मुकाम मिले

दुनिया में सबकुछ है बिकता
यहाँ हर मर्ज़ की दवा मिले
बेशकीमती हैं वो माँ के आँसू
जिसने मेरे हर गुनाह धुले

माँ है तो फिर है सबकुछ
फिर इस जहाँ में भले कुछ न मिले
तुम ढूँढ़ लेना अपनी जन्नत
मुझे हर जनम में सिर्फ वो माँ मिले…
© abhishek trehan