दुआओं का कोई रंग नहीं होता…

दुआओं का कोई,

रंग नहीं होता,

इश्क करने का कोई,

ढंग नहीं होता।

आ न जाना कहीं तुम,

वक्त की बातों में देखो,

वक्त भी हमेशा,

किसी के संग नहीं होता।

दुनिया में आज़माते हैं,

लोग किस्मत को अपनी,

किस्मत का लिखा हमेशा,

सबको पसंद नहीं होता।

डूब जाता है सूरज,

हर शाम को लेकिन,

अंबर का आँचल,

कभी बेरंग नहीं होता।

तेरी साँसों सी महक,

कहीं नहीं मिलती,

हर आशिक इश्क में,

कटी पतंग नहीं होता।

कोई ठहरता नहीं है,

पल भर भी कभी देखो,

और किसी के दिल का दरवाज़ा,

कभी बंद नहीं होता…

(स्वलिखित)

Leave a Reply