तुमको भी है खबर,मुझको भी है पता

तुमको भी है खबर, मुझको भी है पता..

कैसे कहें, अब तो समझ लो तुम

मतलब तो हैंं,शब्दों का नहीं है पता..

जाने कहां है, हसरतों का वो घर

हम सफर में तो हैंं, मंजिलों का नहीं है पता..

नज़रें क्या मिलीं, गलती से ही सही

फिर सो न सके वो, इसमें उसकी क्या ख़ता..

खामोश़ ही तो हैंं, कुछ अधूरी शिकायतेंं ही सही

वो मुस्कुरा क्या दिए, फिर कहने को कुछ नहीं बचा.

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