माँ…

mother and daughter on grass
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माँग लूँ मैं ख़ुदा से
हर बार यही दुआ मिले
हर बार वही गोद मिले
हर बार वही पनाह मिले

किसी को मिले खुशियों में हिस्सा
किसी को पूरा जहाँ मिले
मैं जब भी आऊँ दुनिया में दोबारा
मुझे फिर वही माँ मिले

रूह के रिश्ते हैं ये देखो
चाहने वाले भी तमाम मिले
जब भी चोट लगी थी दिल पे
माँ की आँखों में सिर्फ़ उसके निशाँ मिले

जब भी चलती है ग़म की आँधी
या ज़िदंगी में तूफां उठे
छा जाती है वो बनके बादल
हर बार मुझे महफूज़ मुकाम मिले

दुनिया में सबकुछ है बिकता
यहाँ हर मर्ज़ की दवा मिले
बेशकीमती हैं वो माँ के आँसू
जिसने मेरे हर गुनाह धुले

माँ है तो फिर है सबकुछ
फिर इस जहाँ में भले कुछ न मिले
तुम ढूँढ़ लेना अपनी जन्नत
मुझे हर जनम में सिर्फ वो माँ मिले…
© abhishek trehan

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