किसी को जीने के लिए बस दो बहाने चाहिये

किसी को जिंदगी के लिए बस दो बहाने चाहिये,

किसी जीने के लिए दुनिया भर के खज़ाने चाहिये,

लोगों का क्या है, मिल ही जाते हैं सरे-राह में,

कभी-कभी सच बोलकर रिश्ते भी आजमाने चाहिये।

नासमझ दिल न जाने क्यों सच की जिद़ पे अड़ा था,

दुनिया को तो रोज़ झूठ के नये फ़साने चाहिये,

टूट गया था जो वो एक सपना ही तो था,

सूनी आँखों में फिर से नए सपने जगाने चाहिये।

बिना मतलब ही खुश हैं उन बातों पे लोग,

जिन बातों पे शायद उन्हें आँसू बहाने चाहिये,

किसी को जिंदगी के लिए बस दो बहाने चाहिये,

किसी जीने के लिए दुनिया भर के खज़ाने चाहिये।

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