मन

दुनिया में दिखाई देने वाली हर चीज़, हर वस्तु के तीन आयाम होते हैं। यह तीन आयाम हैं – लंबाई, चौड़ाई और गहराई। हमारा मन भी त्रिआयामी है। हमारे मन के तीन आयाम चेतन, अचेतन और अतिचेतन हैं। मन की संरचना भी किसी भौतिक पदार्थ की भांति ही है बस फर्क इतना है कि मन सूक्ष्म होता है इसलिए दिखाई नहीं देता है जबकि भौतिक पदार्थ स्थूल होते हैं इसलिए दिखाई पड़ते हैं।

हमारा सामान्य जीवन क्रम मन की चेतन अवस्था से संबंधित होता है। हमारी दिनचर्या से जुड़े सभी कार्य चेतन मन से संचालित होते हैं। हमारी नींद व सपनों का संबंध अचेतन मन से है जब हम सो जाते हैं तब हमारा अचेतन मन जाग्रत रहता है। मन का अतिचेतन स्तर अत्यधिक सूक्ष्म है जिसका संबंध ध्यान, आंनद और निस्वार्थ भावना से होता है।

मन की संरचना काफी हद तक समुद्र में डूबी हुई विशालकाय बर्फ की चट्टान के जैसी होती है जिसका कुछ हिस्सा सतह के ऊपर होता है जिसे हम देख पाते हैं हालांकि यह संपूर्ण चट्टान का बहुत छोटा हिस्सा होता है इसे हम चेतन मन कह सकते हैं।

बर्फीली चट्टान का शेष भाग पानी में डूबा रहता है। इसे हम तब तक नहीं देख पाते हैं जब तक हम स्वयं गहराई में न जाएं। चट्टान के इस हिस्से की तुलना अचेतन मन से की जा सकती है। कठिन होता है अचेतन तक पहुंच पाना।

इन दो हिस्सों के अतिरिक्त बर्फीली चट्टान का एक हिस्सा वाष्प बन जाता है और आकाश में छोटे-छोटे बादल बनकर मंडराने लगता है। यही अतिचेतन मन है। उस बादल तक पहुंच पाना करीब – करीब असंभव है यही कारण है कि ध्यान कठिन है और समाधि दुसाध्य है।

जागरण व चिंतन की घटनाएं चेतन मन में सम्पन्न होती रहती हैं। जब हम गहरी नींद में होते हैं और चेतन मन शांत होता है जाता है तब अचेतन मन क्रियाशील होता है। जब अचेतन मन भी शून्य हो जाता है तब अतिचेतन में प्रवेश मिलता है हालांकि यह अवस्था बिरलों को ही प्राप्त हो पाती है।

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