सही निर्णय

निर्णय लेने से कोई बच नहीं सकता। जब तक सांसें चलेगी फैसले लेने होंगे। निर्णय या डिसिजन जिदंगी के आधार हैं। हम आज जो भी हैं अपने बीते हुए कल में लिए गए फैसलों के कारण ही हैं। हम कल क्या होगें इसका फैसला हमारे आज के लिये हुए निर्णय करेंगे। निश्चित रूप से किसी के सभी निर्णय हमेशा न तो सही और न ही हमेशा गलत हो सकते हैं। हर इन्सान के जीवन में कुछ सही तो कुछ गलत निर्णय होते है। आपका कोई निर्णय सही होगा या गलत इसका निर्धारण सिर्फ और सिर्फ समय करता है।

अक्सर हमें आज जो सही लगता है वो भविष्य में गलत साबित होता है और जो गलत लगता है वो ही सही साबित हो जाता है। जब निर्णय सही साबित हो जाता है तो तारीफ और जब गलत हो जाता है तो आलोचना के साथ गलत होने की जिम्मेदारी भी लेनी पड़ती है।

जब भी इन्सान कोई निर्णय लेता है तो वह यह सोच के नहीं लेता कि यह गलत साबित होगा। दरअसल निर्णय आज की परिस्थितियों में लिए जाते हैं जबकि कल की बदली हुई परिस्थितियां उन्हें सही या गलत साबित करती हैं। कल किसने देखा है? किसी ने नहीं पर इंसान की फितरत होती है अनुमान लगाने की और इसी आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।

आप कितनी सटीकता से भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं यह आपकी दूरदर्शिता को निर्धारित करता है और आपकी दूरदर्शिता निर्धारित करती है आपके निर्णय के सफल या असफल होने की संभावना को। अनुमान तो कोई भी लगा सकता है पर अनुभव के साथ अनुमान लगाने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है उच्च पदों पर अनुभवी लोगों की नियुक्ति की जाती है जो कपंनी के लिए निर्णय लेते हैं। दूसरे शब्दों में आपकी कंपनी के CEO और आपमें बस इतना फर्क होता है कि वो आपकी तुलना में ज्यादा बेहतर अनुमान लगा सकते हैं। 

अपनी जिंदगी में सारे निर्णय हम खुद नहीं ले सकते हमारी जिंदगी के कुछ निर्णय दूसरे भी लेते हैं और हम अक्सर अपनी जिंदगी में सफलताओं के लिए अपने निर्णयों को और असफलताओं के लिए दूसरों के निर्णयों को जिम्मेदार ठहराते हैं। इसे ही साइकॉलजी की Self prophecy theory कहते हैं। कुछ लोग जल्दी निर्णय लेते हैं तो कुछ लोग जल्दबाजी में निर्णय लेते हैं। कुछ लोग निर्णय लेने में बहुत वक्त लेते हैं तो कुछ को निर्णय लेना दुनिया का सबसे मुश्किल काम लगता है। कुछ निर्णय लेना आसान तो कुछ निर्णय लेने मुश्किल होते हैं। कुछ भी हो पर किसी के लिए सारे निर्णय न तो सही और न ही गलत हो सकते हैं।

दरअसल हम जो भी निर्णय लेते हैं वो भविष्य के अनुमान पर निर्भर होते हैं। हमारे अनुमान जितने सही होगें हमारे निर्णयों के सही होने की संभावना उतनी अधिक होगी। यह भी सही है कि अनुभव अनुमान को बेहतर बनाते हैं जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है। पर फिर भी सब कुछ अनुमान और संभावना पर निर्भर करता है।

प्रायिकता या Probability theory के अनुसार किसी भी घटना या event के होने या न होने की Probability न तो एक (one) और न ही शून्य (zero) हो सकती है। जिसका अर्थ यह हुआ कि किसी घटना के होने या न होने की संभावना को लेकर न तो पूरी तरह से आश्वस्त और न ही पूरी तरह से निराश हुआ जा सकता है। यही कारण है कि हमारे सारे निर्णय न तो हमेशा सही और न ही हमेशा गलत होते हैं।

