मशहूर होने का शौक नहीं है…

मशहूर होने का शौक नहीं है,

ख़ुद की ख़ुद से पहचान ही काफी है,

सपनो के पंख कटते कहाँ हैं,

उड़ने के लिए हौसलों की उड़ान ही काफी हैं।

तुम्हें जिंदगी की हर खुशी हो मुबारक,

मेरे लिए अंधेरों का आसमान ही काफी है,

नए ज़ख्म की जरूरत किसे अब यहां है,

मेरे लिए पुरानी चोटों के निशान ही काफी है।

यादें पुरानी चेहरे नए हैं,

जीने के लिए तेरी एक मुस्कान ही काफी है,

दिलों से खेलने की जरूरत नहीं है,

बर्बादियों के लिए ख़ामोशियों का इल्ज़ाम ही काफी है।

महख़ाने बेवजह बदनाम हो गए हैं,

ज़हर पीने को यार की कड़वी ज़ुबान ही काफी है,

दर-ब-दर भटकने की जरूरत नहीं है,

रोशनी के लिए कमरे में एक रोशनदान ही काफी है।

मँज़िले भी जिद्दी हैं,

रास्ते भी जिद्दी हैं,

मुश्किलों से पार पाने के लिए,

महबूब का मेहरबान होना ही काफी है।

आरजू के सहारे जिंदगी कट रही है

बेबसी में सब्र के इंम्तिहान ही काफी हैं

हर दफ़ा इत्तेफ़ाक की जरुरत नहीं है

बुलंदियां छूने के लिए अकेला इंसान ही काफी है…

(स्वलिखित)

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