जो था ही नहीं उसको कहीं ढूंढ़ना था

जो था ही नहीं उसको कहीं ढूंढ़ना था,
दरकते हुए रिश्तों में यकीन ढूढ़ना था,
गुजरते हुए लम्हों में कहीं दिन ढल न जाए,
रात होने से पहले बहाना कोई हसीन ढूढ़ना था।

हाथों में खंजर लिए लोग आज छांव ढूंढते हैं,
शहर बसाकर गांव में सुकून ढूंढना था,
पत्थर के शहर में कच्चे मकान कहां हैं,
ज़हर में जीने का जुनून  ढूंढ़ना था।

उनके इश्क करने का अंदाज भी जुदा था,
खुद को खोना यहीं था और कहीं ढूंढ़ना था,
किसी बच्चे के मानिंद दिल ज़िद पे अड़ा था,
जो था ही नहीं उसको वहीं ढूंढ़ना था।

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