ना किसी के साथ हूं ना किसी के पास हूं…

ना किसी के साथ हूं,

ना किसी के पास हूं,

साल नया लग गया,

मैं बेवजह उदास हूं।

तारीख भी बदल गई,

महीना भी बदल गया,

तुम आकर मुझे सम्हाल लो,

मैं टूटता पलाश हूं।

मौसम बहुत सर्द है,

दिल में बहुत दर्द है,

अधूरा हूं मैं तेरे बिना,

मुकम्मल मेरा हमदर्द है।

मुद्दतें गुज़र गईं,

हिसाब हमने किया नहीं,

उसने कुछ सुना नहीं,

हमने कुछ कहा नहीं।

वो ढूंढ़ते हमें रहे,

हम कहीं मिले नहीं,

अब अपने दिल ढूंढ़ लो,

मैं तुम्हारे ही आस-पास हूं।

आज भी लिखा नहीं,

बस इतना तुम समझ लो,

मेरी तुम प्यास हो,

मैं तुम्हारी तालाश हूं…

(स्वलिखित)

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