यादें

एक वो जमाना था
जिसमें खुशियों का ठिकाना था
आसमान छूने की ख्वाईश थी
हर एक सपना सुहाना था।

ना दुनियादारी की बंदिशें थीं
ना दौलत का पैमाना था
बस मिट्टी की खुशबू थी
हर एक दोस्त पुराना था।

मां-पापा की डांट में
प्यार भरा अफसाना था
कागज़ की कश्ती थी
लहरों के उस पार जाना था।

रूठने-मनाने के खेल में
छिपा एक बहाना था
तेज भागती जिंदगी में
दिल बचपन का दीवाना था।

उम्मीदें

जब कोई इंसान टूटता है तो केवल उसका दिल ही नहीं टूटता है बल्कि उसके साथ-साथ बहुत कुछ है जो टूट जाता है।

बहुत सारी उम्मीदें टूट जाती हैं।

दूसरों पर से भरोसा टूट जाता है।

उस व्यक्ति की छवि टूट जाती है।

बहुत से सपने टूट जाते हैं।

चीजों को देखने का नजरिया टूट जाता है।

हमारा आत्मविश्वास टूट जाता है।

दिल हमेशा वह पाना चाहता है जो कि वह चाहता है। समस्या मन को चुप रखने में होती है। और दिल और दिमाग की यह लड़ाई हमेशा ही सबसे कठिन होती है।

यह दर्द लोगों में एक शून्य बनाता है और उस शू्न्य को भरने के उनके पास 3 विकल्प होते हैं-

उदासीनता या अवसाद, और इसे खुद को नष्ट करने दें।

नफरत या खुशी, और इसे खुद को परिभाषित करने दें।

मिलने वाले सबक, और इसे खुद को मजबूत करने दें।

जो भी विकल्प आप चुनिये, आप पहले जैसै व्यक्ति कभी भी नहीं होंगे।

दिल का टूटना किसी लकड़ी से कील निकालने जैसा है। कील अपने निशान लकड़ी पर छोड़ जाती है और वह लकड़ी कभी भी पहले जैसी नहीं रह जाती है।

जीनियस

अल्बर्ट आइंस्टीन अपने काम में इतना डूबे रहते थे कि उनका ध्यान अपनी वेशभूषा पर कम ही रहता था उनकी पत्नी अक्सर उनसे कहा करती थीं कि जब भी वो काम जाएं तो उन्हें प्रोफेशनल कपड़े पहनने चाहिए ऐसा कहने पर वह प्रत्युत्तर में कहते थे ” मुझे ऐसा क्यों करना चाहिए वहां तो हर कोई मुझको जानता है।”

एक बार जब आइंस्टीन को एक बड़ी कॉन्फ्रेंस में जाना था तो उनकी पत्नी ने उनसे पुनः एक बार आग्रह किया कि आप कॉन्फ्रेंस में प्रोफेशनल कपड़े पहन कर जाएं प्रत्युत्तर में आइंस्टीन ने कहा “मुझे ऐसा क्यों करना चाहिए वहां तो मुझे कोई नहीं जानता है।”

आइंस्टीन से अक्सर जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को एक्सप्लेन करने के लिए कहा जाता था वह अक्सर इसे एक उदाहरण देकर समझाते थे वे कहते थे “आप अपना हाथ यदि 1 मिनट के लिए जलते हुए स्टोर के ऊपर ले जाएं तो आपको प्रतीत होगा कि मानो यह करते हुए एक घंटा बीत गया है वही दूसरी तरफ यदि आप किसी खूबसूरत लड़की के साथ एक घंटा बिताते हैं तो आपको ऐसा महसूस होगा मानो यह 1मिनट पहले की बात है,यही थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी है।”

जब अल्बर्ट आइंस्टाइन प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में काम करते थे तो एक बार घर लौटते समय वह अपने घर का पता भूल गए तब उन्होंने अपनी कैब के ड्राइवर से पूछा क्या तुम आइंस्टीन का घर जानते हो?ड्राइवर ने उत्तर दिया यहां प्रिंसटन में आइंस्टीन को कौन नहीं जानता? क्या आप उनसे मिलना चाहते हैं? आइंस्टीन ने कहा मैं ही आइंस्टीन हूं, मैं अपने घर का पता भूल गया हूं, क्या आप मुझे मेरे घर तक पहुंचा सकते हैं?ड्राइवर ने उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचा दिया और उनसे गाड़ी का किराया भी नहीं लिया।

