जो सच अक्सर हम देख नहीं पाते हैं

पवन के पिता का देहांत हुए कई वर्ष गुजर चुके थे। उसकी मां राधा लोगों के घरों में काम करके किसी तरह पवन की पढ़ाई का खर्च उठा रही थी। राधा का एक ही सपना था कि पवन पढ लिख कर अच्छा इंसान बने। पर स्कूल से प्रतिदिन आने वाली शिकायतों ने राधा को विचलित कर दिया था।

आज पवन फिर गंदी ड्रेस में देरी से स्कूल पहुंचा था। यह प्रतिदिन का क्रम बन गया था। वह रोज गंदे कपड़ों में देरी से स्कूल पहुंचता था और इस कारण टीचर द्वारा उसे रोज सजा मिलती थी। उसकी इस आदत के बारे में कई बार उसके घर में भी शिकायत की गई थी और टीचर ने कई बार बार उसे समझाया भी था पर पवन न जाने किस मिट्टी का बना हुआ था कि उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं पड़ता था।

राधा को लगता था कि पवन रोज स्कूल देर से पहुंचता है और रोज घर भी देर से आता है हो न हो पवन अवश्य ही रास्ते में खेल-कूद में लग जाता है और इसी वजह से उसकी ड्रेस भी गन्दी हो जाती है। उसने पवन को हर तरह से समझाया था पर पवन था कि उस पर इन बातों का कुछ भी असर नहीं पड़ रहा था।

समय पंख लगा कर उड़ रहा था। एक दिन सुबह के समय पवन के क्लास टीचर सब्जी लेने के लिए थोक मंडी गए हुए थे। अचानक उनकी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना स्कूल में उनसे मार खाता था। वह देख रहे थे कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और बड़े दुकानदार जब अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो कुछ सब्जियां ज़मीन पर गिर जाती थीं जिन्हें वह बच्चा फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता था। यह बच्चा पवन था।

यह नज़ारा देख कर मास्टर जी कुछ परेशानी में पड़ गए वह सोच रहे थे कि ये माजरा क्या है, भला पवन क्यों गिरी हुई सब्जियों को इकट्ठा करके झोली में भर रहा है? वे पवन का चोरी चोरी पीछा करने लगे। उन्होंने देखा कि जब पवन की झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह उसे ले जाकर मुख्य सड़क के किनारे बैठ कर ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा सब्जी बेचने के लिए लोगों को पुकारने लगा । पवन के मुंह पर सब्जियों की मिट्टी लग गई थी और उसकी ड्रेस भी धूल से गन्दी हो गई थी। मास्टर जी ने देखा पवन की आंखों नम थीं, ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में वे पहली बार देख रहा थे ।

तभी कुछ एेसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। अचानक एक आदमी जिसकी दुकान के सामने पवन ने अपनी नन्ही सी दुकान लगा रखी थी उठकर पवन के पास आया उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही सी दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाहों से पकड़ कर पवन को भी जोर से धक्का दे दिया।

पवन की आखों में आंसू आ गए उसने चुपचाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा किया और थोड़ी देर बाद अपनी सब्जी लिए एक दूसरी दुकान के सामने सहमे मन के साथ खड़ा हो गया। पवन के पास थोड़ी सी सब्ज़ी थी और कीमत बाकी दुकानों से कम थी इसलिए जल्द ही बिक्री हो गयी, पवन उठा और बाज़ार में एक कपड़े की सिलाई वाली दुकान में दाखिल हुआ उसने दुकानदार को कुछ पैसे दिए और फिर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और स्कूल की तरफ चल पड़ा।

अगली सुबह पवन के क्लास टीचर पवन के घर पहुंचे पवन घर से निकल गया था और घर पर उसकी माँ ही थीं पवन के टीचर को देखकर राधा थोड़ा चौंक गयीं उसे लगा आज फिर पवन की शिकायत करने उसके घर आये हैं। राधा को कुछ कहने का बिना कोई मौका दिये मास्टर जी बोल पड़े बहनजी आप मेरे साथ चलो मै आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल देर से क्यों जाता है।

राधा तुरंत मास्टर जी के साथ चल पड़ी और कहने लगी आज इस लड़के की खैर नहीं मैं उसे छोडूंगी नहीं आज,मास्टर जी राधा के साथ मंडी पहुंच गए और वे लोग पवन की गतिविधियों को चुपचाप छुप कर देखने लगे। आज भी पवन लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े, और आखिरी में पवन अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल गया। पवन ने दुकानदार को पैसे दिए और आज दुकानदार उसे एक लेडीज सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट लेलो,उसने सूट को लेकर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया।

