तेरा साथ तो बस एक वादा है

तेरा साथ तो बस एक वादा है

कभी पूरा कभी आधा है

कभी ना मिले तो मीरा है

मिल जाए कभी तो राधा है।

पाना ही कहाँ बस मकसद है

कभी खोने का मज़ा भी ज्यादा है

ये प्रीत है शतरंज का खेल नहीं,

यहां ना वज़ीर है कोई, ना कोई प्यादा है।

लाख चाहा तुझे ना याद करूं,

पर जुड़ा तुझसे कोई धागा है,

मुझको मुझमें ही जगह मिलती नहीं

अब तुझमें ही रहने का इरादा है।

एक परवाह बतानी पड़ती है,

रिश्तों का यही तगादा है

ना छू ही सकूं, ना पा ही सकूं

कुछ रिश्तों की यही मर्यादा है।

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