निशब्द

एक छोटी लड़की अपने पिता के साथ मंदिर गयी थी। तभी मंदिर के प्रवेश द्वार पर उसने शेर की प्रतिमा को देखा उस पत्थर के शेर को देखकर वो छोटी सी बच्ची डर गयी और रोते हुए कहने लगी पापा जल्दी से यहां से चलो नहीं तो ये शेर हमें मारकर खा जायेगा। उसके पिता ने बच्ची को गोद में उठा लिया और उसे समझाते हुए कहने लगे मुन्नी डरो नहीं ये शेर तो पत्थर का है ये हमारा कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा।

मंदिर में मूर्ति के दर्शन के बाद वे दोनों बाहर आ गये। मंदिर के बाहर एक अपाहिज बैठा हुआ था उसके साथ एक छोटा लड़का भी था वे मंदिर के बाहर आने वाले हर व्यक्ति से कुछ मांग रहे थे और मिलने वाले पैसों और प्रसाद को अलग – अलग थैलों में डाल रहे थे।

जब पिता और पुत्री उस अपाहिज व्यक्ति के पास से गुजरे तो उसने अपना हाथ आगे कर दिया पिता ने अनमने भाव से पांच रूपये का सिक्का निकाला और उस अपाहिज के पास फेंक दिया तभी वो छोटा सा लड़का दौड़कर थैला लेकर आया और इशारे से थैले में प्रसाद डालने के लिए आग्रह करने लगा। पिता ने बच्ची को गोद में उठाया और उस लड़के को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए। ये शहर के प्रतिष्ठित वकील सुधीर चक्रवर्ती और उनकी बेटी पालकी थे।

सुधीर अभी पार्किंग में खड़ी हुई अपनी गाड़ी के पास पहुंचे ही थे कि न जाने कहां से वही लड़का दौड़ता हुआ आया और उनका हाथ पकड़ कर खींचने लगा सुधीर को लगा कि वह उनसे प्रसाद देने की जिद कर रहा है उन्हें लड़के का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और उन्होंने को बिना कोई मौका दिये अपना हाथ झटके के साथ छुड़ाया और लड़के के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया।

सुधीर के इस व्यवहार से हतप्रभ वह लड़का वहीं जमीन पर गिर पड़ा उसकी आँखों में आँसू आ गए । सुधीर ने देखा कि वह अपाहिज भिखारी दूर से ही उन्हें रूकने का इशारा करते हुए जमीन पर घिसटते हुए तेजी से उनकी तरफ चला आ रहा है। अब तक थोड़ी भीड़ भी तमाशा देखने के लिए जुट गई थी। सुधीर को महसूस हुआ कि बात बढ़ गई है और उन्होंने सौ रुपए का नोट उसे देने के लिए निकाल लिया वह लोगों से पैसा लूटने की इन लोगों की इस नई चाल को समझ चुके थे।

वह बूढा अपाहिज भिखारी सुधीर के पास आकर हाथ जोड़कर कहने लगा बाबूजी लगता है कि इस लड़के से कोई गलती हो गई है इसे माफ कर दीजिए, यह लड़का बोल नहीं सकता है। इसे मैंने ही आपको बुलाने के लिए भेजा था दरअसल आपकी बिटिया की चांदी की पायल मंदिर में गिर गई थी जिसे यह बच्चा उठाकर मेरे पास ले आया उसे वापस करने के लिए ही इसे मैंने आपको बुलाने के लिए भेजा था।

सुधीर अपने बिस्तर पर लेटे हुए करवटें बदल रहे थे उन्हें आज नींद नहीं आ रही थी रह रह कर उस अपाहिज भिखारी और उसके गूँगे लड़के का चेहरा उनकी आखों के सामने आ जाता था। सुधीर ने देखा कि पालकी भी अभी जाग रही है उन्होंने उसे अपने पास बुलाया और प्यार से पूछा बिटिया रानी ये बताओ कि मंदिर में तुमने आज भगवान से क्या माँगा? पालकी ने कहा कुछ नहीं मांगा क्योंकि शेर की प्रतिमा की तरह ही मंदिर में भगवान भी पत्थर के थे।

सुधीर चुपचाप उठे और अपनी डायरी में आज की तारीख डालकर लिखने लगे आज मैं अपनी बेटी के उत्तर के सामने निशब्द और निरूउत्तर हूं। मैं आज तक ईश्वर को मंदिर में पत्थरों में खोज रहा था पर आज पता चला कि वो वहीं मंदिर के बाहर इंसानों में इंसानियत के रूप में मौजूद था जिसे पहचानने में मुझसे गलती हो गई थी।

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