चल पड़े हैं हम आज फिर मँजिलों की तलाश में

चल पड़े हैं हम आज फिर

मँजिलों की तलाश में

जिंदगी भी कटती रही है

कभी आस कभी काश में

एक बार जो ग़ुम हुए

फिर कहीं मिले नहीं

ढूंढ़ता मै तुम्हें रहा

कभी शतरंज कभी ताश में

भागता तो रोज़ हूँ

पर कहीं पहुँचता नहीं

जैसे पंछी कोई भटक गया हो

रास्ता आकाश में

हवाओं सी फितरत है तेरी

कहाँ तू है ठहरती

बादलों सा संग उड़ रहा हूं

कभी धूप कभी रात में

मिले तुम तो ऐसा लगा

जैसे दुआ कोई कुबूल हुई

लौट आई हों साँसें फिर

जैसे जिंदगी की तलाश में

बहुत देर हो गई

कहीं तुम मिले नहीं

ढूंढ़ती हैं नज़रें तुम्हें

कभी दूर कभी पास में।

बड़ा ख़ूबसूरत है ये पल

बड़ा ख़ूबसूरत है पल

बड़ी ख़ूबसूरत ये कहानी है

हो सके तो कुछ देर संग मेरे तुम चलो

छूट जाता है साथ रह जाती बस निशानी है

कभी ढूंढ़ लेना तुम यादों में अपनी

आईना नया है शक्लें पुरानी हैं

मिल जाऊँ अगर तो इश्क बचा है

ना मिलूं तो समझो ख़त्म कहानी है

कोई ग़म नहीं कोई समझे न समझे

अगर तुम भी न समझो तो ये बेमानी हैं

दिल को है तेरी चाहत का भरोसा

जिस्म से परे ये रिश्ता रूहानी है

तेरे जिक्र ने बढ़ाया है मुश्किलों को मेरी

अपनी हदों को न समझूं तो मेरी ये नादानी है

इश्क में भी तेरे अजब सी कशिश है

समझो तो शराब है ना समझो तो पानी है।

जीवन का खेल चलता रहे

जीवन का खेल चलता रहे
बस बदल जाएं किरदार
अंजाम तो सबका एक है
हैं जीने की वजह हज़ार

जीवन का दरिया बह रहा
तेरा संग है जैसे पतवार
साथ मिले तो तर जाऊँ मैं
बिन तेरे मैं बेबस और लाचार

बना है ये जिस्म ख़ाक से
हो जाएगा ख़ाक ही हर बार
जीवन की है कहानी यही
हर कहानी का यही है सार

तुझसे ही जीवन के सब रंग हैं
तुझसे ही हैं जीवन का श्रृंगार
तुझसे ही मेरा वजूद है
तेरा ही हूं मैं कर्ज़दार।

