शुभ दीपावली

खुशियों से तो सब बोल रहे,

कभी दुखियारों से भी मिला करो,

महलों ने दरवाज़े खोल दिए,

माँ कुटिया पे भी कृपा करो।

कहाँ से लाएँ नैवेद्य वो,

क्या सजाएँ पूजा की थाली में,

रोटी के दो टुकड़े हैं,

माँ एक में खुश हो लिया करो।

बाहर फैला उजियारा है,

मन मेरा क्या ढूंढ़ रहा,

जो शब्दों में ना हो पाए बयाँ,

माँ मन को मेरे पढ़ा करो।

जैसे दीये-बाती का रिश्ता है,

मुझको भी वैसा बनना है,

कतरा-कतरा मैं जल जाऊँ,

माँ तुझमें ही फिर मिलना है।

चारों तरफ खुशियों का मौसम है,

हर तरफ झिलमिलाती दिवाली है,

जो महरूम है तेरी मेहर से,

माँ झोली उनकी भरा करो।

मुँडेर पर दीपक जला दिया,

रोश्नी खिड़की से आती है,

मैं काम किसी के आ जाऊँ,

माँ मेरी यही दिवाली है…

©abhishek trehan

जिक्र तेरा अपने लफ्ज़ों में हर बार करूँगा…

जिक्र तेरा अपने लफ्ज़ों में

हर बार करूँगा

कभी सुबह करूँगा

कभी शाम करूँगा

शौक तो नहीं है

जज़्बातों की नुमाईश का हमें

तुम्हें जो पसंद है

उसी जरिये से बात करूँगा

रूह तो रंगी थी

अब शब्दों को भी रंग लिया है

कभी ख्वाबों में भी मिले तो

इश्क बेशुमार करूँगा

सुकून सा मिलता है

तुम्हें सोचने से भी हमें

तुम्हें ही गँवाया था

तुम्हें ही आबाद करूँगा

जरूरी नहीं है इश्क मेरा

तुम्हें दिखाई दे

तुम हाथ दिल पे रखना

मैं आवाज करूँगा

आदत लगी है तुम्हारी

पता है ख़ुदा तुम नहीं हो

सलामत रहे दुनिया तुम्हारी

यही फ़रियाद करूँगा…

© abhishek trehan