आज भी वह एक घंटा देर से स्कूल पहुचा था, वह सीधा क्लास टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रखकर मार खाने के लिए आगे बढ़ा दिए, टीचर कुर्सी से उठे और फौरन उसको को गले से लगाकर जोर से रोने लगे अचानक पवन की नज़र उसकी माँ पर पड़ी जो क्लासरूम के एक कोने में खड़ी होकर लगातार रो रही थी।

टीचर ने अपने आप को किसी तरह संभाला और पवन से पूछा कि तुम्हारे स्कूल बैग में जो सूट है वह किसके लिए है?

अब रोने की बारी पवन की थी उसने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ बड़े लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं उसके पास अपने शरीर को पूरी तरह से ढांपने वाले कोई कपड़े भी नहीं हैं और मेरी माँ के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वह नया सूट खरीद सके इसीलिए मैंने अपने पैसों से माँ के लिए यह सूट खरीदा है।

राधा से जब रहा न गया तो उसने पवन को खींचकर सीने से लगा लिया और जार जार रोने लगी मां को रोते हुए देख पवन अपने छोटे -छोटे हाथों से मां के आंसू पोछते हुए कहने लगा माँ तुम रो मत अब तुम्हारा बेटा बड़ा हो गया है। जाड़े के दिन थे और खिड़की के बाहर सूरज ढलने लगा था, दूसरी क्लास के टीचर और बच्चे भी अब कमरे में आ चुके थे। सभी की आखें नम थीं और हर कोई निशब्द खड़ा था, आज शब्दों की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि आसूं आज संवेदनाओं को शब्दों से भी बेहतर व्यक्त कर रहे थे।

शिकायत

बहुत से लोगों को अपने जीवन से शिकायत रहती है कि जीवन में उन्हें जो कुछ मिला है वह कितना अनुचित और अपर्याप्त है। जीवन अनुचित है इसके बारे में तो लोग काफी कुछ कहते हैं पर कुछ चीजें जो उन्हें सिर्फ खुशकिस्मती से मिल जाती है उस बारे में कुछ कहना तो दूर सोचते तक नहीं हैं।

ऐसे बहुत सारे उम्मीदवार हैं जो मुझे पता है कि तुम्हारे मुकाबले ज्यादा स्मार्ट और अधिक योग्य हैं। तुमको यहाँ नहीं होना चाहिए था मेरे बैच मेट्स को तुम जैसे लोगों की तुलना में यहां होना चाहिए था। तुम्हारे जैसे लोग आते हैं और इस संस्थान की प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं। तुमको पता होना चाहिए कि वे तुमको यहां सिर्फ विविधता के लिए लाए हैं और आप वास्तव में इसके लायक नहीं हैं।

कुछ ऐसे ही शब्दों से अमित का स्वागत देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट कालेज में हुआ था उसकी गलती बस इतनी ही थी कि वह छोटे से शहर से था और उसने साधारण से कालेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था।

यह सुनने के बाद अमित की प्रारंभिक प्रतिक्रिया क्रोध मिश्रित सदमा था फिर वह उदास हो गया उसे लगने लगा कि वह सही था। और फिर अमित के दिमाग में अचनाक कुछ क्लिक किया और वह निश्चिंत औऱ शांत हो गया।

कभी-कभी जीवन में आप भाग्यशाली होते हैं और अच्छे भाग्य से उन अवसरों को पा जाते हैं जिनके कि आप बिल्कुल हकदार नहीं हैं। जो मिला है उसेे गले लगाइये उनमें और चुनौतियों से दूर मत भागिये।

हममें से कुछ लोग केयरिंग और देखभाल करने वाले माता-पिता के यहां पैदा होते हैं जबकि हजारों लोग अनाथ होते हैं।

हममें से कुछ लोग जीवन भर के लिए दोस्त बनाते हैं जबकि लाखों लोग अकेले रहते हैं और अकेले मर जाते हैं।

हममें से कुछ लोग जीवन में प्यार को पाते हैं जबकि हजारों का दिल टूट जाते हैं।

हम में से कुछ को आज भरपेट खाना नसीब होगा जबकि लाखों लोगों आज भूखे ही सो जाएंगे।

हममें से कुछ उस सफलता को प्राप्त करेंगे जिसे वे शायद डिजर्व नहीं करते हैं जबकि हजारों लायक पीछे छूट जाएंगे।

