जब साथ थे तुम मेरे तब धूप थी मुस्कुराती

जब साथ थे तुम मेरे,

तब धूप थी मुस्कुराती,

जब से तुम बदल गए हो,

तब से सुबह नहीं आती।

तेरा बिना भी मौसम,

हर साल बदल रहे हैं,

जब से तुम चले गए हो,

वो बरसात नहीं आती।

तुम्हारे बिना ये जीवन,

जैसे बेरंग पानी,

अगर कुछ मिला भी दूँ तो,

वो बात नहीं आती।

मोहब्बत के ये नियम,

सबके लिए अलग हैं,

कोई चैन से है सोता,

किसी को नींद नहीं आती।

अगर कभी मिले तो,

हाल ए दिल सुनाना,

ख़ामोशी समझा सके जो

वो किताब नहीं आती।

तेरी यादों ने कर दिया है,

बेहिसाब हमें तन्हा,

अब तो ख़ुद की महफ़िल भी,

हमें रास नहीं आती।

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