दरअसल अनुमान कभी भी absolute नहीं हो सकते। इसलिए किसी घटना के होने या न होने की संभावना हमेशा शून्य और एक के बीच होती है। यही कारण है कि हमारे कुछ निर्णय सही और कुछ गलत होते हैं। इसलिए जब लगे कि आपका या दूसरे का कोई निर्णय गलत साबित हुआ है तो इसका मतलब यह हुआ कि आपसे या दूसरों से महज अनुमान लगाने में चूक हुई है। अनुमान गलत होने का यह मतलब कतई नहीं कि आप अयोग्य या असफल हैं और हमेशा असफल होगें। अच्छा होगा कि घटनाओं से अनुभव लेकर अगली बार बेहतर अनुमान लगाइए क्या पता यही आपका सही निर्णय हो…

बातें जिन्हें हमें समझना होगा

जिस तरह घड़ी चलती रहती है और समय गुजरता रहता है, लेकिन सुईयां घूम-घूमकर उसी कांटे पर वापस आ जाती हैं उसी तरह हमारा जीवन भी उन्हीं पड़ावों से बार – बार गुजरता है जिनसे वह पहले भी गुजर चुका है।

जिंदगी का एक पहलू यह भी है जिसे हमें समझना चाहिये-

1- इस दुनिया में दो तरह के लोग हैं- कुछ लोग जीने के लिए काम करते हैं और कुछ लोग काम करने के लिए जीते हैं। हममें से ज्यादातर लोग पहली श्रेणी में आते हैं।

2- हम पहले कामना करते हैं, उसमें अपना लाभ देखते हैं और फिर कदम आगे बढ़ाते हैं। यदि किसी काम में लाभ नहीं दिखता है तो उसे नहीं करते हैं।

3- दुनिया में बहुत असमानता है। हर जगह सत्य उपेक्षित है, आज की दुनिया में सही रास्ते पर चलने का धैर्य बहुत कम लोगों मे है, ज्यादातर लोग शार्टकट लेकर मंजिल तक पहुंचना चाहते हैं।

4- यह सच है कि यह दुनिया कठोर है और बुरे लोगों से भरी पड़ी है, यहां हर कदम पर असमानता है और सत्य यहां परेशान होता है।

5- यह दुनिया बड़ी अजीब है। यहां जो जिंदगी भर भिखारियों की तरह मांगता रहता है उसे बहुत कम मिलता है। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें कुछ खास नहीं करना पड़ता है और जिदंगी उन्हें इतना कुछ दे देती है कि संभाले नहीं संभालता है।

जिस तरह हर सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह इस जिंदगी का दूसरा पहलू भी है जिसे हमें समझना चाहिये-

1- हर बुरे इंसान के पास भी अच्छा ह्रदय हो सकता है।

2- हर स्वार्थी नेता में एक अच्छा लीडर बनने की संभावना छिपी होती है।

3- मेहनत से मिलने वाला एक रूपया भी सड़क पर मिलने वाले पांच सौ के नोट से ज्यादा कीमती होता है।

4- सत्य यहां परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं।

5- यहां भरोसा टूटता भी है लेकिन खुद पर और दूसरों पर भरोसा किये बिना यहां किसी को सफलता भी नहीं मिलती है।

यह सब समझनें में वक्त लगेगा क्योंकि ये बातें गहरी हैं पर इन्हें जितना जल्दी समझ लिया जाए हमारे लिए उतना ही अच्छा होगा।


सोना तप कुंदन भया

बाज की उड़ान

कहते हैं जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे बोलना और चहचहाना सीखते हैं,उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर  लगभग 12 Km ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर अमूमन जहाज उड़ा करते हैं।

कहते हैं जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे बोलना और चहचहाना सीखते हैं,उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर  लगभग 12 Km ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर अमूमन जहाज उड़ा करते हैं।

यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा, उसे अब यहां बताया जाता है कि तू किस लिए पैदा हुआ है? तेरी दुनिया क्या है? और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है।

धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 1 Km उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 6 Km के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते हैं लगभग 8 Km आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है।

अब धरती से वह लगभग 1000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है।  अब उसकी दूरी धरती से महज 700-800 मीटर होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके।
धरती से लगभग 400-500मीटर दूरी पर उसे लगने लगता है कि यह शायद  उसके जीवन की अंतिम यात्रा है।

फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है। यह पंजा उसकी मां का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है।

पक्षियों की दुनिया में ऐसी मुश्किल ट्रेनिंग और किसी भी पक्षी ओर की नही होती है और उसकी यह ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता है।