आइंस्टीन एक बार प्रिंसटन से रेल की यात्रा कर रहे थे गाड़ी चलने के थोड़ी देर बाद टिकट चेकर आया और सभी यात्रियों से टिकट मांग कर चेक करने लगा जब वह आइंस्टीन के पास आया और उन से टिकट मांगा तो आइंस्टीन ने अपनी जेब में हाथ डाले पर उन्हें वहां टिकट नहीं मिला फिर उन्होंने सीट के नीचे देखा उसके बाद अपने ब्रीफकेस में देखा लेकिन उन्हें टिकट कहीं नहीं मिला उन्हें असमंजस में देखकर टिकट चेकर ने कहा डॉक्टर आइंस्टीन मैं जानता हूं आप कौन हैं मैं निश्चिंत हूं कि आपने टिकट अवश्य खरीदा होगा इसके बारे में आप निश्चिंत रहिए। टिकट चेकर ऐसा कहकर आगे बढ़ गया और दूसरे डिब्बे में जाकर यात्रियों के टिकट चेक करने लगा।

थोड़ी देर बाद जब टिकट चेकर वापस लौटा तो उसने देखा आइंस्टीन अपने घुटनों के बल ट्रेन के फर्श पर बैठकर अपनी बर्थ के नीचे अपना टिकट ढूंढ रहे हैं उसने पुनः कहा मैं जानता हूं आप कौन हैं आपने अवश्य ही ट्रेन का टिकट खरीदा होगा इसके बारे में आप निश्चिंत रहिए प्रत्युत्तर में आइंस्टीन ने कहा यंग मैन मैं भी जानता हूं कि मैं कौन हूं पर मैं यह नहीं जानता कि मैं कहां जा रहा हूं इसीलिए मैं अपने टिकट को ढूंढ रहा हू।

एक बार जब आइंस्टीन की प्रसिद्ध कलाकार चार्ली चैपलिन से मुलाकात हुई तो आइंस्टीन ने कहा मैं आपकी कला के बारे में जो चीज सबसे ज्यादा पसंद करता हूं वह यह है कि यह सर्वव्यापी है आप एक भी शब्द नहीं कहते लेकिन पूरी दुनिया आपको समझ लेती है। प्रत्युत्तर में चार्ली चैपलिन ने कहा यह सत्य है लेकिन आपकी लोकप्रियता तो और भी बड़ी है लोग आप को नहीं समझते हैं लेकिन फिर भी पूरी दुनिया आपकी प्रशंसा करती है।

“ज़िंदगी” का रहस्य

कोई मीलों चलता है रोटी कमाने के लिए,

कोई मीलों चलता है उसे पचाने के लिए।

किसी के पास खाने को दो वक्त की रोटी नहीं,

किसी के पास दो रोटी खाने को वक्त नहीं।

कोई अपनों को पाने के लिए सब कुछ छोड़ देता है,

कोई सब कुछ पाने के लिए अपनों को छोड़ देता है।

कोई दौलत कमाने के लिए सेहत खो देता है,

कोई खोई सेहत पाने के लिए कमाई दौलत खो देता है।

कोई जीता ऐसे है कि कभी मरेगा ही नहीं,

कोई मरता ऐसे है मानो कभी जिया ही नहीं।

कोई चुप रहकर भी बहुत कुछ कह जाता है,

कोई बहुत कुछ कहके भी मतलब नही समझा पाता है।

कोई पत्थर मंदिर में जाकर भगवान बन जाता है,

कोई इंसान रोज मंदिर जाकर पत्थर ही रह जाता है।

कुछ बातें जो तुम्हे सीखनी होगीं

मेरा एक मित्र है। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत है, कुछ समय पहले वह कंपनी के मुख्यालय में एक सेमिनार में हिस्सा लेने गया हुआ था, सेमिनार का विषय Ethical Practices in your Work Life था। सेमिनार में बताया गया था कि हमें कैसे अपने कार्यों को ईमानदारी से करना चाहिए, सफलता के लिए शार्टकट से बचना चाहिए और लालच में न पड़ कर सही रास्ते पर चलना चाहिए। निश्चित रूप से सेमिनार में बतायी गयी बातें बेहद प्रेरक थीं।

