उम्मीदें

समीर एक कंपनी के सेल्स विभाग में कार्यरत है। उसके ऊपर टार्गेट अचीव करने का दबाव है। ऐसा भी नहीं है कि टार्गेट पहली बार मिले हों, उसने पहले भी टार्गेट पूरे किये हैं और उच्च अधिकारियों से प्रशंसा भी प्राप्त की है। पर इस बार बात कुछ अलग है, उसे लग रहा है कि वो इस बार टार्गेट अचीव नहीं कर पाएगा, उसका मन काम में नहीं लग रहा है। वह खोया खोया सा रहने लगा है, वह एक अज्ञात से भय से भयभीत है। निश्चित रूप से समीर के जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

वैशाली उसी कंपनी के अकाउंट्स सेक्शन में कार्यरत है। वह हमेशा ऊर्जा और उत्साह से भरपूर रहती है,वह दिये गये काम को अक्सर डेडलाइन से पूर्व ही कम्प्लीट कर लेती है। वह भविष्य को लेकर पूरी तरह आशान्वित है। उसका आत्मविश्वास उसके चेहरे पर दिखता है, वैशाली अपने जीवन से खुश और संतुष्ट है।

एक सी परिस्थितियां, एक सा माहौल, एक से अवसर, एक सा वर्क-कलचर किसी को प्रेरित करता है तो किसी को निराशा से भर देता है। किसी में उम्मीद जगाता है तो कोई उसी माहौल में नाउम्मीद हो जाता है। समीर और वैशाली दोनों की शिक्षा का स्तर, संख्यातमक, तार्किक और कम्यूनिकेशन स्किल्स एक से हैं फिर भी एक जीवन से खुश और दूसरा निराश है।

समीर की यह स्थिति उसके लिए खतरनाक है, ज्यादा समय तक वह काम को टाल नहीं सकता है। टार्गेट अचीव न करने की स्थिति में उसकी नौकरी संकट में पड़ सकती है वहीं दूसरी तरफ इस बात की पूरी संभावना है कि वैशाली को इस बार के अप्रेजल में प्रमोशन मिलेगा,वैशाली के काम से उच्च अधिकारी संतुष्ट हैं।

समीर की हताशा और वैशाली के उत्साह के पीछे अनेकों कारण हो सकते हैं जिनकी तुलना नहीं की जा सकती है फिर भी एक बड़ी वजह नजरिये की है। किन्हीं कारणों और परिस्थितियों के कारण समीर का नजरिया नकारात्मक हो गया है और इसका उसके आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उसे अपनी समस्याएं पहाड़ जैसी नजर आ रही हैं, उसका सारा ध्यान समस्याओं का सामना करने में नहीं बल्कि उनको टालने में लगा हुआ है, निश्चित रूप से समीर का यह नजरिया उसे ज्यादा दिन तक बचा नहीं पाएगा।

समीर को इस स्थिति से बाहर कौन निकाल सकता है? निश्चित रूप से उसे अपनी सहायता स्वयं करनी पड़ेगी। उसे अपना खोया हुआ आत्मविश्वास पाने में अपने करीबी लोगों की भी आवश्यकता पड़ेगी, वह यह कैसे कर सकता है? इसका सबसे बेहतर तरीका है अपने बेसिक्स की तरफ वापस लौटना, अपनी ताकत को पहचानना, जो आपके करीब हैं उनसे अपनी बात शेयर करना और उनका समर्थन हासिल करना।

समीर की तरह हम सभी की जिंदगी में भी ऐसी परिस्थितियां आती रहती हैं जब हम जिदंगी में बहुत निराश हो जाते हैं। तब भी कुछ ऐसा है जो हमें प्रेरित कर सकता है। उस कठिन समय में आवश्यकता होती है खुद को पहचानने की, अपनी ताकत को बटोरने की,उस समय आवश्यकता होती है जिजीविषा की, जीवटता की और जिन्दगी को जीने की। जब भी आपके सामने ऐसा वक्त आ जाए तो खुद को यह याद दिलाते रहिये कि- जब सब कुछ समाप्त हो जाता है फिर भी एक चीज बची रहती है उसे भविष्य कहते हैं। आपका भविष्य आपके हाथ में है उसे कोई नहीं छीन सकता है. यही मोटिवेशन का मूल आधार  है।


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