हम में से कुछ जीवन से खुश और संतुष्ट रहेंगे जबकि अधिकांश दुखी और निराश ही रह जाएंगे।

निशब्द

एक छोटी लड़की अपने पिता के साथ मंदिर गयी थी। तभी मंदिर के प्रवेश द्वार पर उसने शेर की प्रतिमा को देखा उस पत्थर के शेर को देखकर वो छोटी सी बच्ची डर गयी और रोते हुए कहने लगी पापा जल्दी से यहां से चलो नहीं तो ये शेर हमें मारकर खा जायेगा। उसके पिता ने बच्ची को गोद में उठा लिया और उसे समझाते हुए कहने लगे मुन्नी डरो नहीं ये शेर तो पत्थर का है ये हमारा कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा।

मंदिर में मूर्ति के दर्शन के बाद वे दोनों बाहर आ गये। मंदिर के बाहर एक अपाहिज बैठा हुआ था उसके साथ एक छोटा लड़का भी था वे मंदिर के बाहर आने वाले हर व्यक्ति से कुछ मांग रहे थे और मिलने वाले पैसों और प्रसाद को अलग – अलग थैलों में डाल रहे थे।

जब पिता और पुत्री उस अपाहिज व्यक्ति के पास से गुजरे तो उसने अपना हाथ आगे कर दिया पिता ने अनमने भाव से पांच रूपये का सिक्का निकाला और उस अपाहिज के पास फेंक दिया तभी वो छोटा सा लड़का दौड़कर थैला लेकर आया और इशारे से थैले में प्रसाद डालने के लिए आग्रह करने लगा। पिता ने बच्ची को गोद में उठाया और उस लड़के को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए। ये शहर के प्रतिष्ठित वकील सुधीर चक्रवर्ती और उनकी बेटी पालकी थे।

सुधीर अभी पार्किंग में खड़ी हुई अपनी गाड़ी के पास पहुंचे ही थे कि न जाने कहां से वही लड़का दौड़ता हुआ आया और उनका हाथ पकड़ कर खींचने लगा सुधीर को लगा कि वह उनसे प्रसाद देने की जिद कर रहा है उन्हें लड़के का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और उन्होंने को बिना कोई मौका दिये अपना हाथ झटके के साथ छुड़ाया और लड़के के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया।

सुधीर के इस व्यवहार से हतप्रभ वह लड़का वहीं जमीन पर गिर पड़ा उसकी आँखों में आँसू आ गए । सुधीर ने देखा कि वह अपाहिज भिखारी दूर से ही उन्हें रूकने का इशारा करते हुए जमीन पर घिसटते हुए तेजी से उनकी तरफ चला आ रहा है। अब तक थोड़ी भीड़ भी तमाशा देखने के लिए जुट गई थी। सुधीर को महसूस हुआ कि बात बढ़ गई है और उन्होंने सौ रुपए का नोट उसे देने के लिए निकाल लिया वह लोगों से पैसा लूटने की इन लोगों की इस नई चाल को समझ चुके थे।

वह बूढा अपाहिज भिखारी सुधीर के पास आकर हाथ जोड़कर कहने लगा बाबूजी लगता है कि इस लड़के से कोई गलती हो गई है इसे माफ कर दीजिए, यह लड़का बोल नहीं सकता है। इसे मैंने ही आपको बुलाने के लिए भेजा था दरअसल आपकी बिटिया की चांदी की पायल मंदिर में गिर गई थी जिसे यह बच्चा उठाकर मेरे पास ले आया उसे वापस करने के लिए ही इसे मैंने आपको बुलाने के लिए भेजा था।

सुधीर अपने बिस्तर पर लेटे हुए करवटें बदल रहे थे उन्हें आज नींद नहीं आ रही थी रह रह कर उस अपाहिज भिखारी और उसके गूँगे लड़के का चेहरा उनकी आखों के सामने आ जाता था। सुधीर ने देखा कि पालकी भी अभी जाग रही है उन्होंने उसे अपने पास बुलाया और प्यार से पूछा बिटिया रानी ये बताओ कि मंदिर में तुमने आज भगवान से क्या माँगा? पालकी ने कहा कुछ नहीं मांगा क्योंकि शेर की प्रतिमा की तरह ही मंदिर में भगवान भी पत्थर के थे।

सुधीर चुपचाप उठे और अपनी डायरी में आज की तारीख डालकर लिखने लगे आज मैं अपनी बेटी के उत्तर के सामने निशब्द और निरूउत्तर हूं। मैं आज तक ईश्वर को मंदिर में पत्थरों में खोज रहा था पर आज पता चला कि वो वहीं मंदिर के बाहर इंसानों में इंसानियत के रूप में मौजूद था जिसे पहचानने में मुझसे गलती हो गई थी।

दुनिया में कुछ सबसे आसान काम क्या हैं?