सेमिनार से लौटने के कुछ दिनों बाद उसे अपने जूनियर के साथ देश के एक पिछड़े हुए जिले के रूरल मार्केट में जाना था और कंपनी को मार्केट में संभावनाओं की रिपोर्ट देनी थी। मार्केट में घूमते हुए वो एक दुकान पर गया वहां उसने देखा दुकान की सेल्फ पर उसकी कंपनी के कुछ प्रॉडक्ट रखे हुए हैं जिनके उपयोग की समय सीमा या expiry date काफी समय पहले बीत चुकी है. उसने दुकानदार से कहा ऐसे प्रोडक्ट जिनके उपयोग की तिथि समाप्त हो गई हो को बेचना लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने जैसा है, उसे उन प्रोडक्ट को तुरंत हटाकर कंपनी को वापस भेज देना चाहिए।

दुकानदार उसे आश्चर्य के साथ देखने लगा, उसने कहा साहब यह रूरल मार्केट है- यहां सब कुछ बिकता है जो माल शहरों में नहीं बिक पाता उन्हें कंपनी यहां बिकने के लिए भेज देती हैं।यहां लोगों को यह तक नहीं पता कि उत्पादों की expiry date भी होती है। यहां माल अपकी कंपनी द्वारा आथराइजड एजेंसी से सप्लाई किया जाता है। पुराने माल को खपाने के लिए कंपनी हमें extra Scheme देती है, शुरूआत में एक बार पुराना माल वापस किया था उसका क्लेम आज तक नहीं मिल पाया है। आपके पहले जो साहब आते थे वो हमेशा sales बढाने को कहा करते थे।

अब आश्चर्यचकित होने की बारी मेरे मित्र की थी, वह बिना कुछ कहे वापस लौट आया उसने अपनी रिपोर्ट बनाई और मैनेजमेंट को सब कुछ लिख कर भेज दिया। उसे उम्मीद थी कंपनी इस गलत काम के खिलाफ कार्रवाई करेगी और कठोर एक्शन लेगी. कुछ दिनों के पश्चात उसे अपनी कंपनी की तरफ से मेल आया. उसमें लिखा था कि कंपनी को emotional नहीं practical लोगों की आवश्यकता है, कंपनी को उसकी सेवाओं की अब जरूरत नहीं है। उसकी नौकरी जा चुकी थी।

कुछ समय बाद मेरा वही मित्र अपने बेटे के स्कूल में पैरंट्स – टीचर मीटिंग में गया था।वहां टीचर ने उससे कहा था कि उसका बेटा स्कूल में झूठ बोलता है, वह दूसरे बच्चों की चीजें छीन लेता है और समझाने पर बहाने बनाता है और खुद को सही ठहराने की कोशिश करता है। टीचर कह रही थी कि उसके बेटे में moral values की कमी है, बच्चे मां – बाप से सीखते हैं. उसे घर पर बच्चे को ईमानदारी, सच्चाई और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता के बारे में सिखाना चाहिए. मेरा मित्र बिना कुछ कहे वहां से चला आया उसकी आँखों में आँसू थे।

 कुछ दिन पहले मुझसे मिलने आया था.तभी उसने मुझसे अपने दोनों अनुभव साझा किये थे। वह बहुत परेशान लग रहा था उसने मुझसे कहा था कि यार दुनिया में बहुत असमानता है, हर तरफ अनीति है, अन्याय है, वह कह रहा था हर जगह सत्य उपेक्षित है, आज की दुनिया में सही रास्ते पर चलने का धैर्य किसी में नहीं हर कोई झूठ का शार्टकट लेकर मंजिल पर पहुंचना चाहता है।

हम जिस तरह के माहौल में जी रहे हैं वो झूठ का है, छल और कपट का है। हम जैसे माहौल में रहते हैं वैसे ही हमारे विचार हमारी सोच बन जाती है। मै उसकी बातों से सहमत था वह जो कह रहा था वही दुनिया की हकीकत है फिर उसने जो मुझसे कहा वो बड़ा महत्वपूर्ण था उसने कहा कि यार जो मैं नहीं हूँ अपने बेटे को वैसा बनने के लिए कैसे कहूं? जिन रास्तों को मैं छोड़ आया हूँ उन रास्तों को पर अपने बेटे को चलने के लिए कैसे कहूं? मैं उसे कैसे समझाऊँ कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता है? वो मेरी तरफ देख रहा था उसकी आँखों में आँसू थे।

