दुनिया से छुप-छुपकर ही सही….

दुनिया से छुप-छुपकर ही सही

थोड़ा ख़ुद के लिए भी जिया करो

किसी को तेरी फिक्र नहीं

अपनी परवाह ख़ुद किया करो

एक दूसरों की ख़िदमत के सिवा

दुनिया में और भी काम हैं

कुछ ख्वाहिशें सीने में दफ़न हैं

कुछ पल उन्हें भी दिया करो

हँसते रहे तुम हर दफ़ा

शिकवा कभी किया नहीं

हर बार मन मसोस लिया

कभी किसी से कुछ कहा नहीं

कह रही है ज़िदंगी

ख़ुद को जरा सम्हाल लो

दूसरों के लिए बहुत जी लिए

थोड़ा ख़ुद के लिए भी जिया करो

साँसे खर्च हो रहीं

पाबंद ज़िदंगी का हिसाब है

वक्त बहुत कम है

कोरी सपनों की अभी किताब है

एक जनम काफ़ी नही

हर जनम में तुम मिला करो

मैं तुम्हारा कर्ज़दार हूं

इस कर्ज़ से मुझे रिहा करो…

© abhishek trehan

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