यादें

एक वो जमाना था
जिसमें खुशियों का ठिकाना था
आसमान छूने की ख्वाईश थी
हर एक सपना सुहाना था।

ना दुनियादारी की बंदिशें थीं
ना दौलत का पैमाना था
बस मिट्टी की खुशबू थी
हर एक दोस्त पुराना था।

मां-पापा की डांट में
प्यार भरा अफसाना था
कागज़ की कश्ती थी
लहरों के उस पार जाना था।

रूठने-मनाने के खेल में
छिपा एक बहाना था
तेज भागती जिंदगी में
दिल बचपन का दीवाना था।

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