मैं निरउत्तर था। मेरा मित्र परेशान था। वह एक तरह के ethical dilemma में था, वह अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित था। काफी सोच विचार करने पर भी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। जब काफी समय बीत गया और बुद्धि कोई निर्णय नहीं कर पाई तो मैंने उससे से कहा कि तुम वही करो जो तुम्हे पहले से पता है, तुम अपने बेटे को वही बताओ जिसका तुम अनुभव कर चुके हो.. तुम उसे बता दो कि यह दुनिया कठोर है और बुरे लोगों से भरी पड़ी है, उसे बता दो यहां हर कदम पर अन्याय है और असमानता है, उसे बताओ कि सत्य यहां परेशान होता है।

मैने आगे कहा पर मैं चाहता हूं कि तुम साथ में उसे यह भी बताओ कि हर बुरे इंसान के पास भी अच्छा ह्रदय हो सकता है, उसे बताओ कि हर स्वार्थी नेता में एक अच्छा लीडर बनने की संभावना छिपी होती है, उसे बताओ कि मेहनत से मिलने वाला एक रूपया भी सड़क पर मिलने वाले पांच सौ के नोट से ज्यादा कीमती होता है। यह सब सिखने में उसे वक्त लगेगा पर उसे खुद पर विश्वास करना सिखाओ और दूसरों पर भरोसा करना भी क्योकि तभी वह एक अच्छा इंसान बन पाएगा.. ये बातें बड़ी हैं और लम्बी भी पर उसे बता दो यह उसके लिए अच्छा होगा। तुम्हारे जैसा मेरा भी एक बेटा है जो अभी बहुत छोटा है और प्यारा भी…

भूल

जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी घटती हैं जो हमारे नजरिये को बदल कर रख देती हैं ऐसा ही कुछ राधिका और सिद्धार्थ के जीवन में भी घटित हुआ था। उस दिन उनकी शादी की सालगिरह थी, राधिका ने उस दिन सिद्धार्थ को विश नहीं किया वो पति के रिस्पॉन्स को देखना चाहती थी। उस दिन सिद्धार्थ सुबह जल्दी उठा और बिना कुछ कहे घर से बाहर निकल गया। राधिका रुआँसी हो गई उसे लगा सिद्धार्थ आज के दिन उसे इग्नोर कर रहा है।

दो घण्टे बाद घर की कॉलबेल बजी, राधिका दौड़ती हुई गई और जाकर दरवाजा खोला । दरवाजे पर गिफ्ट के पैकेट और उसकी पसंद के फूलों के बुके के साथ सिद्धार्थखड़ा मुस्कुरा रहा था। सिद्धार्थ ने उसे गले से लगा लिया और सालगिरह को विश किया। फिर वह बिना कुछ कहे अपने कमरे मेँ चला गया।

राधिका गिफ्ट का पैकेट खोल कर देखने लगी तभी उसके मोबाइल फोन पर घंटी बजी उसके पास स्थानीय पुलिस स्टेशन से फोन आया था फोन पर पुलिस वाला कह रहा था कि सारी मैम बहुत दुख के साथ आपको बताना पड़ रहा है कि आपके पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, उनकी जेब में पड़े पर्स से आपका फोन नम्बर ढूढ़ कर आपको कॉल किया है।

राधिका के हाथ से फोन छूट कर जमीन पर गिर पड़ा उसे इस खबर पर सहसा विश्वास ही नहीं हुआ वह सोचने लगी की सिद्धार्थ तो अभी-अभी घर के अन्दर आये हैं और मुझे गले लगाकर विश भी किया है जरूर पुलिस वालों को कोई गलतफहमी हुई है । तभी उसके दिमाग में एक बात बिजली की तरह कौँध गई उसे कहीं पर सुनी एक बात याद आ गई कि मरे हुये इन्सान की आत्मा अपनी विश पूरा करने एक बार जरूर आती है।

राधिका बदहवास होकर दहाड़े मारकर रोने लगी। उसे सिद्धार्थ से अपना वो मिलना, प्यार , लड़ना, झगड़ना, नोक-झोंक सभी कुछ याद आने लगा। उसे अपने ऊपर पश्चतचाप होने लगा कि अन्तिम समय में भी वो सिद्धार्थ को प्यार ना दे सकी।