यह ट्रेनिंग एक मुश्किल कमांडो ट्रेनिंग की तरह होती है। तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है जो अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार कर सकता है।

बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उन्हें दुनिया की मुश्किलों से रूबरू भी होने दीजिए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए।

याद रखिये कि गमले में उगने वाले पौधे और जंगल के पौधे में बहुत फ़र्क होता है। सोना तपकर ही कुंदन बनता है।

कभी झूठ भी अच्छा है

झूठ कब अच्छा है

लिपिडेमा एक प्रकार का विकार है जिसमें त्वचा के नीचे वसा की अत्यधिक जमावट के कारण दोनों पैरों का असमान्य तरीके से विस्तार होता है। आम तौर पर यह समय के साथ बदतर होता जाता है, दर्द मौजूद होता है, और लोगों को आसानी से चोट लगनेे की संभावना होती है। इस बीमारी का कारण अज्ञात है लेकिन माना जाता है कि आनुवंशिकी और हार्मोनल कारक इसके लिए जिम्मेदार हैं।

उसने पूछा, “क्या मैं सुंदर दिखती हूं?”

“हाँ। तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो। ” लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा।

वह लड़की लिपिडेमा से पीड़ित थी और उसका बढ़ता हुआ वजन उसके नियंत्रण में नहीं था।

वह जानता था कि वह पतली दिखना चाहती थी, लेकिन वह मजबूर थी।

उस लड़के के लिए उसकी आंतरिक सुंदरता महत्वपूर्ण थी। इसी कारण से उसने झूठ बोला।

झूठ बोलना सही है, जब आप इंसान की आत्मा को खरोंच नहीं पहुंचाना चाहते हैं।

हर कोई अच्छा दिखना चाहता है। लेकिन सभी भाग्यशाली नहीं होते हैं, कुछ लोग मजबूर हैं।

झूठ बोलिये, जब आप किसी को चोट नहीं पहुंचाना चाहते हैं।

झूठ बोलिये, जब आप किसी को डिमोटिवेट नहीं करना चाहते है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाता है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों की शांति को प्रभावित नहीं करता है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों को बेहतर तरीके से सहज महसूस करता है।

कभी-कभी, हम अपनी भावनाओं को छिपाने के लिए झूठ बोलते हैं। ऐसा समय भी होता हैं जब झूठ बोलना हानिकारक नहीं होता है, खासकर, जब यह किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट लाता है, तो यह एक खूबसूरत झूठ होता है।

झूठ बुरा है यदि इसका इस्तेमाल हम अपने फायदे के लिए करते हैं। हालांकि, जब आप दूसरों के फायदे के लिए झूठ बोलते हैं, तो कभी-कभी यह सच से भी बेहतर साबित हो सकता है।


मौन

जीवन को बदलने वाला एक अद्भुत उपाय मौन है। मौन की शुरुआत जुबान के चुप होने से होती है। धीरे-धीरे जुबान के बाद आपका मन भी चुप हो जाता है। मन में चुप्पी जब गहराएगी तो आंखें, चेहरा और पूरा शरीर चुप और शांत होने लगेगा। तब आप इस संसार को नए सिरे से देखना शुरू कर पाएंगे। बिल्कुल उस तरह से जैसे कोई नवजात शिशु संसार को देखता है। जरूरी है कि मौन रहने के दौरान सिर्फ श्वांसों के आवागमन को ही महसूस करते हुए उसका आनंद लें। मौन से मन की शक्ति बढ़ती है। शक्तिशाली मन में किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, चिंता और व्यग्रता नहीं रहती।

कुछ न बोलना, यानि अपनी एक सुविधा से मुंह मोड़ना ,बोलना हमारे लिए एक बहुत बड़ी सुविधा ही होती है। जो हमारे मन में चल रहा होता है उसे हम तुरंत बोल देते हैं। लेकिन, मौन रहने से चीजें बिल्कुल बदल जाती हैं। मौन अभाव में भी खुश रहना सिखाता है।

हमारे बोल पाने की वजह से हमारा जीवन आसान हो जाता है, लेकिन जब हम चुप हो जखते हैं तब आपको ये अहसास होगा कि आपका जीवन दूसरो पर कितना निर्भर हैं। मौन रहने से आप दूसरों को ध्यान से सुनते हैं। अपने परिवार, अपने दोस्तों को ध्यान से सुनना, उनको सम्मान देना ही है।

