तुम वो तारीख़ हो जो कभी बदलती नहीं

तुम वो तारीख़ हो जो कभी बदलती नहीं,

मैं वो लहर हूं जो कहीं पर ठहरती नहीं,

एक डर है कि तुम्हें पाकर फिर खो न दूं,

तुम बनके बारिश मुझ पर क्यों बरसती नहीं।

तुम हो वजह जीने की और सबब मरने का,

तुम बन के साया मुझ में ही क्यों बसती नहीं,

ढूंढ़ता फिर रहा हूं तुम्हे दर- ब-दर,

तुम कहां खो गई हो क्यों दिखती नहीं।

दूरियों ने बढ़ा दिया है यादों का हौसला,

तुम बनके खु़शबू क्यों महकती नहीं,

रात पर छा रहा है ये कैसा नशा,

तुम बन के हवा क्यों बहकती नहीं।





























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