वो बिलखती हुई जब अपने कमरे में पहुंची तो उसने देखा सिद्धार्थ वहाँ नहीं था। वो चिल्ला चिल्ला कर रोती हुई सिद्धार्थ की तस्वीर के सामने खड़े होकर प्लीज कम बैक, कम बैक सिद्धार्थ कहने लगी, वह रोते हुए कह रही थी कि सिद्धार्थ तुम एक बार वापस आ जाओ मै अब कभी भी तुमसे नहीं झगड़ूंगी।

ठीक उसी वक्त बाथरूम का दरवाजा खुला और किसी ने से उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा क्या हुआ? राधिका ने पलट कर देखा तो उसके पति सिध्दार्थ उसके सामने खड़े थे। वो रोती हुई उनके सीने से लग गई उसने सुबुकते हुए सिद्धार्थ से सारी बात बताई ।

तब सिद्धार्थ ने बताया कि आज सुबह जब वो उसके लिए शादी की सालगिरह का गिफ्ट लेने के लिए गए थे तो रास्ते में उनका पर्स कहीं गिर गया था फिर एक दोस्त से पैसे उधार लेकर उन्होंने गिफ्ट खरीदा था । जिस व्यक्ति को उनका बटुआ मिला होगा लगता है उसकी दुर्घटना में मौत हो गई है।

जिन्दगी में किसी की अहमियत तब पता चलती है जब वो हमारे साथ नही होता है, राधिका और सिद्धार्थ को तो जिंदगी ने दूसरा मौका दे दिया पर जिन्दगी की करवटें सभी को भूल सुधार का मौका नहीं देती हैं। थोड़ा झुककर लोगों को माफ़ कर देना अच्छा है क्या पता दुबारा पश्चाताप का मौका भी मिले न मिले।

जो सच अक्सर हम देख नहीं पाते हैं

पवन के पिता का देहांत हुए कई वर्ष गुजर चुके थे। उसकी मां राधा लोगों के घरों में काम करके किसी तरह पवन की पढ़ाई का खर्च उठा रही थी। राधा का एक ही सपना था कि पवन पढ लिख कर अच्छा इंसान बने। पर स्कूल से प्रतिदिन आने वाली शिकायतों ने राधा को विचलित कर दिया था।

आज पवन फिर गंदी ड्रेस में देरी से स्कूल पहुंचा था। यह प्रतिदिन का क्रम बन गया था। वह रोज गंदे कपड़ों में देरी से स्कूल पहुंचता था और इस कारण टीचर द्वारा उसे रोज सजा मिलती थी। उसकी इस आदत के बारे में कई बार उसके घर में भी शिकायत की गई थी और टीचर ने कई बार बार उसे समझाया भी था पर पवन न जाने किस मिट्टी का बना हुआ था कि उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं पड़ता था।

राधा को लगता था कि पवन रोज स्कूल देर से पहुंचता है और रोज घर भी देर से आता है हो न हो पवन अवश्य ही रास्ते में खेल-कूद में लग जाता है और इसी वजह से उसकी ड्रेस भी गन्दी हो जाती है। उसने पवन को हर तरह से समझाया था पर पवन था कि उस पर इन बातों का कुछ भी असर नहीं पड़ रहा था।

समय पंख लगा कर उड़ रहा था। एक दिन सुबह के समय पवन के क्लास टीचर सब्जी लेने के लिए थोक मंडी गए हुए थे। अचानक उनकी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना स्कूल में उनसे मार खाता था। वह देख रहे थे कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और बड़े दुकानदार जब अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो कुछ सब्जियां ज़मीन पर गिर जाती थीं जिन्हें वह बच्चा फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता था। यह बच्चा पवन था।

यह नज़ारा देख कर मास्टर जी कुछ परेशानी में पड़ गए वह सोच रहे थे कि ये माजरा क्या है, भला पवन क्यों गिरी हुई सब्जियों को इकट्ठा करके झोली में भर रहा है? वे पवन का चोरी चोरी पीछा करने लगे। उन्होंने देखा कि जब पवन की झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह उसे ले जाकर मुख्य सड़क के किनारे बैठ कर ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा सब्जी बेचने के लिए लोगों को पुकारने लगा । पवन के मुंह पर सब्जियों की मिट्टी लग गई थी और उसकी ड्रेस भी धूल से गन्दी हो गई थी। मास्टर जी ने देखा पवन की आंखों नम थीं, ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में वे पहली बार देख रहा थे ।

