ये सच है या ख्वाब है

ये सच है या ख्वाब है,

कोई शायद आसपास है,

कहीं दिन ढल रहा है बेवजह,

कहीं चढ़ती रातें उदास है।

हजारों मुश्किलें हैं जीवन में,

जीने की तरकीबें भी नायाब है,

कोई ढूंढ़ रहा है जिंदगी का मकसद,

किसी की किस्मत उसके साथ है।

रंग बदलती इस दुनिया में,

उनकी सादगी कितनी लाजवाब है,

उन्हें नफ़रत भी हमीं से है,

हमसे मोहब्बत भी बेहिसाब है।

कैसी कसक उठती है दिल में,

कितनी अजीब सी ये प्यास है,

दूर कहीं दिखता एक साया है,

बस एक अधूरा सा अहसास है।

Leave a Reply