बाहर के शोर के लिए तो शायद हम कुछ नहीं कर सकते, लेकिन अपने द्वारा उत्पन्न शोर को मौन जरूर कर सकते हैं। मौन विचारों को आकार देने में हमारी मदद करता है। हर रोज अपने विचारों को बेहतर आकार देने के लिए मौन रहने का अभ्यास कर सकते हैं।

जब आप हर मौसम में मौन का अभ्यास करना शुरू कर देंगे तो आप जान पाएंगे कि बसंत में चलने वाली हवा और सर्दियों में चलने वाली हवा की आवाज भी अलग-अलग होती है। मौन हमें प्रकृति के करीब लाता है। शांत होकर बाहर टहलें। आप पाएंगे कि प्रकृति के पास आपको देने के लिए काफी कुछ है।

जीवन के कुछ कड़वे सबक

1-  दूसरों के सामने खुद को लाचार और बेबस मत दिखाइये , लोग इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।

2-  किसी रिश्ते में जो व्यक्ति कम परवाह करता है अक्सर उसका पक्ष ज्यादा मजबूत होता है और वह हर्ट भी कम होता है।

3- इस दुनिया में पैसा बोलता है। पैसे के बिना, आप कुछ भी नहीं हैं।

४- आपके बारे में लोगों की धारणा वास्तविकता से भी अधिक महत्वपूर्ण है, अक्सर हम तथ्यों को नजरंदाज करते हैं और धारणा के आधार पर किसी को दोषी या निर्दोष मान लेते हैं।

5- हम उन लोगों को महत्व देते हैं जो यह नहीं सोचते हैं कि हम महत्वपूर्ण हैं और जो हमें महत्वपूर्ण मानते हैं, उन्हें हम स्वीकार नहीं करते हैं।

6- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके ग्रेड कितने अच्छे हैं, ग्रेड आपको केवल आधी दूरी तक ले जाते हैं,लोग आपके सामाजिक कौशल पर अधिक ध्यान देते हैं।

7- हर किसी को खुश करना असंभव है। हमेशा कोई न कोई होगा जो आपसे असहमत है।

8- आप जितना अधिक बाहर की दुनिया में खुशी पाना चाहेंगे , उतना ही अधिक आप असफल होंगे।

9- हम में से बहुत लोग अतीत या भविष्य में जीते हैं। वर्तमान बहुतों के लिए अज्ञात है।

10- आपके जीवन में सभी की एक भूमिका है और जब उनकी भूमिका समाप्त हो जाएगी, तो वे आपको छोड़ देंगे।

11- यदि आप अपने भीतर की आवाज को नहीं सुनते हैं, तो संभावना अधिक है कि आपको बाद में पछताना होगा।

कुछ बातें जो हमें परेशान करती हैं

 जब लोग सच्ची खुशी ढूढ़ने के बजाय सोशल मीडिया पर खुश होने का नाटक करते हैं,लोग आजकल लाइक्स और कमेंट्स की इतनी परवाह करते हैं कि वे ऑनलाइन अंटेशन पाने के लिए कुछ भी पोस्ट करते हैं।

2- जब लोग एक दूसरे की मदद तब तक नहीं करते हैं जब तक कि दूसरे उन्हें नोटिस न करें। वे मदद इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि वे मदद करना चाहते हैं, वे मदद इसलिए करते हैं ताकि अन्य लोग उन्हें देख सकेंं।

3- जब लोग दूसरों को प्रभावित करने के लिए महंगी कारों और चीजों को खरीदते हैं और कर्ज के जाल में फंस जाते हैं, लोग अमीर होने की बजाय अमीर दिखने की परवाह अधिक करते हैं।

4- जब लोग पैसों के लिए रिश्तों की परवाह भी नहीं करते हैं, यह देखकर बहुत तकलीफ होती है कि आजकल पैसा मानव जीवन से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

5- जब भी मीडिया अनदेखी करता है और कई महत्वपूर्ण घटनाओं, आपदाओं, खेल उपलब्धियों पर ध्यान नहीं दिया जाता है या वे उन्हें राष्ट्रीय कवरेज में स्थान नहीं दिया जाता है।

6- जब भी कोई इंसान किसी अन्य इंसान से घृणास्पद और अनुचित तरीके से व्यवहार करता है, क्योंकि वह वे उनसे अलग होते हैं।