तभी कुछ एेसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी को भी नहीं थी। अचानक एक आदमी जिसकी दुकान के सामने पवन ने अपनी नन्ही सी दुकान लगा रखी थी उठकर पवन के पास आया उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही सी दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाहों से पकड़ कर पवन को भी जोर से धक्का दे दिया।

पवन की आखों में आंसू आ गए उसने चुपचाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा किया और थोड़ी देर बाद अपनी सब्जी लिए एक दूसरी दुकान के सामने सहमे मन के साथ खड़ा हो गया। पवन के पास थोड़ी सी सब्ज़ी थी और कीमत बाकी दुकानों से कम थी इसलिए जल्द ही बिक्री हो गयी, पवन उठा और बाज़ार में एक कपड़े की सिलाई वाली दुकान में दाखिल हुआ उसने दुकानदार को कुछ पैसे दिए और फिर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और स्कूल की तरफ चल पड़ा।

अगली सुबह पवन के क्लास टीचर पवन के घर पहुंचे पवन घर से निकल गया था और घर पर उसकी माँ ही थीं पवन के टीचर को देखकर राधा थोड़ा चौंक गयीं उसे लगा आज फिर पवन की शिकायत करने उसके घर आये हैं। राधा को कुछ कहने का बिना कोई मौका दिये मास्टर जी बोल पड़े बहनजी आप मेरे साथ चलो मै आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल देर से क्यों जाता है।

राधा तुरंत मास्टर जी के साथ चल पड़ी और कहने लगी आज इस लड़के की खैर नहीं मैं उसे छोडूंगी नहीं आज,मास्टर जी राधा के साथ मंडी पहुंच गए और वे लोग पवन की गतिविधियों को चुपचाप छुप कर देखने लगे। आज भी पवन लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े, और आखिरी में पवन अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल गया। पवन ने दुकानदार को पैसे दिए और आज दुकानदार उसे एक लेडीज सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट लेलो,उसने सूट को लेकर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया।

आज भी वह एक घंटा देर से स्कूल पहुचा था, वह सीधा क्लास टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रखकर मार खाने के लिए आगे बढ़ा दिए, टीचर कुर्सी से उठे और फौरन उसको को गले से लगाकर जोर से रोने लगे अचानक पवन की नज़र उसकी माँ पर पड़ी जो क्लासरूम के एक कोने में खड़ी होकर लगातार रो रही थी।

टीचर ने अपने आप को किसी तरह संभाला और पवन से पूछा कि तुम्हारे स्कूल बैग में जो सूट है वह किसके लिए है?

अब रोने की बारी पवन की थी उसने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ बड़े लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं उसके पास अपने शरीर को पूरी तरह से ढांपने वाले कोई कपड़े भी नहीं हैं और मेरी माँ के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वह नया सूट खरीद सके इसीलिए मैंने अपने पैसों से माँ के लिए यह सूट खरीदा है।

राधा से जब रहा न गया तो उसने पवन को खींचकर सीने से लगा लिया और जार जार रोने लगी मां को रोते हुए देख पवन अपने छोटे -छोटे हाथों से मां के आंसू पोछते हुए कहने लगा माँ तुम रो मत अब तुम्हारा बेटा बड़ा हो गया है। जाड़े के दिन थे और खिड़की के बाहर सूरज ढलने लगा था, दूसरी क्लास के टीचर और बच्चे भी अब कमरे में आ चुके थे। सभी की आखें नम थीं और हर कोई निशब्द खड़ा था, आज शब्दों की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि आसूं आज संवेदनाओं को शब्दों से भी बेहतर व्यक्त कर रहे थे।

शिकायत

बहुत से लोगों को अपने जीवन से शिकायत रहती है कि जीवन में उन्हें जो कुछ मिला है वह कितना अनुचित और अपर्याप्त है। जीवन अनुचित है इसके बारे में तो लोग काफी कुछ कहते हैं पर कुछ चीजें जो उन्हें सिर्फ खुशकिस्मती से मिल जाती है उस बारे में कुछ कहना तो दूर सोचते तक नहीं हैं।

