ना इसे देखकर ना उसे देखकर

ना इसे देखकर,

ना उसे देखकर,

जिंदगी जी रहे हैं,

बस तुम्हें देखकर।

अब ना भी मिलो तो,

कोई ग़म नहीं है,

कुछ हम भी बदल गए हैं,

अब तुम्हें देखकर।

ना ज़हन में फिक्र है,

ना बातो में ही जिक्र है,

अब पलटती भी कहाँ हो,

तुम हमें देखकर।

कभी पूछती हो,

कभी रूठती हो,

अब कहती भी कुछ कहाँ हो,

तुम हमें रोककर।

तुम ही वो वजह हो,

तुम ही वो सज़ा हो,

कभी कुबूल होती नहीं जो,

तुम मेरी वो दुआ हो।

अब दिन भी बड़ा है,

रातें भी अब सज़ा हैं,

अब लिखते भी कुछ कहाँ है

हम तुम्हें सोचकर…

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