कुछ तेरे इश्क ने हमको बदल दिया

कुछ तेरे इश्क ने हमको बदल दिया

कुछ खुद से ही बदलने का इरादा है

मुड़कर फिर अब ना देखूं तुझे

ख़ुद से किया हमने ये वादा है।

कभी बेरुख़ी ने तेरी तोड़ दिया,

कभी बेफिक्री से तूने मुँह मोड़ लिया,

टूटा ऐसे कि फिर जुड़ न सका,

कितना कच्चा तेरे-मेरे रिश्तों का धागा है।

अपना तो तुम कभी समझ न सके,

तुम्हे पाया कम खोया ज्यादा है,

गँवाकर अपना सबकुछ बेहोशी में,

गहरी नींद से अब कोई जागा है।

शायद था विधि का विधान यही,

अब क्या पूरा क्या आधा है,

जो नहीं लिखा था वो नहीं मिला,

जीवन का कोरा कागज़ अब भी सादा है।

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