जिंदगी तुम कितने सवाल करती हो

जब भी करती हो बेमिसाल करती हो,

जिंदगी तुम जितने भी सवाल करती हो,

कहां खुशी मिलती है, कहां ग़म मिलता है,

लोगों को लगता है हर इंसान यहां बिकता है।

जैसे ही कुछ सम्हलता हूं फिर कमाल करती हो,

नई मुश्किलों से फिर हलाल करती हो,

ना रात रूकती है, ना दिन ठहरता है,

यहां वक्त भी किसी के लिए कहां रूकता है?

कभी ऐसे कभी वैसे निहाल करती हो,

कांटों में फूलों के जैसे ख्याल करती हो,

कुछ स्याह कुछ सफेद लकीरों ने घेरा है,

हर रात के बाद जीवन फिर नया सवेरा है।

कभी सीधे कभी तीखे सवाल करती हो,

अपनी चालों से मुझे बेहाल करती हो,

जब भी करती हो बेमिसाल करती हो,

जिंदगी तुम जितने भी सवाल करती हो।

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