डिसाइडोफोबिया

निर्णय लेने से कोई बच नहीं सकता। जब तक सांसें चलेगी फैसले लेने होंगे। निर्णय या डिसिजन जिदंगी के आधार हैं। हम आज जो भी हैं अपने बीते हुए कल में लिए गए फैसलों के कारण ही हैं। हम कल क्या होगें इसका फैसला हमारे आज के लिये हुए निर्णय करेंगे। निश्चित रूप से किसी के सभी निर्णय हमेशा न तो सही और न ही हमेशा गलत हो सकते हैं। हर इन्सान के जीवन में कुछ सही तो कुछ गलत निर्णय होते है। आपका कोई निर्णय सही होगा या गलत इसका निर्धारण सिर्फ और सिर्फ समय करता है।

अक्सर हमें आज जो सही लगता है वो भविष्य में गलत साबित होता है और जो गलत लगता है वो ही सही साबित हो जाता है। जब निर्णय सही साबित हो जाता है तो तारीफ और जब गलत हो जाता है तो आलोचना के साथ गलत होने की जिम्मेदारी भी लेनी पड़ती है।

जब भी इन्सान कोई निर्णय लेता है तो वह यह सोच के नहीं लेता कि यह गलत साबित होगा। दरअसल निर्णय आज की परिस्थितियों में लिए जाते हैं जबकि कल की बदली हुई परिस्थितियां उन्हें सही या गलत साबित करती हैं। कल किसने देखा है? किसी ने नहीं पर इंसान की फितरत होती है अनुमान लगाने की और इसी आधार पर निर्णय लिए जाते हैं।

आप कितनी सटीकता से भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं यह आपकी दूरदर्शिता को निर्धारित करता है और आपकी दूरदर्शिता निर्धारित करती है आपके निर्णय के सफल या असफल होने की संभावना को। अनुमान तो कोई भी लगा सकता है पर अनुभव के साथ अनुमान लगाने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है उच्च पदों पर अनुभवी लोगों की नियुक्ति की जाती है जो कपंनी के लिए निर्णय लेते हैं। दूसरे शब्दों में आपकी कंपनी के CEO और आपमें बस इतना फर्क होता है कि वो आपकी तुलना में ज्यादा बेहतर अनुमान लगा सकते हैं।

अपनी जिंदगी में सारे निर्णय हम खुद नहीं ले सकते हमारी जिंदगी के कुछ निर्णय दूसरे भी लेते हैं और हम अक्सर अपनी जिंदगी में सफलताओं के लिए अपने निर्णयों को और असफलताओं के लिए दूसरों के निर्णयों को जिम्मेदार ठहराते हैं।

कुछ लोग जल्दी निर्णय लेते हैं तो कुछ लोग जल्दबाजी में निर्णय लेते हैं। कुछ लोग निर्णय लेने में बहुत वक्त लेते हैं तो कुछ को निर्णय लेना दुनिया का सबसे मुश्किल काम लगता है। कुछ निर्णय लेना आसान तो कुछ निर्णय लेने मुश्किल होते हैं। कुछ भी हो पर किसी के लिए सारे निर्णय न तो सही और न ही गलत हो सकते हैं।

दरअसल हम जो भी निर्णय लेते हैं वो भविष्य के अनुमान पर निर्भर होते हैं। हमारे अनुमान जितने सही होगें हमारे निर्णयों के सही होने की संभावना उतनी अधिक होगी। यह भी सही है कि अनुभव अनुमान को बेहतर बनाते हैं जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है। पर फिर भी सब कुछ अनुमान और संभावना पर निर्भर करता है।

प्रायिकता या Probability theory के अनुसार किसी भी घटना या event के होने या न होने की Probability न तो एक (one) और न ही शून्य (zero) हो सकती है। जिसका अर्थ यह हुआ कि किसी घटना के होने या न होने की संभावना को लेकर न तो पूरी तरह से आश्वस्त और न ही पूरी तरह से निराश हुआ जा सकता है। यही कारण है कि हमारे सारे निर्णय न तो हमेशा सही और न ही हमेशा गलत होते हैं।

दरअसल अनुमान कभी भी absolute नहीं हो सकते। इसलिए किसी घटना के होने या न होने की संभावना हमेशा शून्य और एक के बीच होती है। यही कारण है कि हमारे कुछ निर्णय सही और कुछ गलत होते हैं।

इसलिए जब लगे कि आपका या दूसरे का कोई निर्णय गलत साबित हुआ है तो इसका मतलब यह हुआ कि आपसे या दूसरों से महज अनुमान लगाने में चूक हुई है। अनुमान गलत होने का यह मतलब कतई नहीं कि आप अयोग्य या असफल हैं और हमेशा असफल होगें। अच्छा होगा कि घटनाओं से अनुभव लेकर अगली बार बेहतर अनुमान लगाइए क्या पता यही आपका सही निर्णय हो।

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