ऐसे बहुत सारे उम्मीदवार हैं जो मुझे पता है कि तुम्हारे मुकाबले ज्यादा स्मार्ट और अधिक योग्य हैं। तुमको यहाँ नहीं होना चाहिए था मेरे बैच मेट्स को तुम जैसे लोगों की तुलना में यहां होना चाहिए था। तुम्हारे जैसे लोग आते हैं और इस संस्थान की प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं। तुमको पता होना चाहिए कि वे तुमको यहां सिर्फ विविधता के लिए लाए हैं और आप वास्तव में इसके लायक नहीं हैं।

कुछ ऐसे ही शब्दों से अमित का स्वागत देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट कालेज में हुआ था उसकी गलती बस इतनी ही थी कि वह छोटे से शहर से था और उसने साधारण से कालेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था।

यह सुनने के बाद अमित की प्रारंभिक प्रतिक्रिया क्रोध मिश्रित सदमा था फिर वह उदास हो गया उसे लगने लगा कि वह सही था। और फिर अमित के दिमाग में अचनाक कुछ क्लिक किया और वह निश्चिंत औऱ शांत हो गया।

कभी-कभी जीवन में आप भाग्यशाली होते हैं और अच्छे भाग्य से उन अवसरों को पा जाते हैं जिनके कि आप बिल्कुल हकदार नहीं हैं। जो मिला है उसेे गले लगाइये उनमें और चुनौतियों से दूर मत भागिये।

हममें से कुछ लोग केयरिंग और देखभाल करने वाले माता-पिता के यहां पैदा होते हैं जबकि हजारों लोग अनाथ होते हैं।

हममें से कुछ लोग जीवन भर के लिए दोस्त बनाते हैं जबकि लाखों लोग अकेले रहते हैं और अकेले मर जाते हैं।

हममें से कुछ लोग जीवन में प्यार को पाते हैं जबकि हजारों का दिल टूट जाते हैं।

हम में से कुछ को आज भरपेट खाना नसीब होगा जबकि लाखों लोगों आज भूखे ही सो जाएंगे।

हममें से कुछ उस सफलता को प्राप्त करेंगे जिसे वे शायद डिजर्व नहीं करते हैं जबकि हजारों लायक पीछे छूट जाएंगे।

हम में से कुछ जीवन से खुश और संतुष्ट रहेंगे जबकि अधिकांश दुखी और निराश ही रह जाएंगे।

निशब्द

एक छोटी लड़की अपने पिता के साथ मंदिर गयी थी। तभी मंदिर के प्रवेश द्वार पर उसने शेर की प्रतिमा को देखा उस पत्थर के शेर को देखकर वो छोटी सी बच्ची डर गयी और रोते हुए कहने लगी पापा जल्दी से यहां से चलो नहीं तो ये शेर हमें मारकर खा जायेगा। उसके पिता ने बच्ची को गोद में उठा लिया और उसे समझाते हुए कहने लगे मुन्नी डरो नहीं ये शेर तो पत्थर का है ये हमारा कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा।

मंदिर में मूर्ति के दर्शन के बाद वे दोनों बाहर आ गये। मंदिर के बाहर एक अपाहिज बैठा हुआ था उसके साथ एक छोटा लड़का भी था वे मंदिर के बाहर आने वाले हर व्यक्ति से कुछ मांग रहे थे और मिलने वाले पैसों और प्रसाद को अलग – अलग थैलों में डाल रहे थे।

जब पिता और पुत्री उस अपाहिज व्यक्ति के पास से गुजरे तो उसने अपना हाथ आगे कर दिया पिता ने अनमने भाव से पांच रूपये का सिक्का निकाला और उस अपाहिज के पास फेंक दिया तभी वो छोटा सा लड़का दौड़कर थैला लेकर आया और इशारे से थैले में प्रसाद डालने के लिए आग्रह करने लगा। पिता ने बच्ची को गोद में उठाया और उस लड़के को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए। ये शहर के प्रतिष्ठित वकील सुधीर चक्रवर्ती और उनकी बेटी पालकी थे।

सुधीर अभी पार्किंग में खड़ी हुई अपनी गाड़ी के पास पहुंचे ही थे कि न जाने कहां से वही लड़का दौड़ता हुआ आया और उनका हाथ पकड़ कर खींचने लगा सुधीर को लगा कि वह उनसे प्रसाद देने की जिद कर रहा है उन्हें लड़के का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और उन्होंने को बिना कोई मौका दिये अपना हाथ झटके के साथ छुड़ाया और लड़के के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया।

