कभी इधर चल दिए कभी उधर चल दिए

कभी इधर चल दिए,

कभी उधर चल दिए,

जिसने जिधर कहा,

हम उधर चल दिए।

अफ़सोस है मँज़िलें,

फिर भी रूठी ही रहीं,

मुसाफिरों की तरह हम भी,

फिर बेख़बर चल दिए।

कभी ख़ामोश तुम रही,

कभी चुप हम रहे,

साथ चलने की ज़िद में,

देखो हम किधर चल दिए।

ना तुम्हें हुई ख़बर,

ना हमें ही पता चला,

अंजाम से हो बेख़बर,

हम फिर बेअसर चल दिए।

दुनिया बुलाती भी रही,

दुनिया भुलाती भी रही,

बिना किसी के हुए हम,

फिर बेफ़िकर चल दिए।

ना तुम ही समझ सकी,

ना हम ही समझ सके,

बन के नासमझ दोनों,

फिर इधर-उधर चल दिए।

ये घर अब घर नहीं है…

ये घर अब घर नहीं है,

बस मकान है तुम्हारा,

वापस तुम मुझसे ले लो,

जो समान है तुम्हारा।

ख़ुद को खोकर भी तुझमें,

मुझे कहाँ तुम मिली हो,

शायद अब अलग-अलग हैं,

जो कभी मुकाम था हमारा।

रहते तो हम संग थे,

पर मिलते कभी नहीं थे,

कभी तुम गलत नहीं थे,

कभी हम सही नहीं थे।

जब-जब लगा तुम हो मेरी,

तुम हो गई पराई,

दूर मुझसे ऐसे हुई हो,

जैसे जिस्म से परछाई।

फिर एक वो दिन भी आया,

जब मुझे कर दिया पराया,

पल भर में बिखर गया वो,

जो कभी अरमान था हमारा।

अब रास्ते भी अलग हैं,

मँजिलें भी अब जुदा हैं

किस्मत ने भी लिखा था

शायद अंजाम यही हमारा…

कुछ जल गए कुछ बुझ गए

कुछ जल गए कुछ बुझ गए,

कुछ राख बनकर रह गए,

देखे थे तेरे संग जो सपने,

वो बस ख्वाब बनकर रह गए।

कुछ कह गए कुछ सह गए,

कुछ याद बनकर रह गए,

संग वक्त के कुछ जख्म भर गए,

कुछ बस दाग़ बनकर रह गए।

कभी आस में कभी काश में,

कभी अल्फाज़ बनकर रह गए,

ना तुमने कही ना हमने सुनी,

बस वो आवाज़ बनकर रह गए।

कभी धूप में कभी रेत में,

कभी तलाश बनकर रह गए,

ढूंढ़ते रहे तुम्हें हम दर-ब-दर,

और तुम प्यास बनकर रह गए।

कभी रस्म में कभी रिवाज़ में,

कभी कारोबार बनकर रह गए,

वक्त को इश्क पर तरजीह मिली,

और हम कर्ज़दार बनकर रह गए।

ग़ौर करो अगर तो हर चीज़ का है मतलब

ग़ौर करो अगर तो,

हर चीज़ का है मतलब,

ना समझो अगर तो,

हर चीज़ है फ़साना।

पुरानी होकर भी,

कभी बदलती नहीं हैं,

बातें कुछ नयी हैं,

मतलब है वही पुराना।

उठती है निगाह जिधर भी,

दिखता है एक साया,

मिलता है जो नहीं क्यों,

उसका है दिल दीवाना।

है रिवायत अजब इश्क की,

है अजीब ये फ़साना,

पाया नहीं है जिनको,

उन्हें खोने का है बहाना।

जब से चले गए हो,

जिंदगी ठहर गई है,

ना जीत का है मतलब,

ना हारने का है बहाना।

जीने को जी रहे हैं,

जिंदगी तेरे बिना भी,

सबकुछ सीख लिया है,

बस सीखा नहीं तुम्हें भुलाना।

जब साथ थे तुम मेरे तब धूप थी मुस्कुराती

जब साथ थे तुम मेरे,

तब धूप थी मुस्कुराती,

जब से तुम बदल गए हो,

तब से सुबह नहीं आती।

तेरा बिना भी मौसम,

हर साल बदल रहे हैं,

जब से तुम चले गए हो,

वो बरसात नहीं आती।

तुम्हारे बिना ये जीवन,

जैसे बेरंग पानी,

अगर कुछ मिला भी दूँ तो,

