गुस्से को कम करने के लिये क्या किया जा सकता है?

क्रोध में आने पर किसी को न तो फोन करें और न ही किसी को मैसेज भेजें। इस दौरान आपकी नकारात्मक भावनाएं दिमाग पर हावी होती हैं। ऐसे में आप अच्छे शब्दों के बारे में सोच नहीं सकते हैं।

क्रोध में आने पर किसी भी प्रकार की बहस करने से बचें, क्योंकि क्रोध के दौरान बहस करने से आपके सामने कुछ ऐसी बातें आ सकती हैं, जिनके कारण आप हिंसक व्यवहार भी कर सकते हैं।

अपनी भावनाओं को समझने का प्रयास करिए आप किन बातों से भयभीत हैं? उन कारणों को व्यवाहारिक व सकारात्मक दृष्टि से समझने का प्रयास करिए।

मनोचिकित्सकों के अनुसार परेशान शख्स के अधिकांश भय काल्पनिक होते हैं। यदि आप उन भयों से रूबरू होने का प्रयास करते हैं तो काफी हद तक आपका भय जाता रहता है।

भावनात्मक दुखों को भुलाने के लिए किसी भी तरह के नशे का सहारा न लें। याद रखें ऐसे पदार्थ एक तरह का छलावा हैं। इनका सेवन दुख दूर करने के बजाय स्वास्थ्य बिगड़ता है एवं समस्या को और अधिक उलझाता है।

यदि आप आस्तिक हैं तो अपने आराध्य को याद करें। इससे आपके क्रोध के ठंडे बस्ते में जाने की संभावना बढ़ जाती है।

कारणों पर भी ध्यान देने का प्रयास करिए, जिनसे आप प्रसन्न होते हैं। इसी तरह जिन बातों से आप दुखी होते हैं, उन कारणों को भी समझने का प्रयास करिए।

अपने प्रति ईमानदार रहिये। सच से मुंह मत मोड़िए। यदि किसी बात को लेकर आप असमंजस में हैं तो इस स्थिति में अपने अंतर्मन की पुकार सुनने की कोशिश कीजिए।

अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिए। संतुलित पोषक आहार ग्रहण करिये। समय पर सोएं और जागें। नियमित रूप से व्यायाम करिये। सेहत अच्छी रहने से आप हरेक कार्य को आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं।

जिन कार्यों में आपकी दिलचस्पी है, उन्हें अंजाम दीजिए। व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर अपने शौक के लिए भी वक्त निकालना सीखिये।

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