1- खुद की निजी परेशानियों पर ध्यान ना देकर अपनी कमियों का कुसूरवार दूसरों को ठहराना।

2- मोबाइल पर दिन भर बेवजह व्यस्त रहना और बिना मांगे दूसरों को मुफ्त में सलाह देते रहना।

3- माता -पिता के द्वारा दी गयीं सुख सुविधाओं का उपभोग करना और स्वयं के कंधों पर बोझ आने पर जिम्मेदारियों से भागना।

4- अपनी प्रशंसा स्वयं करना और दूसरों के कार्यों में हमेशा गलतियों को निकालना।

5- बात- बात पर झूठ बोलना और कार्य न करने के लिए लिये बहाने बनाना।

6- पहली मुलाकात के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए धारणा बना लेना और एक तरफ़ा प्रेम में पड़कर खुद को बर्बाद कर लेना।

7- किये हुए वादे तोड़ देना और अपनी गलतियों के लिए किसी और को ज़िम्मेदार ठहराकर कहीं का गुस्सा कहीं और उतारना।

8- बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे बड़ी आसानी से दूसरों को अपने आइने से तोल लेना और उसी हिसाब से दूसरों को उपदेश देते रहना।

9- नियमों को तोड़ना, चलता है कहकर चुप हो जाना और हर काम के लिए सरकार को दोष देना।

10- लोगों को नीचा दिखाने हेतु, उनके आत्मविश्वास पर हमला करना, बेवजह उन्हें कटु शब्दों से अपमानित करना।

11- किसी को गलत राय देकर दूसरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करना।

गुस्से को कम करने के लिये क्या किया जा सकता है?

क्रोध में आने पर किसी को न तो फोन करें और न ही किसी को मैसेज भेजें। इस दौरान आपकी नकारात्मक भावनाएं दिमाग पर हावी होती हैं। ऐसे में आप अच्छे शब्दों के बारे में सोच नहीं सकते हैं।

क्रोध में आने पर किसी भी प्रकार की बहस करने से बचें, क्योंकि क्रोध के दौरान बहस करने से आपके सामने कुछ ऐसी बातें आ सकती हैं, जिनके कारण आप हिंसक व्यवहार भी कर सकते हैं।

अपनी भावनाओं को समझने का प्रयास करिए आप किन बातों से भयभीत हैं? उन कारणों को व्यवाहारिक व सकारात्मक दृष्टि से समझने का प्रयास करिए।

मनोचिकित्सकों के अनुसार परेशान शख्स के अधिकांश भय काल्पनिक होते हैं। यदि आप उन भयों से रूबरू होने का प्रयास करते हैं तो काफी हद तक आपका भय जाता रहता है।

भावनात्मक दुखों को भुलाने के लिए किसी भी तरह के नशे का सहारा न लें। याद रखें ऐसे पदार्थ एक तरह का छलावा हैं। इनका सेवन दुख दूर करने के बजाय स्वास्थ्य बिगड़ता है एवं समस्या को और अधिक उलझाता है।

यदि आप आस्तिक हैं तो अपने आराध्य को याद करें। इससे आपके क्रोध के ठंडे बस्ते में जाने की संभावना बढ़ जाती है।

कारणों पर भी ध्यान देने का प्रयास करिए, जिनसे आप प्रसन्न होते हैं। इसी तरह जिन बातों से आप दुखी होते हैं, उन कारणों को भी समझने का प्रयास करिए।

अपने प्रति ईमानदार रहिये। सच से मुंह मत मोड़िए। यदि किसी बात को लेकर आप असमंजस में हैं तो इस स्थिति में अपने अंतर्मन की पुकार सुनने की कोशिश कीजिए।

अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिए। संतुलित पोषक आहार ग्रहण करिये। समय पर सोएं और जागें। नियमित रूप से व्यायाम करिये। सेहत अच्छी रहने से आप हरेक कार्य को आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं।

जिन कार्यों में आपकी दिलचस्पी है, उन्हें अंजाम दीजिए। व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर अपने शौक के लिए भी वक्त निकालना सीखिये।