7- जब कोई शिक्षित व्यक्ति दहेज,जात-पात, और अंधविश्वास जैसी बातों में पड़कर अपने जीवन को बेकार करता है।

8- जब हम शादी-पार्टी में मनोरंजन के नाम पर बहुत से भोजन को बर्बाद करते हैं जिससे बहुत से भूखे आदमियों का पेट भरा जा सकता था।

9- जब हम मदर्स डे और फादर्स डे का जश्न मनाते हैं, लेकिन माता-पिता को अपने साथ रखने से इन्कार कर देते हैं।

10- जब एक मजदूर के बच्चे ने डाक्टर से कहा मुझे कोई एेसी दवा दे दो कि मुझे भूख ही न लगे।

किसी का बुरा मत सोचिए

ईर्ष्या से कभी किसी का भला नहीं होता है। दूसरों का अनिष्ट चाहने में अपनी ही हानि होती है। देखने में भले लगे कि हमें तात्कालिक लाभ हुआ है पर वास्तव में हमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी हानि पहुंचती है।

जिस व्यक्ति का हम बुरा चाहते हैं उस व्यक्ति को तो पता तक नहीं होता कि कोई उसके बारे में बुरे विचार रखता है। किसी के प्रति ईर्ष्या का विचार आने पर स्वयं सबसे पहले ईर्ष्या करने वाले का ही रक्त जलता है और उसके विचार नकारात्मक होने लगते हैं। मन अशांत हो जाता है जिसका असर दिनचर्या पर पड़ता है। कहावत भी है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है वह स्वयं ही उसमें पहले गिरता है।

जब हम जानते हैं कि दूसरों से ईर्ष्या करने पर, उनका अनिष्ट चाहने पर हमको महान क्षति पहुंचेगी, हमारी आत्मा दूषित हो जाएगी, हमें कहीं भी शान्ति नहीं मिलेगी तो फिर हम क्यों दूसरे के प्रति बुरे विचार रखते हैं? यदि हम यह सब जानते और समझते हुए भी दूसरों के लिए गढ्ढा खोदने का काम करते हैं उनके प्रति बुरे विचार रखते हैं तो फिर यह समझ लीजिए कि हम अपने हाथों द्वारा स्वयं को ही मूर्ख बना रहे हैं।

आग जहाँ रखी जाती है पहले उस स्थान को गरम करती और जलाती है। तेजाब जिस बर्तन में रखा गया है सबसे पहले उसे ही जलाएगा । उसी प्रकार ईर्ष्या और बुरे विचार जिसके मन में रहते हैं पहले उसी की हानि करते हैं। जितने समय तक ये मन में जमे रहते हैं तब तक निरन्तर क्षति पहुंचाने का करते हैं।

यदि किसी से हमारे मतभेद हों,विरोधी विचार हों तो उसे उस व्यक्ति से प्रकट में तो कहना चाहिये और उचित माध्यम से अपने विचारों को अभिव्यक्त भी करना चाहिए पर मन में उसकी गाँठ बाँध लेना और उम्र भर के लिए और ईर्ष्या और क्रोध को पाल लेने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।

बुराई जल्दबाज होती है यह जितनी जल्दी बढ़ती है उतनी जल्दी ही नष्ट भी हो जाती है और अपने साथ ही अपने करने वाले को भी नष्ट कर देती है। बुराई खुद को दोहराती भी है यह बार बार इंसान से टकराती है और हर बार परिणाम हैरान करने वाले और विनाशकारी होते हैं।

शराब पीने में भी कड़वी होती है और उसके परिणाम भी कड़वे होते हैं। चोरी करते वक्त मन में भय और घबराहट होती है और करने के बाद भी बेचैनी, भय और तिरस्कार मन पर हावी रहते हैं। अच्छे कर्मों का परिणाम मिलने में देरी हो सकती है पर बुराई का फल बुरा ही होता है यह निश्चित है।

भावनात्मक दर्द हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

1.भावनात्मक दर्द का व्यक्तिव पर असर शारीरिक दर्द से अधिक गहरा होता है और आपके व्यवहार पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है।

2.कभी-कभी लोग भावनात्मक चोट की तुलना में शारीरिक रूप से चोट खाना अधिक पसंद करते हैं क्योंकि आप शारीरिक चोट पर मरहम लगा सकते हैं लेकिन आपके दिल पर लगी चोट के लिए कोई मरहम नहीं होती है।

