खुशी

एक अमीर महिला प्रतिदिन मनोचिकित्सक के पास जाती थी, उसे अपना जीवन अधूरा सा लगता था, वह हर रोज उनसे कहती थी कि उसे लगता है कि उसका जीवन बेकार है और उसका कोई मतलब नहीं है। वह डाक्टर से कहती थी कि वह चाहती है कि वो खुशियाँ ढूँढने में उसकी मदद करें।

शुरूआत में डाक्टर ने उसे कुछ दवांए दीं और मेडिटेशन का सुझाव दिया पर इसका असर न होते देख उन्होनें उसकी कांउसलिंग कराने का निश्चय किया। उन्होनें एक बूढ़ी औरत को बुलाया जो उनके क्लीनिक पर पर्चा बनाने का काम करती थी ।

डाक्टर ने उस अमीर औरत से कहा – “मैनें इन्हें यहां यह बताने के लिए बुलाया है कि कैसे इन्होनें अपने जीवन में खुशियाँ ढूँढ़ी। मैं चाहता हूँ कि आप इनकी बातों को ध्यान से सुनिये।”

वह बूढ़ी औरत कह रही थी- “मैनें अपने पति को बहुत कम समय में ही किसी अज्ञात बीमारी के कारण खो दिया था और उसके कुछ महीने बाद ही मेरे बेटे की भी सड़क हादसे में मौत हो गई। मेरे पास कोई नहीं था। मेरे जीवन में कुछ नहीं बचा था। मैं सो नहीं पाती थी, खा नहीं पाती थी, मैंने मुस्कुराना बंद कर दिया था। “

“मैं अपना जीवन समाप्त करने की तरकीबें सोचने लगी थी। तभी एक दिन,जब मैं काम से घर वापस आ रही थी तब एक छोटा कुत्ते का बच्चा मेरे पीछे लग गया । बाहर बहुत ठंड थी इसलिए मैंने उस बच्चे को घर के अंदर आने दिया। उस कुत्ते के बच्चे के लिए मैनें थोड़े से दूध का इंतजाम किया ,वह भूखा था, उसनें तुरंत सारा दूध पी लिया फिर वह मेरे पैरों से लिपट गया और उनको चाटने लगा।”

उस दिन मैं बहुत समय बाद मुस्कुराई थी । तब मैंने सोचा अगर इस कुत्ते के बच्चे की सहायता करना मुझे इतनी खुशी दे सकता है, तो हो सकता है कि दूसरों के लिए कुछ करके मुझे और भी खुशी मिले। इसलिए अगले दिन मैनें अस्पताल में जाकर बीमार और असहाय लोगों को कुछ फल बांटे। मुझे ऐसा करके बहुत अच्छा महसूस हुआ।

इसके बाद मैं अक्सर कुछ ऐसा करने की कोशिश करती थी जिससे दूसरों को खुुशी मिले और उन्हें खुश देख कर मुझे खुुशी मिलती थी। आज, मैं खुशी से जिंदगी जी रही हूं, मैं अच्छा खाती-पीती हूं और चैन से सोती हूं। मैंने खुशियाँ ढूँढी हैं, दूसरों को खुुशी देकर।

उस बूढ़ी औरत की बात सुनकर वह अमीर महिला रोने लगी। उसके पास वह सब-कुछ था जो वह पैसे से खरीद सकती थी पर उसने वह चीज खो दी थी जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती है।

हमारा जीवन इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हमारे पास क्या है और हम कितने खुश हैं बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी वजह से कितने लोग खुश हैं। उस अमीर महिला की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे उसे आज वह मिल गया था जिसकी तालाश उसे न जाने कब से थी।

साभार : http://awgpskj.blogspot.com/?m=1

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