पर्यावरण से छेड़खानी भारी पड़ेगी

जाने-माने साइंटिस्ट और अंतरिक्ष विज्ञानी स्टीफन हाकिंग ने चेतावनी दी थी कि साल 2100 के अंत तक धरती पर इंसानों के लिए कई मुश्किलें खड़ी होंगी। धरती पर जीवन मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में इंसान को जीवन की संभावनाओं को तलाशने के लिए दूसरे ग्रहों का रूख करना होगा।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यदि तापमान में 1.5 डिग्री सेंटीग्रेट तक इजाफा होता है तो इसके घातक नतीजे होंगे। इससे मौसम चक्र प्रभावित होगा जिससे सूखा, बाढ़, चक्र वात आदि का खतरा बढ़ेगा। यदि तापमान दो डिग्री सेंटीग्रेट तक बढ़ा तो हालात और विनाशकारी होंगे। चिंता की बात यह कि ऐसे हालात दुनिया भर में दिखाई देने लगे हैं।

ग्लोबल वार्मिंग का असर दुनिया के मौसम पर आंशिक रुप से दिखाई देने भी लगा है। कुछ देशों में बेमौसम बरसात के कारण बाढ़ जैसी स्थिति है तो कहीं सामान्य से कम बरसात के कारण सूखे जैसी स्थिति है। पिछले कुछ वर्षों में पहाड़ी क्षेत्रों में अत्याधिक बर्फबारी हो रही है तो वहींं ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ तेजी से पिघल रही है।

ग्लोबल वर्मिग की वजह से बढ़ते तापमान के कारण पूरी दुनिया में ग्लेशियरों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। ग्लेशियर नदी में पानी की आपूर्ति करने के सबसे बड़े स्रोत होते हैं। जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक दुष्प्रभाव हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों पर पड़ रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से जहां उत्तरी भारत के अधिकांश शहरों का पारा मई-जून में ही 50 °C को छू रहा है जिसका असर मनुष्यों के साथ पशु पक्षियों और जानवरों पर पड़ रहा है वहीं खरीफ की फसलों पर भी खतरा मंडरा है। इस साल मौसम विभाग ने समान्य से कम मानूसन की संभावना जताई है। वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों की बर्फ पिघलने से समुद्र तल तेजी से उठ रहा है जो तटीय शहरों के साथ गंभीर पर्यावरण अंसतुलन पैदा कर रहा है।

ग्लोबल वार्मिग को रोकने के लिए 197 देशों ने पेरिस समझौता किया था। समझौते के तहत 2100 तक पृथ्वी की सतह का तापमान 1.5 डिग्री सेंटीग्रेट से अधिक नहीं बढ़ने देने का संकल्प लिया गया था लेकिन, अमेरिका और चीन की अड़ंगेबाजी के कारण पूरी दुनिया को ग्लोबल वर्मिग के दुष्प्रभावों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अमेरिका और चीन मिलकर विश्व का 40 फीसद ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं।

प्रकृति के बिना हमारा कोई अस्तित्‍व नहीं है। सब कुछ हमें प्रकृति से ही मिलता है। शायद इसीलिए प्रकृति को कुछ लोग ईश्‍वर के रूप में भी देखते हैं। प्रकृति स्वयंभू है, सनातन है, शाश्वत है, मनुष्य इस प्रकृति का अंग है। प्रकृति सम्मत विकास ही मानव संस्कृति है। हमने शायद इस शाश्‍वत सत्‍य को भुला दिया है, जिसके परिणाम हमारे सामने आ रहे हैं।

जो था ही नहीं उसको कहीं ढूंढ़ना था

जो था ही नहीं उसको कहीं ढूंढ़ना था,
दरकते हुए रिश्तों में यकीन ढूढ़ना था,
गुजरते हुए लम्हों में कहीं दिन ढल न जाए,
रात होने से पहले बहाना कोई हसीन ढूढ़ना था।

हाथों में खंजर लिए लोग आज छांव ढूंढते हैं,
शहर बसाकर गांव में सुकून ढूंढना था,
पत्थर के शहर में कच्चे मकान कहां हैं,
ज़हर में जीने का जुनून  ढूंढ़ना था।

उनके इश्क करने का अंदाज भी जुदा था,
खुद को खोना यहीं था और कहीं ढूंढ़ना था,
किसी बच्चे के मानिंद दिल ज़िद पे अड़ा था,
जो था ही नहीं उसको वहीं ढूंढ़ना था।