ये हादसा भी होना था

नहीं पता था जिंदगी में,

ये हादसा भी होना था,

खुद को खोकर पाया था जिसको,

उसे पाकर फिर से खोना था।

शायद है रेखाओं का खेल यही,

जो नहीं लिखा था वो ही होना था,

वो मंजूर थी किसी की किस्मत को,

किसी और का उसको होना था।

जब टूटना ही फितरत है ख्वाबों की,

कोई सपना फिर क्यों संजोना था,

जिस रात की फिर न हो सहर,

उस नींद में फिर से सोना था।

समझ गया इश्क का अंजाम यही,

संग जिस्म तो है पर जान नहीं,

गँवाकर सब कुछ बेहोशी में,

अब होश को फिर से खोना था।

हर अधूरी पहल में छिपा है कोई मुकर्रर अंजाम भी

हर अधूरी पहल में छिपा है कोई मुकर्रर अंजाम भी

शर्त है पहले बेशुमार कोशिशें तो करना सीख लो

मिल जाएगा अधूरे सफ़र को कोई मुकम्मल मुक़ाम भी

शर्त है पहले राह की दुश्वारियाँ झेलना तो सीख लो।

पूरी होंगी वो हसरतें भी जो बादलों में उड़ने की हैं

शर्त है पहले हवाओं का रूख़ समझना तो सीख लो

चुन लेना वो नायाब मोती जो कहीं सागर में है छिपा

शर्त है पहले पानी में गहरे उतरना तो सीख लो।

दिल की गहराईयों में जैसे हो कोई नग़मा छिपा

शर्त है गाने से पहले गुनगुनाना तो सीख लो,

मिल जाएगा वो भी कभी जिसकी तुम्हें तालाश है

शर्त है दूसरों से पहले ख़ुद को पाना तो सीख लो।

जिंदगी के तजुर्बों में मिलेंगे कुछ सवालों के जवाब भी

शर्त है तजुर्बों से पहले ठोकरें खाना तो सीख लो

बातों के मकसद में छिपा है बातों का अंजाम भी

शर्त है अंजाम से पहले बातों को परखना तो सीख लो।

जिंदगी चलती रही लोग मिलते रहे

जिंदगी चलती रही लोग मिलते रहे,

ठोकरें मिलती रहीं सपने बदलते रहे,

जो चला गया वो फिर लौटा कहाँ,

तारा कोई टूट गया लोग आसमान देखते रहे।

भागते बचपन में भी थे भागते हैं आज भी,

जरूरतें बदलती रहीं नये रास्तों पर हम चलते रहे,

गुज़ारने को गुज़ार रहे हैं जिंदगी तेरे बग़ैर भी,

जैसे ख्वाब कोई टूट गया और आँखें हम मलते रहे।

मिलता नहीं है जो क्यों है उसकी तलाश सी,

दिन गुजरता है बेवजह रातें भी हैं उदास सी,

कहती है जिंदगी ख़ुद को जऱा सम्हाल लो,

जवाब कभी मिले नहीं हम सवाल ही बदलते रहे।

तारीखें भी बदल गईं और बदल गए हालात भी,

मुश्किलें सिखाती रहीं सबक नए मिलते रहे,

सुना था भर जाते हैं वक्त के साथ पुराने ज़ख्म भी,

चोटें पुरानी छिप गईं निशान नए मिलते रहे।

कुछ तेरे इश्क ने हमको बदल दिया

कुछ तेरे इश्क ने हमको बदल दिया

कुछ खुद से ही बदलने का इरादा है

मुड़कर फिर अब ना देखूं तुझे

ख़ुद से किया हमने ये वादा है।

कभी बेरुख़ी ने तेरी तोड़ दिया,

कभी बेफिक्री से तूने मुँह मोड़ लिया,

टूटा ऐसे कि फिर जुड़ न सका,

कितना कच्चा तेरे-मेरे रिश्तों का धागा है।

अपना तो तुम कभी समझ न सके,

तुम्हे पाया कम खोया ज्यादा है,

गँवाकर अपना सबकुछ बेहोशी में,

गहरी नींद से अब कोई जागा है।

शायद था विधि का विधान यही,

अब क्या पूरा क्या आधा है,

जो नहीं लिखा था वो नहीं मिला,

जीवन का कोरा कागज़ अब भी सादा है।

तेरा साथ तो बस एक वादा है

तेरा साथ तो बस एक वादा है

कभी पूरा कभी आधा है

कभी ना मिले तो मीरा है

मिल जाए कभी तो राधा है।

पाना ही कहाँ बस मकसद है

कभी खोने का मज़ा भी ज्यादा है

ये प्रीत है शतरंज का खेल नहीं,

यहां ना वज़ीर है कोई, ना कोई प्यादा है।

लाख चाहा तुझे ना याद करूं,

पर जुड़ा तुझसे कोई धागा है,

मुझको मुझमें ही जगह मिलती नहीं

अब तुझमें ही रहने का इरादा है।

एक परवाह बतानी पड़ती है,

रिश्तों का यही तगादा है

ना छू ही सकूं, ना पा ही सकूं

कुछ रिश्तों की यही मर्यादा है।

जिंदगी एक कहानी है

जिंदगी एक कहानी है,

मैं हूं उसका एक किरदार,

मेरा मकसद तो एक है,

जीवन के हैं रंग हजार।

मुझसे वो ऐसे गुज़र रहा,

जैसे किरनें निकले शीशे के पार,

प्रेम की कोई सीमा नहीं,

हर देश चले इसका व्यापार।

मन ही मन को बाँध रहा,

मन में ही करूँ मैं दीदार,

तेरा जादू सिर चढ़ के बोल रहा,

तेरे ही नशे का हूं मैं तलबग़ार।

भेज तू रंग अपनी पसंद का,

हो जाऊँ मैं उसमें सरोबार,

जो उतरा तुझमें वो डूब गया,

जो डूबा वो हो गया पार।

ना रोको मुझे कुछ कहने दो

ना रोको मुझे कुछ कहने दो,

आँखों से पानी बहने दो,

लफ्ज़ों से जो ना हो पाए बयां,

बात वो बाकी रहने दो।

कुछ देर खलेगी उनकी कमी,

फिर आ जाएंगी यादें बन के नमी,

जो नींद ना आए रातों को,

बनके आँसू यादों को बहने दो।

हर लम्हा तेरा पैग़ाम मिला,

ना तू ही रुकी ना मैं ही चला,

अंजाम की जिसको हो ना ख़बर,

मुझे वो मंज़िल बनकर रहने दो।

आँखों को तबाही दिखती नहीं,

इस इश्क की दवाई बिकती नहीं,

खोकर सबकुछ बेहोशी में,

अब होश में मुझको रहने दो।

ना रोको मुझे कुछ कहने दो,

आँखों से पानी बहने दो…