3. सबसे अधिक दर्द का सामना करने वाले अक्सर वह लोग होते हैं जो हमेशा दूसरों को खुश रखने की कोशिश कर रहे होते हैं।

4. भावनात्मक दर्द के दौरान आप अक्सर महसूस करते हैं कि आप अकेले हैं और आपको हर जगह इसके साक्ष्य मिलेते भी रहते हैं।

5. दर्द के खिलाफ गुस्सा एक प्राकृतिक ढाल है। जब कोई कहता है कि ‘मैं तुमसे नफरत करता हूं’ तो उनका वास्तव में मतलब है ‘आपने मुझे चोट पहुंचायी है’।

6. दर्द लोगों को बदलता है जिससे वह दूसरों पर कम विश्वास करते हैंं और अधिक सोचते हैं और खामोश रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

7. जब आप बहुत लंबे समय तक दर्द को दिल में रखते हैं तो यह आपके मनोभावों को प्रभावित करता है, फिर जब आपके साथ कुछ बुरा होता है तो आप रोते या शिकायत नहीं करते हैं, आप बस वहां बैठे रहते हैं और कुछ भी महसूस नहीं करते हैं।

8. कभी-कभी दर्द होने पर खुश होने का नाटक करना सिर्फ एक उदाहरण है कि आप एक व्यक्ति के तौर पर कितने मजबूत हैं।

9. दूरियां हमेशा खराब नहीं होती हैं। कभी-कभी थोड़ी दूरी बनाने से लोगों को यह पहचानने में मदद मिलती है कि आप वास्तव में उनके लिए कितना मतलब रखते थे।

10. भावनात्मक दर्द हमेशा सजा नहीं होता या फिर ऐसा कुछ नहीं होता जिसे हमने अनजाने में अपने जीवन में आकर्षित कर लिया हो। कभी-कभी इसके होने का मकसद बस इतना होता है कि जीवन में हम कुछ सीखें और आगे बढें।

जिंदगी के कुछ सिंपल सच क्या हैं ?

1- आपकी 10- 5 की नौकरी आपका जीवन नहीं है। जो काम आप 10-5 के  के बाद करते हैं वो आपको दूसरों से अलग बनाता है।

2- छोटी- छोटी बातें और काम जो आप प्रतिदिन कहते हैं या करते हैं वह कही़ं ज्यादा महत्वपूर्ण है उन बड़ी – बड़ी बातों और कामों से जो आप कभी-कभार करते हैं।

3- सही आहार और  कम से कम ६ घंटे की नींद जीवन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है । आपके ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड से भी ज्यादा जरूरी है।

4- असल जीवन में असफलता उतनी निराशाजनक नहीं होती जितना आपको बचपन में सीखाया जाता है हालांकि जीवन आसान नहीं होता विशेषकर तब जब आप जिंदगी में कुछ बड़ा करना या पाना चाहते हैं।

5- आपको हमेशा आपके लुक्स या आपके द्वारा कमाए गए पैसों के पैमाने पर आंका जाएगा क्योंकि सच्ची  दोस्ती अक्सर स्कूल और कॉलेज के दिनों में होती है, बाहर की दुनिया में सब पैसा कमाने की दौड़ में व्यस्त हैं।

6- जीवन में उतार-चढ़ाव अपरिहार्य हैं, सबसे बुरी चीजें जिनकी आप कल्पना करते हैं अक्सर जीवन में कभी घटित नहीं होती हैं, जीवन में जो सबसे बुरा घटित होता है अक्सर उसकी आपने कल्पना भी नहीं की होती है।

7- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप 20, 25 या फिर 45 के हैं। आप अपनी मर्जी से कभी भी अपना जीवन बदल सकते हैं।

8- भूख और गरीबी आपको जीवन के सबसे बड़े सबक सिखा देते हैं जबकि आप की सबसे बड़ी शक्ति हर स्थिति में आपकी प्रतिक्रिया देने की क्षमता है।

9- आप लोगों को बदल नहीं सकते हैं,आप केवल उन्हेंं रास्ता दिखा सकते हैं और अपने उदाहरण से बदलाव के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

10- किसी को परवाह नहीं है कि आपका जीवन कितना मुश्किल है आपके जीवन में जो भी समस्या है वह आपकी जिम्मेदारी है,इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उस समस्या का कारण आप हैं या कोई और।