वो बात नहीं आती।

मोहब्बत के ये नियम,

सबके लिए अलग हैं,

कोई चैन से है सोता,

किसी को नींद नहीं आती।

अगर कभी मिले तो,

हाल ए दिल सुनाना,

ख़ामोशी समझा सके जो

वो किताब नहीं आती।

तेरी यादों ने कर दिया है,

बेहिसाब हमें तन्हा,

अब तो ख़ुद की महफ़िल भी,

हमें रास नहीं आती।

जानते हो सबकुछ पर अंजान बने हुए हो

जानते हो सबकुछ,

पर अंजान बने हुए हो,

तुम हो मन के मालिक,

पर गुलाम बने हुए हो।

चलते हो रोज़ सफ़र पर,

कहीं पहुँचते नहीं हो,

जिस रात की ना सुबह हो,

वो शाम बने हुए हो।

पैमानों की जरूरत,

अब किसे है यहाँ पर,

जिसका उतरता नहीं नशा हो,

वो नाम बने हुए हो।

जब करते हैं बातें ख़ुद से,

तब होता है जिक्र तुम्हारा,

जो मिलकर भी कहीं मिले ना,

वो मुकाम बने हुए हो।

शायद वक्त भी रोक लेते,

तुम्हारे लिए हम लेकिन,

जो कभी खुलती नहीं हो

वो दुकान बने हुए हो।

अगर कभी वक्त मिले तो

आईने में ख़ुद को निहारना

ख़ुद से ही जो बेख़बर हो

वो अंजाम बने हुए हो।

वो भी एक दौर था ये भी एक दौर है

वो भी एक दौर था,

ये भी एक दौर है,

कभी खुशियाँ बेशुमार थीं,

आज सन्नाटे का शोर है।

शह-मात के खेल में,

कहाँ कुछ हासिल हुआ,

कल मेरा वक्त पे जोर था,

आज वक्त का मुझपे जोर है।

आँखों में आँसू लिए,

कोई है मुझको देखता,

क्या मैं उसका गुनाहग़ार हूँ,

या फिर मुझसे जुड़ी उसकी डोर है।

नज़ारे भी बदल गए,

जब पलट कर चली हवा,

कल आँधियों का दौर था,

आज बारिशों का दौर है।

जो मेरा नसीब नहीं,

क्यों मैं हूँ उसको ढूंढ़ता,

क्या चाहतें बेशुमार हैं,

या फिर मेरी मँज़िलें कहीं और हैं।

सपनों की है ये दुनिया मैं मुसाफ़िर हूँ यहाँ पर

सपनों की है ये दुनिया

मैं मुसाफ़िर हूँ यहाँ पर

मिलता वो नहीं है

दिखता है जो यहाँ पर

चेहरों के पीछे चेहरे

अक्सर यहाँ है मिलते

दिल में कुछ है होता

होता है कुछ जुबां पर

आँखों से जो है दिखता

सिर्फ वो ही सच नहीं है

कपड़ों जैसे रिश्ते

रोज़ बदलते हैं यहाँ पर

झूठ का है फ़साना

हकीक़त सिमट रही है

दौलत का है बोलबाला

यहाँ हर चीज़ बिक रही है

पल भर का है साथ हमारा

दुनिया बदल रही है

कहीं आग जल रही है

कहीं राख उड़ रही है

सिर्फ पाना ही कहाँ है

खोना भी है यहीं पर

पाने से पहले खोना

जरूरी शर्त है यहाँ पर ।

कभी जिंदगी मिले तो उससे ये कहूंगा

कभी जिंदगी मिले तो ,
उससे ये कहूंगा,
मुझे कोरा फिर कर दो ,
नये जवाब फिर लिखू़ंगा।

जीवन की उलझनों ,
और कशमकश में,
कुछ तुम रंग भर दो ,
कुछ रंग मैं भरूंगा।

मुश्किलों से मिली हो,
ज़रा थोड़ी देर ठहरो,
आगाज़ तुम कर दो,
अंजाम मैं बनूंगा।

जो मिलें ना लफ्ज़ तुमको,
तो ख़ामोश ही रहना,
आँखों से तुम कह दो,
इशारों को मै पढूंगा।

ये आरज़ू है मेरी,
तुम्हें फिर से समझ लूँ,
रास्ता तुम दिखा दो,
उन पर मैं चलूंगा।

मिले साथ तुम्हारा,
मुझे हर जनम में,
हाथों को तुम उठा लो,
दुआ मैं करूंगा।