कभी ख़ामोश रहूं मैं कभी कुछ तुम कहो ना…

कभी ख़ामोश रहूं मैं,

कभी कुछ तुम कहो ना,

कभी शब्द कोई लिखूं मैं,

कभी अर्थ तुम बनो ना।

है बेचैन मेरा दिल,

करार तुम बनो ना,

ढूंढ़ता हूं मैं तुमको,

मुझमें तुम रहो ना।

दुनिया तो वही है,

रास्ते अलग-अलग हैं,

संग मेरे न चल सको तो,

मेरी मँज़िल तुम बनो ना।

बड़ी लंबी गुफ़्तगू है,

वक्त बहुत कम है,

एक ज़िदगी काफ़ी नहीं है,

हर जनम में तुम मिलो ना।

कभी घाव पे नमक है,

कुछ इश्क में मिले सबक हैं,

दर्द बेशुमार बढ़ रहा है,

कोई दवा तुम बनो ना।

जब तुम साथ मेरे चलोगी,

तब ये दुनिया कुछ कहेगी,

है मेरी बस यही तमन्ना,

तुम मेरे ही रहो ना…

(स्वलिखित)

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