किसी अपने ने तुझे छला है…

आँखें कह रही हैं,

किसी अपने ने तुझे छला है,

इतनी शिद्दत से तोड़ दे जो,

वो अजनबी नहीं बना है।

जो किया है दूसरों ने,

तूने भी वही किया है,

दिखा के सुनहरे सपने,

जख़्म सीने पे दिया है।

क्या हाल है हमारा,

ये अब न तुम पूछो,

जिस पर ऐतबार था हमारा,

कत्ल उसीने मेरा किया है।

बहता रहा हूँ संग तेरे,

बनके मैं खामोश पानी,

सवाल तो बहुत थे,

कभी जिक्र नहीं किया है।

एक दाग़ सुलग रहा था,

अब राख बन गया है,

यूँ कीचड़ न उछालो,

अभी हिसाब नहीं किया है।

नए खेल मत अब खेलो,

जज्बातों से किसी के,

यहाँ से बरी हुए हो,

उसने माफ़ नहीं किया है…

© abhishek trehan

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