कभी झूठ भी अच्छा है

झूठ कब अच्छा है

लिपिडेमा एक प्रकार का विकार है जिसमें त्वचा के नीचे वसा की अत्यधिक जमावट के कारण दोनों पैरों का असमान्य तरीके से विस्तार होता है। आम तौर पर यह समय के साथ बदतर होता जाता है, दर्द मौजूद होता है, और लोगों को आसानी से चोट लगनेे की संभावना होती है। इस बीमारी का कारण अज्ञात है लेकिन माना जाता है कि आनुवंशिकी और हार्मोनल कारक इसके लिए जिम्मेदार हैं।

उसने पूछा, “क्या मैं सुंदर दिखती हूं?”

“हाँ। तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो। ” लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा।

वह लड़की लिपिडेमा से पीड़ित थी और उसका बढ़ता हुआ वजन उसके नियंत्रण में नहीं था।

वह जानता था कि वह पतली दिखना चाहती थी, लेकिन वह मजबूर थी।

उस लड़के के लिए उसकी आंतरिक सुंदरता महत्वपूर्ण थी। इसी कारण से उसने झूठ बोला।

झूठ बोलना सही है, जब आप इंसान की आत्मा को खरोंच नहीं पहुंचाना चाहते हैं।

हर कोई अच्छा दिखना चाहता है। लेकिन सभी भाग्यशाली नहीं होते हैं, कुछ लोग मजबूर हैं।

झूठ बोलिये, जब आप किसी को चोट नहीं पहुंचाना चाहते हैं।

झूठ बोलिये, जब आप किसी को डिमोटिवेट नहीं करना चाहते है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाता है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों की शांति को प्रभावित नहीं करता है।

झूठ बोलिये, जब यह दूसरों को बेहतर तरीके से सहज महसूस करता है।

कभी-कभी, हम अपनी भावनाओं को छिपाने के लिए झूठ बोलते हैं। ऐसा समय भी होता हैं जब झूठ बोलना हानिकारक नहीं होता है, खासकर, जब यह किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट लाता है, तो यह एक खूबसूरत झूठ होता है।

झूठ बुरा है यदि इसका इस्तेमाल हम अपने फायदे के लिए करते हैं। हालांकि, जब आप दूसरों के फायदे के लिए झूठ बोलते हैं, तो कभी-कभी यह सच से भी बेहतर साबित हो सकता है।


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