सुधीर के इस व्यवहार से हतप्रभ वह लड़का वहीं जमीन पर गिर पड़ा उसकी आँखों में आँसू आ गए । सुधीर ने देखा कि वह अपाहिज भिखारी दूर से ही उन्हें रूकने का इशारा करते हुए जमीन पर घिसटते हुए तेजी से उनकी तरफ चला आ रहा है। अब तक थोड़ी भीड़ भी तमाशा देखने के लिए जुट गई थी। सुधीर को महसूस हुआ कि बात बढ़ गई है और उन्होंने सौ रुपए का नोट उसे देने के लिए निकाल लिया वह लोगों से पैसा लूटने की इन लोगों की इस नई चाल को समझ चुके थे।

वह बूढा अपाहिज भिखारी सुधीर के पास आकर हाथ जोड़कर कहने लगा बाबूजी लगता है कि इस लड़के से कोई गलती हो गई है इसे माफ कर दीजिए, यह लड़का बोल नहीं सकता है। इसे मैंने ही आपको बुलाने के लिए भेजा था दरअसल आपकी बिटिया की चांदी की पायल मंदिर में गिर गई थी जिसे यह बच्चा उठाकर मेरे पास ले आया उसे वापस करने के लिए ही इसे मैंने आपको बुलाने के लिए भेजा था।

सुधीर अपने बिस्तर पर लेटे हुए करवटें बदल रहे थे उन्हें आज नींद नहीं आ रही थी रह रह कर उस अपाहिज भिखारी और उसके गूँगे लड़के का चेहरा उनकी आखों के सामने आ जाता था। सुधीर ने देखा कि पालकी भी अभी जाग रही है उन्होंने उसे अपने पास बुलाया और प्यार से पूछा बिटिया रानी ये बताओ कि मंदिर में तुमने आज भगवान से क्या माँगा? पालकी ने कहा कुछ नहीं मांगा क्योंकि शेर की प्रतिमा की तरह ही मंदिर में भगवान भी पत्थर के थे।

सुधीर चुपचाप उठे और अपनी डायरी में आज की तारीख डालकर लिखने लगे आज मैं अपनी बेटी के उत्तर के सामने निशब्द और निरूउत्तर हूं। मैं आज तक ईश्वर को मंदिर में पत्थरों में खोज रहा था पर आज पता चला कि वो वहीं मंदिर के बाहर इंसानों में इंसानियत के रूप में मौजूद था जिसे पहचानने में मुझसे गलती हो गई थी।

दुनिया में कुछ सबसे आसान काम क्या हैं?

1- खुद की निजी परेशानियों पर ध्यान ना देकर अपनी कमियों का कुसूरवार दूसरों को ठहराना।

2- मोबाइल पर दिन भर बेवजह व्यस्त रहना और बिना मांगे दूसरों को मुफ्त में सलाह देते रहना।

3- माता -पिता के द्वारा दी गयीं सुख सुविधाओं का उपभोग करना और स्वयं के कंधों पर बोझ आने पर जिम्मेदारियों से भागना।

4- अपनी प्रशंसा स्वयं करना और दूसरों के कार्यों में हमेशा गलतियों को निकालना।

5- बात- बात पर झूठ बोलना और कार्य न करने के लिए लिये बहाने बनाना।

6- पहली मुलाकात के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए धारणा बना लेना और एक तरफ़ा प्रेम में पड़कर खुद को बर्बाद कर लेना।

7- किये हुए वादे तोड़ देना और अपनी गलतियों के लिए किसी और को ज़िम्मेदार ठहराकर कहीं का गुस्सा कहीं और उतारना।

8- बिना कुछ जाने बिना कुछ समझे बड़ी आसानी से दूसरों को अपने आइने से तोल लेना और उसी हिसाब से दूसरों को उपदेश देते रहना।

9- नियमों को तोड़ना, चलता है कहकर चुप हो जाना और हर काम के लिए सरकार को दोष देना।

10- लोगों को नीचा दिखाने हेतु, उनके आत्मविश्वास पर हमला करना, बेवजह उन्हें कटु शब्दों से अपमानित करना।

11- किसी को गलत राय देकर दूसरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करना।