आप वैलेंटाइन दिवस पर उनसे क्या कहना चाहते हैं?

तुम वो तारीख़ हो,जो कभी बदलती नहीं,

मैं वो लहर हूं,जो कहीं पर ठहरती नहीं,

एक डर है तुम्हें पाकर फिर खो न दूं,

तुम बनके बारिश मुझ पर क्यों बरसती नहीं।

तुम हो वजह जीने की और सबब मरने का,

तुम बन के साया मुझ में ही क्यों बसती नहीं,

ढूंढ़ता फिर रहा हूं तुम्हे दर- ब-दर,

तुम कहां खो गई हो,क्यों दिखती नहीं।

दूरियों ने बढ़ा दिया है यादों का हौसला,

तुम बनके खु़शबू क्यों मुझमें महकती नहीं,

रात पर छा रहा है ये कैसा नशा,

तुम बन के हवा क्यों फिज़ा में चहकती नहीं।

ना रूका था ना रूकेगा, कभी किसी के

फ़ितरत इस दिल की कभी बदलती नहीं,

तेरी सोहबत की रहती है मुझको तलब,

ग़ैरों की महफ़िल में तबीयत अब बहकती नहीं।

तेरे बिना जीने में अब नहीं है मज़ा,

रातें भी हैं बेबस और धुंधली है हर सुबह,

मिल जाओ मुझे तुम बादलों की तरह,

पानी से प्यास अब बुझती नहीं…

(स्वलिखित)

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