जिंदगी चलती रही लोग मिलते रहे

जिंदगी चलती रही लोग मिलते रहे,

ठोकरें मिलती रहीं सपने बदलते रहे,

जो चला गया वो फिर लौटा कहाँ,

तारा कोई टूट गया लोग आसमान देखते रहे।

भागते बचपन में भी थे भागते हैं आज भी,

जरूरतें बदलती रहीं नये रास्तों पर हम चलते रहे,

गुज़ारने को गुज़ार रहे हैं जिंदगी तेरे बग़ैर भी,

जैसे ख्वाब कोई टूट गया और आँखें हम मलते रहे।

मिलता नहीं है जो क्यों है उसकी तलाश सी,

दिन गुजरता है बेवजह रातें भी हैं उदास सी,

कहती है जिंदगी ख़ुद को जऱा सम्हाल लो,

जवाब कभी मिले नहीं हम सवाल ही बदलते रहे।

तारीखें भी बदल गईं और बदल गए हालात भी,

मुश्किलें सिखाती रहीं सबक नए मिलते रहे,

सुना था भर जाते हैं वक्त के साथ पुराने ज़ख्म भी,

चोटें पुरानी छिप गईं निशान नए मिलते रहे।

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